Check Bounce Case: चेक बाउंस होने से दोषी को लगभग 2 साल या उस से भी अधिक समय की जेल हो सकती है. जिस वजह से सभी चेक बाउंस कराने से काफी डरते हैं. एक ऐसा ही मामला रश्मि शर्मा के साथ साल 2019 में हो गया. रश्मि शर्मा ने सुनील तिवारी नामक व्यक्ति को 30 लाख का चेक दिया था. मगर खाते में पर्याप्त राशि नहीं होने के कारण चेक बाउंस हो गया. जिसके एवज में सुनील तिवारी ने रश्मि शर्मा पर रांची सिविल कोर्ट में केस कर दिया. केस की नोटिश देखकर रश्मि शर्मा घबरा गई और केस लड़ने के लिए कई वकीलों का सहारा लिया. मगर कोई भी वकील उन्हें दोषमुक्त नहीं करा पा रहा थे. कड़ी मशकत के बाद उनकी मुलाकात पिछले साल के अक्टूबर माह में अधिवक्ता राकेश वर्मा से हुई. पूरा मजरा सुनने के बाद अधिवक्ता राकेश वर्मा ने उनका केस लड़ना स्वीकार किया और अपने क्लाइंट को दोषमुक्त करने की ठानी. पिछले साल के अक्टूबर माह में केस अपने हाथों में लेने के बाद अधिवक्ता राकेश वर्मा ने 7 साल से चल रहे केस को 3 महीने में निपटा दिया और 16 जनवरी को अपने क्लाइंट को दोषमुक्त कराया.
Check Bounce Case: अधिवक्ता राकेश वर्मा में ये है खास
आपकी जानकारी के लिए बता दें, अधिवक्ता राकेश वर्मा स्वैच्छिक सेवानिवृत्त अधिकारी हैं. राकेश वर्मा ने अपनी प्रतिष्ठित सरकारी सेवा छोड़ दी थी, जहां वह भारत सरकार के निदेशक के रूप में कार्यरत थे. ताकि वे आपराधिक न्याय वितरण प्रणाली का हिस्सा बन सकें और लोगों की सेवा कर सकें. राकेश वर्मा एक सूक्ष्म और मेहनती अधिवक्ता हैं. जो झारखंड उच्च न्यायालय और विभिन्न अन्य न्यायालयों में अभ्यास करते हैं. एक कुशल वक्ता और फिटनेस प्रेमी होने के नाते, उन्हें हर दिन जिम जाना पसंद है. वह एक सम्मानित अधिकारी हैं, जिन्हें नौसेना प्रमुख (CNS) और भारतीय तटरक्षक बल के महानिदेशक से ‘प्रशंसा पत्र’ (Commendation Card) प्राप्त हुआ है. इसके अतिरिक्त, उन्हें रक्षा मंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार से ‘प्रशस्ति पत्र’ (Citation) सहित कई अन्य सामानों से भी नवाजा गया है.
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