बीएनआरसी–बीयूएचएस विवाद में अटकी बिहार की नर्सिंग-पैरामेडिकल शिक्षा दो साल से परीक्षा नहीं, एक लाख से ज्यादा छात्रों का भविष्य अधर में

बीएनआरसी–बीयूएचएस विवाद में अटकी बिहार की नर्सिंग-पैरामेडिकल शिक्षा दो साल से परीक्षा नहीं, एक लाख से ज्यादा छात्रों का भविष्य अधर में

22 Scope News Desk :   बिहार में पैरामेडिकल और नर्सिंग शिक्षा पिछले दो वर्षों से प्रशासनिक टकराव में फंसी हुई है। बीएनआरसी (बिहार नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल) और बिहार यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज (बीयूएचएस) के बीच अधिकारों को लेकर जारी लड़ाई का सीधा असर छात्रों पर पड़ रहा है। हालात यह हैं कि सत्र 2023-24 के 50,000 छात्रों की प्रथम वर्ष की परीक्षा आज तक आयोजित नहीं हो सकी, जबकि नामांकन को पूरा दो साल हो चुके हैं।

वहीं 2024-25 सत्र में भी 50 हजार से अधिक छात्र नामांकित हैं, लेकिन पिछली बैच की परीक्षा ही नहीं होने के कारण पूरा सिस्टम ठप है। छात्र महीनों से इंतजार कर रहे हैं, पर कोई ठोस फैसला अब तक नहीं आया।

 विवाद की पृष्ठभूमि

गौरतलब हो कि पूर्व के आदेश के विपरीत राज्य सरकार ने 28 मार्च 2024 को आदेश जारी कर पैरामेडिकल, नर्सिंग, फार्मेसी, डेंटल और लैब टेक्नीशियन कोर्स से जुड़े सभी संस्थानों की संबद्धता व परीक्षा संचालन का अधिकार बीयूएचएस को सौंप दिया। इसके बाद 28 अक्टूबर 2024 को विश्वविद्यालय ने सभी संस्थानों से पुनः संबद्धता के लिए आवेदन मांगा।

इसी निर्णय के विरोध में कई निजी संस्थानों ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उनका तर्क था कि 1935 का बिहार-ओडिशा नर्सेस रजिस्ट्रेशन एक्ट और 1997 के नर्सिंग रूल्स के अनुसार संबद्धता और परीक्षा संचालन का अधिकार बीएनआरसी के पास है। वही वर्षों से यह प्रक्रिया संभालती आई है।

दूसरी ओर बीयूएचएस का कहना है कि बीयूएचएस एक्ट 2021 लागू होने के बाद स्वास्थ्य शिक्षा से जुड़े सभी संस्थान विश्वविद्यालय के अधीन आते हैं। बीएनआरसी केवल प्रशिक्षण मानक और रजिस्ट्रेशन तक सीमित है।

कोर्ट का फैसला, पर मामला अभी अपील में

हाई कोर्ट ने हाल ही में स्पष्ट किया कि संबद्धता और परीक्षा संचालन का अधिकार बीयूएचएस के पास है।
पर मामले को उच्च स्तर पर अपील में भेज दिया गया, जिससे प्रक्रिया एक बार फिर अटक गई है।

छात्र बोले — “पढ़ाई पूरी हो रही, करियर रुका है”

छात्रों का कहना है कि वे दो वर्षों से परीक्षा की तारीख का इंतजार कर रहे हैं। कई छात्रों के रोजगार-इंटर्नशिप अवसर भी इस देरी से प्रभावित हुए हैं। संस्थान भी असमंजस में हैं कि अगला सत्र बढ़ाएँ या पिछला पूरा होने का इंतजार करें।

बीयूएचएस परीक्षा नियंत्रक बिमलेश झा के अनुसार—

“आदेश की आधिकारिक प्रति मिलते ही परीक्षा फॉर्म जारी कर दिए जाएंगे। हमें उम्मीद है कि उच्च न्यायालय भी निर्णय को सही ठहराएगा।”

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