सीता सोरेन के बागी स्वर
Ranchi-झारखंड मुक्ति मोर्चा की वरिष्ठ नेता और विधायक सीता सोरेन ने पार्टी के सीनियर नेता रहे स्टीफन मरांडी को अपने दायरे में रहकर बयान करने की सलाह दी है.
सीता सोरेन ने स्टीफन मरांडी पर किसी अदृश्य शक्ति के इशारे पर
झारखंड मुक्ति मोर्चा सुप्रीमो शिबू सोरेन को दिग्भ्रमित करने का आरोप लगाते हुए कहा कि
इस पार्टी को दिशोम गुरु और दिवंगत दुर्गा सोरेन ने अपने खून-पसीने से सींचा है.
हमें अनुशासन का पाठ पढ़ाने वाले खुद अपनी नैतिकता की जांच कर लें
विधायक सीता सोरेन ने अनुशासनहीनता का पाठ पढ़ाने वाले स्टीफन मरांडी के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि तब उनकी नैतिकता कहां गयी थी,
जब सारे आदर्शों को तिलांजलि देकर उन्होने सोरेन परिवार के खिलाफ दुमका में चुनाव लड़ा था
और अब बाद में अपना राजनीतिक भविष्य अंधकारमय देखकर फिर से वापस लौटे.
रामगढ़ के नेमरा में जन्म लेने वाले दिशोम गुरु संताल परगना में कैसे टपक पड़े
स्टीफन मरांडी को यह बात शिबू सोरेन से पूछनी चाहिए कि रामगढ़ के नेमरा में जन्म लेने वाले दिशोम गुरू संताल परगना में कैसे टपक पड़े,
उन्हें यह भी बताना चाहिए कि अपने राजनीतिक भविष्य और निजी फायदे के लिए
वे दुमका से महेशपुर में आकर कैसे टपक गये.
स्टीफन मरांडी को यह भी पूछना चाहिए कि
दुर्गा सोरेन ने गुरुजी के साथ वर्षों तक चले अलग झारखंड राज्य के संघर्ष में अपना सर्वत्र क्यों न्योछावर किया.
जल,जंगल और जमीन की आवाज उठाना गुनाह नहीं
आम्रपाली के विस्थापितों,स्थानीय मजदूर, जल,जंगल और जमीन की आवाज उठाने को गुनाह मानने वाले स्टीफन मरांडी को यह भी बताना चाहिए कि
उनके नेतृत्व में संताल परगना के आदिवासियों और मूलवासियों का कितना विकास हुआ.
दुर्गा सोरेन ने आदिवासियों-मूलवासियों के हितों की रक्षा को लिए जीवन भर संघर्ष किया,
चाहे वह संथाल के आदिवासियों के शोषण का मामला हो या
फिर छोटानागपुर-आम्रपाली के विस्थापितों-मजदूरों के हक और अधिकार की बात,
दुर्गा सोरेन की आंखो में इन सबके सपने तैरते थें.
इन्ही सपने को पूरा करने के लिए दुर्गा सोरेन जीवन भर संघर्ष करते रहे.
स्टीफन मरांडी सिर्फ अपने निजी स्वार्थ में और अदृश्य शक्ति के इशारे पर एक परिवार में मतभेद पैदा करने की कोशिश ना करें.
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