Coal Mine PF Rules 2026: PF कानून तोड़ने वालों पर कैसे होगी कार्रवाई? केंद्र ने जारी किया नया ड्राफ्ट

Coal Mine PF Rules 2026: केंद्र सरकार ने कोयला खदानों में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए ‘कोल माइन्स प्रोविडेंट फंड’ (CMPF) से जुड़े कानूनों के उल्लंघन पर कार्रवाई की प्रक्रिया को स्पष्ट करने के लिए नियमों का ड्राफ्ट जारी किया है। कोयला मंत्रालय ने “कोल माइन्स प्रोविडेंट फंड एंड मिसलेनियस प्रोविजन्स (एडजुडिकेशन ऑफ पेनल्टीज़ एंड अपील) रूल्स, 2026” को सार्वजनिक किया है और आम जनता व संबंधित पक्षों से सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। एक बार प्रस्तावित नियम लागू हो जाने के बाद, ‘कोल माइन्स प्रोविडेंट फंड एंड मिसलेनियस प्रोविजन्स एक्ट, 1948’ के तहत जुर्माना तय करने, जांच करने और अपील से निपटने की प्रक्रिया इन्हीं तय नियमों के अनुसार होगी।

शिकायतों या रिपोर्ट के आधार पर जांच

ड्राफ्ट नियमों के अनुसार, अगर एडजुडिकेटिंग ऑफिसर (निर्णय लेने वाले अधिकारी) को लगता है कि किसी कंपनी, नियोक्ता, ठेकेदार या अन्य संबंधित व्यक्ति ने एक्ट या उसके तहत लागू किसी योजना का उल्लंघन किया है, तो वे खुद से (suo motu) या किसी शिकायत, निरीक्षण रिपोर्ट, अनुपालन रिपोर्ट या अन्य उपलब्ध रिपोर्ट के आधार पर जांच शुरू कर सकते हैं। जांच के दौरान, संबंधित संस्था को रजिस्टर, दस्तावेज, रिटर्न और जरूरी स्पष्टीकरण पेश करने के लिए कहा जा सकता है।

बिना नोटिस जारी किए कोई जुर्माना नहीं

ड्राफ्ट में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों को प्राथमिकता दी गई है। अगर उल्लंघन का *प्रथम दृष्टया* (prima facie) मामला बनता है, तो संबंधित पक्ष को फॉर्म-1 के जरिए नोटिस जारी किया जाएगा। नोटिस में कथित उल्लंघन का विवरण, संबंधित कानूनी प्रावधान, जरूरी दस्तावेज और जवाब जमा करने की समय-सीमा बताई जाएगी। आमतौर पर, जवाब दाखिल करने के लिए 15 से 30 दिन का समय दिया जाएगा।

ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से सुनवाई

नए नियमों के तहत, संबंधित व्यक्ति अपना पक्ष खुद या किसी अधिकृत प्रतिनिधि के जरिए रख सकता है। सुनवाई भौतिक रूप से या डिजिटल (ऑनलाइन) तरीके से हो सकती है। अगर कोई पक्ष नोटिस मिलने के बावजूद जवाब नहीं देता है या सुनवाई के लिए पेश नहीं होता है, तो एडजुडिकेटिंग ऑफिसर उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर एकतरफा (ex-parte) फैसला ले सकते हैं।

जुर्माना तय करने के लिए स्पष्ट मानदंड

पहली बार, ड्राफ्ट नियमों में उन कारकों को स्पष्ट किया गया है जिन पर जुर्माना तय करते समय विचार किया जाएगा। इनमें उल्लंघन की गंभीरता और अवधि, प्रभावित कर्मचारियों या पेंशनभोगियों की संख्या, पहले हुए उल्लंघन, संस्था द्वारा अनुचित लाभ उठाना, जनहित या फंड को संभावित नुकसान, जानबूझकर की गई गड़बड़ी और जांच के दौरान मिले सहयोग का स्तर शामिल है। इसके अलावा, एडजुडिकेटिंग ऑफिसर को हर मामले में कारण बताते हुए आदेश जारी करना होगा। अगर आरोप साबित नहीं होते हैं, तो मामला बंद कर दिया जाएगा; हालांकि, अगर उल्लंघन साबित हो जाता है, तो एक्ट के प्रावधानों के अनुसार जुर्माना लगाया जाएगा।

30 दिनों के भीतर अपील करने का अधिकार

ड्राफ्ट नियमों के तहत, एडजुडिकेटिंग ऑफिसर के आदेश से असंतुष्ट कोई भी व्यक्ति 30 दिनों के भीतर अपीलीय अथॉरिटी के पास अपील दायर कर सकता है। अगर देरी का कोई ठोस कारण हो, तो इस अवधि के बाद दायर अपील भी स्वीकार की जा सकती है। जहां तक ​​संभव हो, अपील का निपटारा 60 दिनों के भीतर करने की कोशिश की जाएगी।

यूनियन ने कर्मचारियों के हितों को लेकर चिंता जताई

ऑल इंडिया कोल पेंशनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष पी.के. सिंह राठौर ने कहा कि ड्राफ्ट नियमों में कर्मचारियों के हितों या उन्हें हुए नुकसान के मुआवजे के बारे में स्पष्ट रूप से कुछ नहीं कहा गया है। उनका कहना है कि अगर एम्प्लॉयर समय पर प्रोविडेंट फंड का योगदान जमा करने में विफल रहता है, तो कर्मचारियों को हुए नुकसान की भरपाई का प्रावधान होना चाहिए। उन्होंने लेबर यूनियनों से भी इस मुद्दे पर आगे आने का आग्रह किया।

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