Supreme Order : संभल विवाद पर एक्शन न ले निचली अदालत, वहां शांति बनाएं, 6 जनवरी को होगी सुनवाई

डिजीटल डेस्क : Supreme Orderसंभल विवाद पर एक्शन न ले निचली अदालत, वहां शांति बनाएं, 6 जनवरी को होगी सुनवाई। संभल में जामा मस्जिद के सर्वे को लेकर आए निचली अदालत के आदेश पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने स्टे लगा दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को संभल जिला प्रशासन को मौके पर शांति और सद्भाव सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

साथ ही ट्रायल कोर्ट को 8 जनवरी तक मस्जिद सर्वे के संबंध में कोई भी कार्रवाई करने से परहेज करने का निर्देश दिया। इसी क्रम में सुप्रीम कोर्ट ने साफ तौर जोड़ा कि जब तक संभल मस्जिद की शाही ईदगाह कमेटी हाईकोर्ट नहीं जाती, तब तक मामले को आगे न बढ़ाया जाए।

मस्जिद कमेटी को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वो निचली अदालत के फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील दायर करें। मामला हाई कोर्ट में रहने तक निचली अदालत कोई एक्शन नहीं लेगा। इसी के साथ सुप्रीम कोर्ट ने एडवोकेट कमीशन को अपनी सर्वे रिपोर्ट सील बंद लिफाफे में जमा करने के लिए कहा है एवं अगली सुनवाई 6 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में होगी।

सीजेआई बोले – 3 दिनों में सुनवाई करे इलाहाबाद हाईकोर्ट

संभल मस्जिद विवाद मामले की सुनवाई सीजेआई संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली दो सदस्यीय पीठ ने की। अपनी सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट की इस पीठ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट से कहा कि – ‘अपील दायर होने के 3 दिन के अंदर सुनवाई करें। हमें निचली अदालत के आदेश पर कुछ आपत्तियां हैं। क्या यह हाई कोर्ट में अनुच्छेद 227 के क्षेत्राधिकार के अधीन नहीं है?

…इसे लंबित रहने दें। हम शांति और सद्भाव चाहते हैं। …आप दलीलें दाखिल करें, तब तक निचली अदालत कोई कार्रवाई नहीं करें।

…हम केस की मेरिट पर नहीं जा रहे हैं। याचिकाकर्ताओं को आदेश को चुनौती देने का अधिकार है। यह आदेश 41 के अंतर्गत नहीं है इसलिए आप प्रथम अपील दायर नहीं कर सकते। इस मामले में अगली सुनवाई 6 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट करेगा’।

संभल में गत दिनों हुए हिंसक बवाल का नजारा।
संभल में गत दिनों हुए हिंसक बवाल का नजारा।

शाही जामा मस्जिद का रखरखाव करने वाली कमेटी की सुप्रीम याचिका का ब्योरा…

शाही जामा मस्जिद का रखरखाव करने वाली कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट में पेश इस याचिका में सिविल जज के 19 नवंबर के एकपक्षीय आदेश पर रोक लगाने की मांग की।

समिति ने याचिका में कहा है कि – ’19 नवंबर को मस्जिद के हरिहर मंदिर होने का दावा करने वाली याचिका संभल कोर्ट में दायर हुई। उसी दिन सीनियर डिविजन के सिविल जज ने मामले को सुना और मस्जिद समिति का पक्ष सुने बिना सर्वे के एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त कर दिया।

एडवोकेट कमिश्नर 19 नवंबर की शाम ही सर्वे के लिए पहुंच भी गए और 24 नवंबर को फिर सर्वे हुआ। … जिस तेजी से सारी प्रक्रिया हुई, उससे लोगों में शक फैल गया और वे अपने घर से बाहर निकल गए। भीड़ के उग्र हो जाने के बाद पुलिस गोलीबारी हुई और 5 लोगों की मौत हो गई।

…शाही मस्जिद 16वीं सदी से वहां है। इतनी पुरानी धार्मिक इमारत के सर्वे का आदेश पूजास्थल अधिनियम और प्राचीन स्मारक एवं पुरातत्व स्थल कानून के खिलाफ है। अगर यह सर्वे जरूरी भी था तो यह एक ही दिन में बिना दूसरे पक्ष को सुने नहीं दिया जाना चाहिए था।

…सुप्रीम कोर्ट से आग्रह है कि वह निचली अदालत के आदेश और प्रक्रिया पर रोक लगाए। सर्वे रिपोर्ट को फिलहाल सीलबंद लिफाफे में रखा जाए।

… निवेदन है कि सुप्रीम कोर्ट यह भी आदेश दे कि इस तरह के धार्मिक विवादों में बिना दूसरे पक्ष को सुने सर्वे का आदेश ना दिया जाए क्योंकि ऐसे आदेशों से सांप्रदायिक भावनाएं भड़कने, कानून-व्यवस्था की समस्या और देश के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने को नुकसान पहुंचने की आशंका है’।

संभल में तनातनी की फाइल फोटो
संभल में तनातनी की फाइल फोटो

संभल के शाही जामा मस्जिद की सर्वे रिपोर्ट चंदौसी कोर्ट में नहीं हुई सुनवाई…

संभल में शाही जामा मस्जिद के हरिहर मंदिर होने का दावा करने के मामले में सिविल जज सीनियर डिविजन संभल स्थित चंदौसी की कोर्ट में आज पहली सुनवाई नहीं हुई। आज सर्वे रिपोर्ट अदालत में दाखिल किए जाने की संभावना जताई जा रही थी। इसको लेकर पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे।

बीते 19 नवंबर को सिविल जज सीनियर डिवीजन संभल स्थित चंदौसी की अदालत में संभल की शाही जामा मस्जिद को हरिहर मंदिर होने को लेकर कैला देवी मंदिर के महंत ऋषिराज गिरि, हरिशंकर जैन समेत 8 वादकारियों ने छह लोगों के विरुद्ध दावा दायर किया था।

कोर्ट ने उसी दिन कोर्ट कमिश्नर रमेश सिंह राघव को नियुक्त करके सर्वे (कमीशन) किए जाने के आदेश देते हुए आगामी तिथि 29 नवंबर सुनवाई के लिए नीयत की थी।

दूसरी ओर, हिंदू पक्ष के वकील विष्णु जैन ने सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट के बाहर आकर बताया कि – ‘कोर्ट ने शांति व्यवस्था पर चिंता जाहिर की है। कोर्ट ने मस्जिद कमेटी को कहा है कि आप इस निचली अदालत के आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दे सकते हैं। ट्रायल कोर्ट के आदेश पर लिमिटेड स्टे है।

…मामला जब हाई कोर्ट में जाएगा तब वो तय करेगा कि स्टे रहेगा या नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने एडवोकेट कमिशन को रिपोर्ट दाखिल करने से नहीं रोका है बल्कि ये रिपोर्ट सील लिफाफे में जमा करने के लिए कहा है’।

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