प्रेमचंद रंगशाला में गूंजा शाद अजीमाबादी का कलाम, मुशायरे में उमड़ा साहित्य-प्रेमियों का सैलाब

पटना : कला एवं संस्कृति विभाग बिहार सरकार और संगीत नाटक अकादमी पटना के संयुक्त तत्वावधान में प्रेमचंद रंगशाला में आयोजित शाद अजीमाबादी उत्सव मुशायरा साहित्यिक गरिमा और श्रोताओं की उत्साहपूर्ण उपस्थिति के साथ सफलतापूर्वक हुआ। कार्यक्रम का उद्घाटन सांस्कृतिक कार्य निदेशालय, कला एवं संस्कृति विभाग के निदेशक रूबी, बिहार संगीत नाटक अकादमी के सचिव महमूद आलम एवं सहायक निदेशक सह जिला सूचना जनसंपर्क पदाधिकारी डॉ. अजय कुमार सिंह ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर के किया।

स्वागत भाषण में रूबी ने शाद अजीमाबादी के साहित्यिक रचनात्मकता को याद किया

अपने स्वागत भाषण में रूबी ने शाद अजीमाबादी के साहित्यिक रचनात्मकता को याद किया। उन्होंने अपने संबोधन में शाद अजीमाबादी के साहित्यिक योगदान को स्मरण करते हुए ऐसे आयोजनों को सांस्कृतिक चेतना के लिए अत्यंत आवश्यक बताया। उन्होंने शाद अजीमाबादी को एक विद्वान शायर, शोधकर्ता और उच्च कोटि के गद्यकार के रूप में याद किया। खचाखच भरे सभागार को संबोधित करते हुए उन्होंने सभी को इस बात के लिए धन्यवाद दिया कि इस ठंड में भी आप लोग की उपस्थिति यह दर्शाती है कि इस तरह के आयोजन का कितना महत्व और स्वीकार्यता है। उन्होंने कहा कि विभाग सचिव सर के नेतृत्व में लगातार अच्छा कर रहा है और आगे भी इस तरह के सकारात्मक आयोजन होते रहेंगे।

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मुशायरे की शुरुआत पहले शायर एमआर चिश्ती से हुई

मुशायरे की शुरुआत पहले शायर एमआर चिश्ती से हुई। मेरी रफ्तार पे सूरज की किरण नाज करे, ऐसी परवाज दे मालिक कि गगन नाज करे। मेरी खुशबू से महक जाए ये दुनिया मालिक, मुझको वो फूल बना, चमन सारा नाज़ करे। दीप से दीप जलाए कि चमक उठे सारा बिहार, ऐसी खूबी दे ऐ मालिक कि वतन नाज करे। प्रस्तुति के बाद दर्शकों की लगातार तालियों से ठंड में भी हाल का तापमान ऊपर चला गया।

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मुशायरे में दूसरे और इलाहाबादी शायर शैलेंद्र मधुर ने अपनी शायरी से समां बांध दिया

मुशायरे में दूसरे और इलाहाबादी शायर शैलेंद्र मधुर ने अपनी शायरी से समां बांध दिया। झील में फूल हूं शिकारी हूं, एक नदी दो मगर किनारी हूं, अब ये दुनिया कहे जो कहना है, तुम हमारे हो हम तुम्हारे हैं। उनकी अगली चार पंक्ति से तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा हॉल गूंज उठा। बात बिगड़ी है, मुंह छिपाने से, बात बनती है, मुंह दिखाने से, प्यार के प्रश्न हैं जटिल, हल ये होते है मुस्कुराने से शायर शैलेंद्र मधुर की अगली चार पंक्ति ने लोगों का दिल जीत लिया। भूख मिटती नहीं मिटाने से, प्यास बुझती नहीं बुझाने से, दिल में तूफान है तेरी चाहत का, दिल ये संभालता है तेरे आने से। मुशायरा आगे बढ़ता रहा। एकाएक सुखा सकते हैं सागर, सागर के सामने अनुयाई करने वाले… तीसरी शायरा सान्या राय की शायरी ने श्रोताओं का खूब मन मोह लिया। सान्या राय की शायरी को लोगों ने खूब सराहा।

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चौथे शायर गुलरेज शहजाद ने अपनी शायरी से लोगों को खूब झुमाया

चौथे शायर गुलरेज शहजाद ने अपनी शायरी से लोगों को खूब झुमाया। ये जो पतझड़ हैं गिरते हैं पेड़ो से पत्ते, मगर नजरों से गिरने का कोई मौसम नहीं होता। उनकी शायरी पर पूरे हॉल वाह-वाह से गूंज उठा। मुशायरे में देश के प्रतिष्ठित एवं युवा शायरों और कवियों ने अपनी प्रभावशाली नज्मों और कविताओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। सम्मेलन में खुर्शीद अकबर, तंग इनायतपुरी, अनवर कलाम, गुलरेज शहजाद, एमआर चिश्ती, सान्या राय, शकील आजमी, अज्म शकरी, मोइन शादाब, शैलेंद्र मधुर, डॉ. निकहत अमरोहवी और मणिका दुबे ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। उनकी रचनाओं में प्रेम, मानवीय संवेदनाएं, सामाजिक सरोकार और समकालीन विषयों की सशक्त अभिव्यक्ति देखने को मिली, जिसे श्रोताओं ने खूब सराहा।

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कार्यक्रम के अंत में संगीत नाटक अकादमी, पटना के सचिव महमूद आलम ने समापन भाषण प्रस्तुत किया

कार्यक्रम के अंत में संगीत नाटक अकादमी, पटना के सचिव महमूद आलम ने समापन भाषण प्रस्तुत किया। उन्होंने सभी अतिथियों, कवि-शायरों, श्रोताओं तथा आयोजन से जुड़े सभी सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे साहित्यिक आयोजन बिहार की सांस्कृतिक पहचान को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मुशायरे की अध्यक्षता शायर खुर्शीद अकबर एवं मंच का संचालन मोईन शादाव ने की।

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प्रेमचंद रंगशाला में देर तक तालियों की गूंज बनी रही और यह आयोजन शाद अजीमाबादी की साहित्यिक परंपरा को नई ऊर्जा देने वाला सिद्ध हुआ

प्रेमचंद रंगशाला में देर तक तालियों की गूंज बनी रही और यह आयोजन शाद अजीमाबादी की साहित्यिक परंपरा को नई ऊर्जा देने वाला सिद्ध हुआ। कार्यक्रम के दौरान विभाग से कई अधिकारियों और कर्मचारियों ने अपनी अपस्थिति से महती भूमिका निभाई, विभाग की उप-सचिव कहकशां और पूर्व विशेष सचिव राजेश कुमार की मौजूदगी भी कार्यक्रम में अंत तक बनी रही।

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