रांची: झारखंड के बहुचर्चित 77 करोड़ रुपये से अधिक के शराब घोटाले मामले में बड़ा मोड़ आ गया है। एसीबी (भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो) ने 90 दिनों की तय समय सीमा पूरी होने के बावजूद कोर्ट में चार्जशीट दाखिल नहीं की है।
मामले में जेल में बंद वरीय IAS अधिकारी विनय कुमार चौबे अब डिफॉल्ट बेल के पात्र हो गए हैं। एसीबी के अनुसार, आरोपियों के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति आदेश (Sanction for Prosecution) प्राप्त नहीं होने के कारण चार्जशीट दाखिल नहीं की जा सकी।
कब हुई गिरफ्तारी?
एसीबी टीम ने 20 मई को विनय कुमार चौबे को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। 18 अगस्त को उनकी गिरफ्तारी के 91 दिन पूरे हो गए। कानून के मुताबिक किसी भी मामले में आरोपी को जेल में रहते हुए जांच अधिकारी को 60 या 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल करनी होती है। शराब घोटाले की जांच अवधि 90 दिन तय थी। एक दिन की देरी भी होने पर आरोपी को डिफॉल्ट बेल का अधिकार मिल जाता है।
10 आरोपी अभी जेल में
इस मामले में कुल 10 आरोपी जेल में बंद हैं। अब विनय चौबे समेत सभी आरोपियों को डिफॉल्ट बेल का लाभ मिलने की संभावना बढ़ गई है। मामले की सुनवाई कोर्ट में जारी है।
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