कैमूर : कैमूर जिला आयुष्मान भारत कार्ड बनाने में पूरे बिहार में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है, लेकिन स्वास्थ्य सुविधाओं की जमीनी हकीकत चौंकाने वाली है। अस्पतालों में भवन और मशीनें तो हैं पर विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी के कारण मरीजों को इलाज के लिए बाहर भेजा जा रहा है।
भभुआ सदर अस्पताल समेत जिले के कई सरकारी अस्पतालों में आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध हैं
भभुआ सदर अस्पताल समेत जिले के कई सरकारी अस्पतालों में आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध हैं, लेकिन सर्जिकल और अन्य गंभीर बीमारियों के विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं होने से मरीजों की परेशानी बढ़ गई है। आयुष्मान कार्डधारी मरीज जब गंभीर बीमारी या ऑपरेशन के लिए अस्पताल पहुंचते हैं तो उन्हें बनारस जैसे हायर सेंटर रेफर कर दिया जाता है। खासकर ट्रामा सेंटर नहीं होने से सड़क हादसों के मरीजों को भी तत्काल बाहर भेजना मजबूरी बन गया है।

सुविधाएं तो हैं, लेकिन हर बीमारी के विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध नहीं हैं – सिविल सर्जन चंदेश्वरी रजक
सिविल सर्जन चंदेश्वरी रजक का कहना है कि सुविधाएं तो हैं, लेकिन हर बीमारी के विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए रेफर करना पड़ता है। जिले में फिलहाल सात अस्पताल आयुष्मान योजना से जुड़े हैं, जहां आंख, हड्डी, जनरल सर्जरी और स्त्री रोग का इलाज हो रहा है।

कैंसर, हृदय, किडनी व न्यूरो जैसी गंभीर बीमारियों के मरीजों को वेदांता अस्पताल मे सरकारी खर्च पर भेजा जा रहा है
वहीं कैंसर, हृदय, किडनी और न्यूरो जैसी गंभीर बीमारियों के मरीजों को वेदांता अस्पताल मे सरकारी खर्च पर भेजा जा रहा है। यानी कैमूर में आयुष्मान कार्ड तेजी से बन रहे हैं, लेकिन अगर जिले में ही विशेषज्ञ इलाज की व्यवस्था नहीं हुई, तो योजना का पूरा फायदा मरीजों तक पहुंचना मुश्किल रहेगा। स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत अब और भी ज्यादा महसूस की जा रही है।

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ओम प्रकाश तिवारी की रिपोर्ट
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