गम्हरिया : सामूहिक आत्महत्या – झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले में शुक्रवार रात एक हृदयविदारक घटना सामने आई। आदित्यपुर थाना क्षेत्र के गम्हरिया स्थित चित्रगुप्त नगर में टाटा स्टील के सीनियर मैनेजर कृष्ण कुमार (40) ने अपनी पत्नी डॉली देवी (35) और दो बेटियों — पूजा कुमारी उर्फ मैया (13) और 6 वर्षीय पुत्री — के साथ फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
घटना की जानकारी मिलते ही बीडीओ अभय कुमार द्विवेदी और आदित्यपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने चारों शवों को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। पुलिस को कृष्ण कुमार के कमरे से एक सुसाइडल नोट भी मिला है, जिसमें उन्होंने ब्लड कैंसर, पारिवारिक कलह और भविष्य की चिंता का उल्लेख किया है।
ब्लड कैंसर, पारिवारिक कलह और भविष्य की चिंता बना आत्महत्या का कारण :
बीडीओ ने मृतक के पिता से पूछताछ की। उन्होंने बताया कि कृष्ण कुमार टाटा स्टील में सीनियर मैनेजर थे और ब्लड कैंसर से पीड़ित थे। बीमारी का पता चलने के बाद बहू डॉली देवी के आग्रह पर वे अपने बेटे को इलाज के लिए मुंबई ले गए थे। वहां चिकित्सकों ने कीमोथेरेपी की सलाह दी। यह सुविधा जमशेदपुर में भी उपलब्ध है, इसलिए वे फ्लाइट से लौटकर वापस जमशेदपुर पहुंचे।
जीवन अनमोल है : आप अकेले नहीं हैं। जीवन में कठिन समय आता है, लेकिन हर समस्या का हल होता है। यदि आप मानसिक तनाव, अवसाद या आत्महत्या जैसे विचारों से जूझ रहे हैं, तो तुरंत मदद लें।

कृष्ण कुमार ने कंपनी में इलाज के लिए अवकाश का आवेदन भी दिया था, लेकिन उससे पहले ही यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना घट गई। मृतक के पिता ने बताया कि गुरुवार रात से पूरा परिवार घर से बाहर नहीं निकला था, जिस पर संदेह होने पर पुलिस को सूचना दी गई। शुक्रवार रात जब पुलिस ने दरवाजा तोड़ा तो देखा कि चारों के शव फंदे से लटके हुए थे।
स्थानीय लोग और प्रशासन इस घटना से स्तब्ध हैं। वहीं, यह सवाल भी खड़ा हो रहा है कि क्या समाज और सिस्टम की ओर से समय पर उचित सहारा मिलता, तो क्या यह त्रासदी रोकी जा सकती थी?
अब वक्त है कि समाज संवेदनशील हो — ताकि अगली त्रासदी रोकी जा सके।
अब समाज को रुककर सोचना होगा — क्या हमने एक और परिवार को अकेला छोड़ दिया?
यह सिर्फ आत्महत्या नहीं, एक संदेश है — अब वक्त है समाज को जागने का
कब तक हम चुप रहेंगे? अब समाज को मानसिक स्वास्थ्य को गंभीरता से लेना होगा
अब नहीं तो कब? परिवारों को टूटने से पहले बचाना समाज की जिम्मेदारी है
कृष्ण कुमार की मौत एक चेतावनी है — अब समाज को मददगार बनना होगा, मूकदर्शक नहीं
अगर हम अब भी नहीं चेते तो और कितने परिवार यूं ही टूटते रहेंगे?
समाज को अब एक नई सोच की ज़रूरत है — संवेदनशील, सतर्क और साथ देने वाली


















