Giridih: झारखंड में कोरोना टीकाकरण का हालात क्या है और उसकी विश्वसनीयता कितनी है, इसे एक बानगी से समझा जा सकता है.
बताया जा रहा है कि महेशलुंडी गांव के रहने वाले बुजुर्ग विश्वनाथ हजाम की 19 जून 2021 को मृत्यु हो गई. इस बीच मृतक का पौत्र रविन्द्र कुमार अपनी मां वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट डाउनलोड करने के लिए एक साइबर कैफे में गया.
यहां उसने अपने मोबाइल से लिंक पर घर के सभी सदस्यों के सर्टिफिकेट की पड़ताल शुरू कर दी. इस दौरान उसने अपने दिवंगत दादा विश्वनाथ हजाम के सर्टिफिकेट को भी चेक किया तो दंग रह गया. देखा कि उसके दिवंगत दादा को भी 11 दिसम्बर 2021 को दूसरा डोज पड़ गया है. अब वह सोच में पड़ गया कि आखिर मृतक को वैक्सीन कैसे लगा.
रविन्द्र का कहना है कि मौत से पहले 20 मार्च को उसके दादा विश्वनाथ ने कोविशिल्ड का पहला डोज लिया था. छह माह पूर्व उनका निधन हो गया. अब यह सवाल उठता है कि उनके दिवंगत दादा ने दूसरा डोज कैसे लिया.
सामाजिक कार्यकर्ता गणेश ठाकुर और शिवनाथ साव का कहना है इससे पहले भी वैक्सीन के सर्टिफिकेट में गड़बड़ी का मामला सामने आता रहा है. उनके पंचायत में कई लोगों ने कोविशिल्ड का डोज लिया है, लेकिन कइयों को कोवैक्सीन का सर्टिफिकेट मिल गया है. उन्होंने कहा कि ऐसे मामले की जांच होनी ही चाहिए. इस मामले पर सिविल सर्जन डॉ एसपी मिश्रा का कहना है कि यह मानवीय चूक है. वैसे इन मामलों को देखा जाएगा.
जिस व्यक्ति की मौत छह माह पहले हो गई थी उसे कोविशिल्ड का दूसरा डोज दिए जाने के दावे से परिजन के साथ-साथ विभाग के अधिकारी भी हैरान हैं. मृतक के परिजनों के साथ-साथ स्थानीय लोगों ने भी जांच की मांग की है. स्वास्थ्य विभाग पर सवाल उठने लगे हैं.
रिपोर्ट: आशुतोष श्रीवास्तव


