डीजीपी अनुराग गुप्ता के रिटायरमेंट पर केंद्र-राज्य आमने-सामने, सरयू राय का दावा- केंद्र ने रिटायरमेंट का निर्देश दिया

रांची: झारखंड के डीजीपी अनुराग गुप्ता के 30 अप्रैल 2025 के बाद पद पर बने रहने पर संशय के बादल मंडरा रहे हैं। जदयू विधायक सरयू राय ने सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया है कि केंद्र सरकार ने झारखंड सरकार को पत्र लिखकर अनुराग गुप्ता को 30 अप्रैल के बाद डीजीपी पद पर बनाए रखने के फैसले को गलत करार दिया है। केंद्र ने राज्य सरकार से अनुरोध किया है कि गुप्ता को निर्धारित तिथि पर सेवानिवृत्त किया जाए।

नई नियमावली के तहत हुई थी नियुक्ति
जनवरी 2025 में झारखंड सरकार ने डीजीपी की नियुक्ति के लिए नई नियमावली तैयार की थी। हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित की गई, जिसमें मुख्य सचिव, गृह सचिव और यूपीएससी के प्रतिनिधि को शामिल किया गया। इस कमेटी की अनुशंसा पर फरवरी 2025 में अनुराग गुप्ता को राज्य का नियमित डीजीपी नियुक्त किया गया। इसके पहले दिसंबर 2024 में उन्हें डीजीपी का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया था।

नियम के अनुसार, किसी अधिकारी को डीजीपी बनने के बाद दो वर्षों का कार्यकाल मिलना चाहिए, भले ही उसकी सेवानिवृत्ति की तिथि पहले हो। इसी आधार पर राज्य सरकार ने अनुराग गुप्ता का कार्यकाल बढ़ा दिया था। हालांकि, अब केंद्र सरकार के पत्र ने इस फैसले पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

राजनीतिक बयानबाजी तेज
सरयू राय ने आरोप लगाया कि विदेश यात्रा पर गए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को भी यह पत्र भेजा गया है। उन्होंने कहा कि केंद्र ने साफ कर दिया है कि 30 अप्रैल 2025 के बाद अनुराग गुप्ता डीजीपी नहीं रहेंगे। वहीं, राजद के प्रदेश महासचिव कैलाश यादव ने केंद्र सरकार के फैसले को राज्यहित के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा कि अनुराग गुप्ता ने भाजपा की सोच के खिलाफ काम किया और नक्सलवाद व अफीम की अवैध खेती के खिलाफ बड़ी सफलता हासिल की है, इसलिए उन पर कार्रवाई हो रही है।


इस पूरे मामले पर डीजीपी अनुराग गुप्ता का पक्ष जानने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका। इधर, राज्य सरकार की ओर से भी इस पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

पृष्ठभूमि में उठते रहे सवाल
उल्लेखनीय है कि अनुराग गुप्ता को पहली बार जुलाई 2024 में तत्कालीन डीजीपी अजय कुमार सिंह को हटाकर प्रभारी डीजीपी बनाया गया था। विधानसभा चुनाव के दौरान निर्वाचन आयोग के आदेश पर उन्हें हटाया गया था। फिर चुनाव बाद हेमंत सरकार ने उन्हें दोबारा प्रभारी डीजीपी बनाया और बाद में नियमित डीजीपी की अधिसूचना जारी की थी। अब उनके कार्यकाल को लेकर राज्य और केंद्र सरकार के बीच टकराव की स्थिति बन गई है।

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