रांची: रांची में मकान बनाने से पहले नक्शा पास कराना आम नागरिकों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। नगर निगम की लापरवाही और प्रशासनिक अराजकता का आलम यह है कि झारखंड हाईकोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद नक्शा पास करने की प्रक्रिया अब भी धीमी और बाधाओं से भरी है।
हाईकोर्ट के निर्देश की उड़ रही धज्जियां
झारखंड हाईकोर्ट ने हाल ही में रांची नगर निगम को निर्देश दिया था कि नक्शा पास करने में हो रही देरी पर रोक लगाई जाए और पूर्ववर्ती व्यवस्था के तहत कार्य किया जाए, जिससे आवेदकों की फाइलें अनावश्यक कानूनी जांच में अटकने से बच सकें। लेकिन नगर निगम ने कोर्ट के निर्देशों को लागू करने में कोई तत्परता नहीं दिखाई है।
नव नियुक्त लीगल एडवाइजर की अनुभवहीनता बनी बाधा
नगर निगम ने हाल ही में नव नियुक्त लीगल एडवाइजर को नक्शा आवेदनों की लीगल जांच की जिम्मेदारी दी है। लेकिन उनके पास अनुभव की कमी होने के कारण लीगल जांच की प्रक्रिया पूरी तरह ठप पड़ गई है। नतीजा यह है कि पिछले छह महीनों से आम नागरिकों के लगभग 350 भवन नक्शा आवेदन लंबित पड़े हैं, जिनमें से 170 फाइलें केवल लीगल जांच में फंसी हुई हैं।
हर दिन लौटते हैं निराश आवेदक और आर्किटेक्ट
हर दिन दर्जनों की संख्या में आवेदक और आर्किटेक्ट निगम कार्यालय के चक्कर लगाते हैं, लेकिन उन्हें कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिलता। पूर्व में लीगल जांच को सरल रखा गया था और फाइलें अधिक समय तक लंबित नहीं रहती थीं। यही कारण है कि हाईकोर्ट ने भी पुरानी व्यवस्था बहाल करने का स्पष्ट आदेश दिया था।
नक्शा शाखा में कुशल नेतृत्व का अभाव
रांची नगर निगम की नक्शा शाखा में कार्यों का निष्पादन अब अनुभवहीनता और अव्यवस्था के हवाले है। इसके कारण आम नागरिकों का समय, श्रम और धन तीनों बर्बाद हो रहे हैं, और उन्हें बुनियादी निर्माण कार्यों के लिए भी कोर्ट या वरिष्ठ अधिकारियों की शरण में जाना पड़ रहा है।
रांची नगर निगम की उदासीनता और अनुभवहीन प्रशासनिक नियुक्तियों की वजह से आम जनता को गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। यदि जल्द ही निगम हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुरूप प्रक्रिया को सुव्यवस्थित नहीं करता है, तो यह मामला लोकहित याचिका और प्रशासनिक हस्तक्षेप की ओर बढ़ सकता है।


















