रांची: नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) की सिफारिशों के तहत विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने स्नातक और परास्नातक में प्रवेश के लिए नए नियमों का मसौदा जारी किया है। अब छात्रों को स्ट्रीम के बंधन से आजादी मिलेगी, जिससे वे 12वीं या स्नातक के विषय के बजाय अपनी रुचि के अनुसार किसी भी विषय में आगे की पढ़ाई कर सकेंगे।
नए नियमों के अनुसार, आर्ट्स और कॉमर्स से 12वीं पास छात्र अब विज्ञान विषयों में स्नातक कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें राष्ट्रीय या विश्वविद्यालय स्तर पर प्रवेश परीक्षा पास करनी होगी। इसी तरह, किसी भी विषय से स्नातक करने वाले छात्र अब परास्नातक में भी अपनी पसंद के किसी भी विषय का चयन कर सकते हैं।
यूजीसी चेयरमैन प्रोफेसर एम. जगदीश कुमार ने कहा कि छात्रों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए यह पहल की गई है। इसके साथ ही, उच्च शिक्षण संस्थानों में साल में दो बार दाखिले की योजना भी प्रस्तावित है।
विशेष रूप से, अब चार वर्षीय बीएससी ऑनर्स (फिजिक्स, बायोलॉजी, गणित आदि) करने वाले छात्र भी एमटेक/एमई कर सकेंगे, जो पहले सिर्फ बीटेक/बीई छात्रों के लिए आरक्षित था।
इन नियमों के तहत, प्रवेश जुलाई-अगस्त और जनवरी-फरवरी में दो सत्रों में होंगे। हालांकि, छात्रों का चयन सीयूईटी परीक्षा की मेरिट के आधार पर ही होगा, जो साल में एक बार आयोजित की जाती है।
यह मसौदा फिलहाल सुझावों के लिए प्रस्तुत किया गया है और जल्द ही अंतिम रूप देकर लागू किया जाएगा। इससे उच्च शिक्षा के क्षेत्र में व्यापक बदलाव की उम्मीद है।


