रांची: रांची के सिरम टोली फ्लाईओवर पर जारी निर्माण कार्य अंतिम चरण में है, लेकिन इसके रैंप की स्थिति को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। आदिवासी समाज के कई संगठनों ने इसे धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाओं से जुड़ा मामला बताया है। उनका कहना है कि सरना धर्मस्थल के समीप फ्लाईओवर का रैंप बनाया जाना सरना संस्कृति और आस्था के साथ खिलवाड़ है।
विरोध के स्वर लगातार तेज हो रहे हैं। आदिवासी बचाओ मोर्चा के बैनर तले आदिवासी संगठनों ने 27 मई को राजभवन के समक्ष प्रदर्शन किया था और अब 4 जून को पूरे झारखंड में बंद का आह्वान किया गया है। प्रदर्शनकारियों का स्पष्ट कहना है कि जब तक रैंप को सरना स्थल से नहीं हटाया जाता, आंदोलन जारी रहेगा।
फ्लाईओवर के उद्घाटन की संभावित तारीख 10 जून बताई जा रही है। आदिवासी समाज ने चेतावनी दी है कि जिस दिन इसका उद्घाटन किया जाएगा, उस दिन भी झारखंड बंद किया जाएगा और काला पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। प्रदर्शनकारी यह भी आरोप लगा रहे हैं कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के विदेश दौरे के दौरान पुलिस बल की मौजूदगी में निर्माण कार्य जबरन पूरा करवाया गया, जिससे उनके भीतर आक्रोश है।
आंदोलनकारी कहते हैं कि उन्होंने हेमंत सोरेन को अपना नेता मानकर उनका समर्थन किया था, लेकिन अब वही सरकार उनकी संस्कृति और पहचान को नजरअंदाज कर रही है। वहीं, आदिवासी बचाओ मोर्चा ने भूमि बैंक, सरना धर्म न्यास बोर्ड जैसे अन्य मुद्दों को भी इस आंदोलन से जोड़ा है और कहा है कि यह संघर्ष केवल फ्लाईओवर तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापक आदिवासी हितों की रक्षा के लिए है।
अब देखना यह होगा कि सरकार इस आंदोलन को कितनी गंभीरता से लेती है और क्या फ्लाईओवर का उद्घाटन तय समय पर हो पाता है या फिर विरोध के चलते कोई निर्णय बदलता है।



















