बांका में करोड़ों खर्च के बाद भी सूखे हैं नल ! मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट में लगा पलीता, हर घर नल-जल योजना साबित हुई फेल!
बांका : जिले के बाराहाट के मिर्जापुर पंचायत में हर घर नल का जल योजना पूरी तरह से बेपटरी होती दिखाई दे रही है। चंगेरी और मिर्जापुर—दोनों गांवों में नल तो है, लेकिन पानी नहीं। पाइप तो बिछा है, मगर धारा नहीं। हाल ये है कि पिछले कई महीनों से ग्रामीण पानी के एक-एक बूंद को तरस रहे हैं।

चंगेरी गांव के अधिकतर वार्ड का हाल खराब, जलमीनार बना हाथी का दांत
चंगेरी गांव के वार्ड नंबर 2, 3 और 4 में पाइपलाइन पांच साल पहले बिछा दी गई थी लेकिन आज तक नल से पानी की एक बूंद भी नहीं आई। लोग लगातार अधिकारियों से शिकायत करते रहे, मगर हालात जस के तस बने हुए हैं। वहीं मिर्जापुर गांव के वार्ड 5 और 6 की स्थिति भी कुछ बेहतर नहीं। यहां पिछले तीन महीने से जलमीनार से जलापूर्ति पूरी तरह ठप है। लोग मजबूर होकर बाजार से बोतलबंद पानी खरीद रहे हैं, या फिर हैंडपंप और स्थानीय जलस्रोतों पर ही निर्भर हैं।


ग्रामीणों ने कहा करोड़ खर्च के बजाय हर टोले में चापाकल दिया जाता, 2015 में कुछ महीने स्थिति ठीक थी
ग्रामीणों के मुताबिक लगभग 3,000 से अधिक लोग इस संकट से प्रभावित हैं। कहीं पाइप टूटी है, कहीं जाम है, तो कहीं मोटर ही काम नहीं कर रही है। वहीं विभाग की ओर से मरम्मत की कोई पहल अब तक नहीं की गई। ग्रामीणों का दर्द यह भी है कि 2015 में जब योजना शुरू हुई थी, शुरुआती एक-दो महीने पानी आया लेकिन उसके बाद स्थिति लगातार बिगड़ती चली गई। लोगों का कहना है कि “अगर इतने करोड़ खर्च करने के बजाय हर टोले में चापाकल लगा दिए गए होते, तो आज यह दिन नहीं देखना पड़ता।”

सरकारी पैसा पानी की तरह बहाया गया लेकिन पानी नहीं आया, प्रशासन से जल्द जलापूर्ति सुनिश्चित करने की मांग
मिथिलेश कापरी, अनिल यादव, राजेंद्र यादव समेत कई ग्रामीणों ने साफ कहा—सरकार ने पानी की तरह पैसा बहाया, लेकिन पानी लोगों तक नहीं पहुंचा। पाइपलाइन 10 साल से खराब है, लेकिन उसकी मरम्मत तक नहीं हुई। लोगों ने अब प्रशासन से गांव में सर्वे कराने और जल्द से जल्द पेयजल आपूर्ति बहाल करने की मांग की है। सरकार की सात निश्चय योजना का एक बड़ा वादा—हर घर नल का जल योजना मिर्जापुर और चंगेरी में फिलहाल ‘टांय-टांय फिस्स’ नज़र आता है।
ग्रामीणों का सवाल, आखिर कब पहुँचेगा हर घर नल का जल
परेशान ग्रामीणों का प्रशासन से सवाल हैं…“आख़िर करोड़ों खर्च होने के बावजूद लोगों को पीने का पानी कब मिलेगा?”
दीपक कुमार बांका की रिपोर्ट
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