रांची: झारखंड में शराब कारोबार से जुड़ी व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। राज्य सरकार की नई उत्पाद नीति के तहत अब नगर निगम और नगर परिषद क्षेत्रों में शराब की मॉडल दुकानें (Model Shops) खोली जाएंगी, जहां शराब पीने की भी व्यवस्था होगी। इन दुकानों में वातानुकूलित कक्ष, टेबल-कुर्सी और किचन की सुविधा रहेगी, जिससे ग्राहक वहीं बैठकर शराब का सेवन कर सकेंगे।
नयी उत्पाद नीति को हाल ही में राज्य कैबिनेट से मंजूरी मिल चुकी है और इसे लागू करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। हालांकि, नीति लागू करने में औसतन 40 से 45 दिन लगने की संभावना है, ऐसे में इसे जुलाई माह से लागू किया जा सकता है। फिलहाल, खुदरा शराब की दुकानों का संचालन कर रही प्लेसमेंट एजेंसी को 30 जून तक का कार्यकाल दिया गया है।
मॉडल शॉप्स की यह होंगी प्रमुख विशेषताएं:
- केवल नगर निगम और नगर परिषद क्षेत्रों में खोले जाएंगे।
- शराब पीने के लिए एसी हॉल, टेबल-कुर्सी, किचन जैसी सुविधाएं होंगी।
- विदेशी और देशी विदेशी शराब के साथ बीयर, वाइन और ब्रीजर भी मिलेंगे।
- इन दुकानों के लिए अलग से आवेदन करना होगा और शर्तों के अनुरूप स्थल की योजना विभाग को देनी होगी।
- प्रत्येक दुकान में लोकप्रिय ब्रांड की उपलब्धता अनिवार्य होगी।
लाइसेंस प्रक्रिया ई-लॉटरी से
खुदरा दुकानों की बंदोबस्ती ई-लॉटरी प्रणाली से की जाएगी। इसके लिए एनआईसी की मदद से सॉफ्टवेयर तैयार हो चुका है और इसकी टेस्टिंग भी की जा चुकी है। दुकानों के लिए आवेदन, स्क्रूटनी और चयन की पूरी प्रक्रिया सॉफ्टवेयर के माध्यम से होगी।
राज्य में कुल 1453 खुदरा दुकानें
झारखंड में इस समय कुल 1453 खुदरा शराब दुकानें हैं, जिन्हें समूह के आधार पर बंदोबस्त किया जाएगा। एक समूह में अधिकतम चार दुकानें हो सकती हैं। समीक्षा के बाद कुछ जिलों में दुकानों की संख्या बढ़ाई भी जा सकती है, ताकि सरकार को पूरा राजस्व प्राप्त हो सके।
उत्पाद नीति में कर कटौती, विदेशी शराब होगी सस्ती
नयी उत्पाद नीति के तहत शराब पर लगने वाले बैट (Bottling and Excise Tax) में कटौती की गयी है। इससे विदेश में निर्मित शराब सस्ती हो जाएगी, जबकि राज्य में प्रचलित ब्रांड की शराब महंगी हो सकती है।
शराब व्यापारियों ने जताया आभार
राज्य की नई उत्पाद नीति को लेकर झारखंड शराब व्यापारी संघ ने सरकार का आभार जताया है। संघ के प्रदेश अध्यक्ष अचिंत्य शॉ और महासचिव सुबोध कुमार जायसवाल ने कहा कि व्यापारी लंबे समय से इस बदलाव की मांग कर रहे थे और अब सरकार ने इसे स्वीकार कर सकारात्मक पहल की है।
अधिकारियों की अनुपस्थिति में चल रही प्रक्रिया
गौरतलब है कि उत्पाद आयुक्त विजय कुमार सिन्हा 5 अप्रैल से प्रशिक्षण पर राज्य से बाहर हैं और 13 जून तक लौटने की संभावना नहीं है। ऐसे में बिना उनके प्रभार के ही नई नीति लागू करने की प्रक्रिया जारी है।


















