Liquor scam investigation: बड़ा खुलासा, सप्लायर कंपनियों ने सरकार को 448 करोड़ का नुकसान पहुंचाया

झारखंड में शराब घोटाले की एसीबी जांच में बड़ा खुलासा, होलसेल सप्लायर कंपनियों की अनियमितताओं से सरकार को 448 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान


Liquor scam investigation : झारखंड में सामने आए शराब घोटाले की परतें अब तेजी से खुलने लगी हैं। एंटी करप्शन ब्यूरो की जांच में यह बड़ा खुलासा हुआ है कि राज्य में शराब की होलसेल सप्लाई करने वाली कंपनियों ने सरकार को करीब 448 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान पहुंचाया है। यह नुकसान शराब आपूर्ति व्यवस्था में भारी अनियमितताओं और नियमों की अनदेखी के कारण हुआ।

Liquor scam investigation: एसीबी जांच में उजागर हुआ 448 करोड़ का राजस्व नुकसान

एसीबी की जांच के दौरान यह सामने आया है कि शराब की आपूर्ति से जुड़ी कंपनियों ने न केवल निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया, बल्कि सरकार को आर्थिक रूप से नुकसान पहुंचाने की कोशिश भी की। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि समय पर शराब की आपूर्ति नहीं की गई और कई स्थानों पर तय मात्रा से कम शराब सप्लाई की गई। इसके चलते राज्य में शराब की उपलब्धता प्रभावित हुई और सरकार को अपेक्षित राजस्व प्राप्त नहीं हो सका।


Key Highlights

  1. एसीबी जांच में शराब घोटाले से 448 करोड़ रुपये के नुकसान का खुलासा

  2. होलसेल सप्लायर कंपनियों पर नियमों के उल्लंघन का आरोप

  3. दीशिता वेंचर्स को अधूरे दस्तावेजों पर मिला शराब सप्लाई का ठेका

  4. समय पर और तय मात्रा में आपूर्ति न होने से प्रभावित हुआ राजस्व

  5. टेंडर प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं की पुष्टि


Liquor scam investigation: नियमों को नजरअंदाज कर दी गई ठेका प्रक्रिया

जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि शराब सप्लाई का ठेका दीशिता वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड को दिया गया था। नियमानुसार, कंपनी को ठेका मिलने से पहले तीन वर्षों के सेल टैक्स, प्रोफेशनल टैक्स और वैल्यू एडेड टैक्स से जुड़े प्रमाणपत्र जमा करने थे। लेकिन कंपनी ने केवल दो वर्षों के प्रमाणपत्र प्रस्तुत किए। इसके बावजूद टेंडर कमेटी ने नियमों को नजरअंदाज करते हुए कंपनी को ठेका दे दिया, जो प्रक्रिया में गंभीर खामी की ओर इशारा करता है।

Liquor scam investigation: आपूर्ति में देरी और मात्रा में कमी से बढ़ा नुकसान

ठेका मिलने के बाद भी कंपनी की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हुए। एसीबी की जांच में पाया गया कि निर्धारित समय पर शराब की आपूर्ति नहीं की गई और कई बार तय मात्रा से कम सप्लाई की गई। इससे बाजार में शराब की मांग और उपलब्धता प्रभावित हुई, जिसका सीधा असर राज्य के राजस्व पर पड़ा। जांच एजेंसी का मानना है कि यदि नियमों का सख्ती से पालन किया गया होता, तो सरकार को इतने बड़े नुकसान से बचाया जा सकता था।

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