रांची: झारखंड के सरकारी स्कूलों में पढ़ाई कर रहे लाखों बच्चों को अब एक यूनिक पहचान संख्या दी जाएगी। इसे PEN कहा जा रहा है। यह 12 अंकों का नंबर होगा, जो बच्चों के लिए स्थायी शैक्षिक पहचान बनेगा। शिक्षा विभाग ने इसे चरणबद्ध तरीके से लागू करना शुरू कर दिया है।
बोर्ड परीक्षा में अनिवार्य होगा PEN
शिक्षा विभाग के मुताबिक वर्ष 2026 से 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षा में बैठने के लिए PEN अनिवार्य होगा। जिन छात्रों के पास यह नंबर नहीं होगा, उन्हें परीक्षा में शामिल होने की अनुमति नहीं मिलेगी। इसका सीधा मतलब यह है कि अब हर बच्चे का यह नंबर बनवाना जरूरी होगा।
बच्चों का पूरा डिजिटल रिकॉर्ड
PEN के जरिए प्रत्येक छात्र का डिजिटल डेटाबेस तैयार किया जाएगा। इसमें बच्चे की व्यक्तिगत जानकारी, उसका एडमिशन डिटेल, पढ़ने का विषय, शारीरिक विवरण और शैक्षिक प्रगति जैसी जानकारी दर्ज होगी। इतना ही नहीं, इस नंबर के आधार पर बच्चे का DigiLocker अकाउंट भी सक्रिय होगा, जिसमें उसकी शैक्षिक उपलब्धियां सुरक्षित रहेंगी।
UDISE Plus से जुड़ी प्रक्रिया
यह पूरा काम UDISE Plus (यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन) के माध्यम से किया जा रहा है। हर स्कूल को अपने विद्यार्थियों का डेटा इस पोर्टल पर अपलोड करना होता है। जैसे ही छात्र का विवरण भरा जाता है, उसी समय उसके लिए एक यूनिक PEN जनरेट हो जाता है। यही नंबर आगे चलकर उसकी पढ़ाई और अन्य गतिविधियों की पहचान बनेगा।
छात्रों और सरकार दोनों को लाभ
PEN से जहां छात्रों को एक स्थायी और सुरक्षित पहचान मिलेगी, वहीं सरकार को भी विद्यार्थियों तक योजनाएं पहुंचाने और उनकी शैक्षिक स्थिति पर नजर रखने में आसानी होगी। शिक्षा विभाग का मानना है कि इससे शिक्षा व्यवस्था और पारदर्शी होगी और छात्रों को हर स्तर पर लाभ मिलेगा।
वर्तमान में राज्य के लाखों बच्चों का PEN तैयार किया जा चुका है और इसे धीरे-धीरे सभी छात्रों तक विस्तार दिया जा रहा है।


















