मतदाता पुनरीक्षण के विरोध में चुनाव आयोग पहुंचे विपक्षी दलों का प्रतिनिधिमंडल, चुनाव आयोग ने कहा ‘अनधिकृत…’

नई दिल्ली: बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर सियासत चरम पर तो है ही दूसरी तरफ अब चुनाव आयोग के बिहार में गहन मतदाता पुनरीक्षण कार्य को लेकर सियासत को एक नई हवा मिल गई है। मतदाता पुनरीक्षण कार्य के विरोध में बुधवार को राजद, कांग्रेस, भाकपा माले, सीपीआई और सीपीएम समेत 11 विपक्षी दलों के 20 प्रतिनिधियों ने चुनाव आयोग में मुलाकात कर विरोध दर्ज कराया। करीब 3 घंटे तक चली मुलाकात के बाद बाहर आये विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग पर सवाल खड़े किये।

उनके पास जवाब नहीं

मामले में बात करते हुए राजद प्रवक्ता सह राज्यसभा सांसद मनोज झा ने कहा कि हमने चुनाव आयोग के सामने बिहार की चिंताएं रखीं। मैंने उन्हें राजद नेता तेजस्वी यादव का पत्र भी सौंपा। मतदाता पुनरीक्षण कार्य लोगों को बेदखल करने की एक कोशिश है। चुनाव आयोग में जब हमने पूछा कि जब 22 वर्षों में नहीं की गई तो अभी क्यों तो उनके पास जवाब नहीं था।

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अनुरोध से नहीं है सहमत

वहीं दूसरी तरफ सीपीआई सांसद डी राजा ने कहा कि हमलोग बिहार चुनाव में आने वाली समस्याओं पर चर्चा करने चुनाव आयोग पहुंचे थे। हमने उनसे बिहार में भारी बारिश, बाढ़ की आशंका के बारे में अवगत करवाते हुए मतदाता पुनरीक्षण कार्य टालने का अनुरोध किया लेकिन चुनाव आयोग हमारे अनुरोध से सहमत नजर नहीं आया।

क्या अब तक के चुनाव नियमों से परे?

कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि बिहार में इससे पहले मतदाता पुनरीक्षण कार्य वर्ष 2003 में किया गया था। उस वक्त भी चुनाव से करीब डेढ़ वर्ष पहले यह काम किया गया था जिसके बाद चुनाव हुई थी तो दिक्कतें नहीं हुई थी। लेकिन इस बार एन चुनाव से ठीक पहले बहुत कम समय में यह काम करवाया जा रहा है। हमने चुनाव आयोग में पूछा कि इससे पहले चार से पांच चुनाव बिहार में हो चुके हैं क्या वे सभी नियमों के अनुसार नहीं हुए या वे सारे चुनाव गलत थे? मतदाता पुनरीक्षण कार्य अगर करना ही था तो कुछ समय पहले किया जा सकता था

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एकदम से चुनाव सर पर होने के बाद ही क्यों। उन्होंने कहा कि हमने अपनी सारी बातें चुनाव आयोग के सामने रखी है। बिहार में करीब 8 करोड़ मतदाता हैं और उनकी पहचान करना एक महीने में बिल्कुल ही संभव नहीं है। इस बार के मतदाता पुनरीक्षण कार्य में 2003 के बाद मतदाता सूची में जोड़े गए लोगों को उनके माता पिता की दस्तावेज मांगी गई है जो कई लोगों के पास उपलब्ध नहीं है।

अनधिकृत व्यक्तियों का नहीं लिया जायेगा संज्ञान

वहीं मतदाता पुनरीक्षण कार्य को लेकर विरोध दर्ज कराने के मामले में अब चुनाव आयोग ने विभिन्न दलों के प्रतिनिधियों को अनधिकृत व्यक्ति बताते हुए कहा कि अब केवल राजनीतिक दलों के प्रमुखों से इस तरह के संवाद का संज्ञान लिया जायेगा। चुनाव आयोग के अधिकारियों ने बताया कि विभिन्न राजनीतिक दलों का प्रतिनिधित्व करने का दावा करने वाले कई व्यक्ति बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण पर चर्चा के लिए समय की मांग कर रहे हैं लेकिन अब चुनाव आयोग इस तरह के अनधिकृत व्यक्तियों को ख़ारिज कर देगा।

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