पटना : नीतीश सरकार बिहार को जल परिवहन के एक बड़े हब के रूप में स्थापित करने के लिए मिशन मोड में जुट गई है। शुक्रवार को कोच्चि में इनलैंड वाटरवेज डेवलपमेंट काउंसिल (IWDC) की तीसरी बैठक में बिहार के परिवहन मंत्री श्रवण कुमार ने राज्य की जलमार्ग क्षमताओं और भविष्य के रोडमैप संभावनाओं को विस्तार से रखा। उन्होंने बताया कि जलमार्ग सड़क और रेल से काफी सस्ता विकल्प है। माल ढुलाई की औसत लागत जल मार्ग से मात्र 1.3 रुपए प्रति टन किलोमीटर है, जबकि रेल मार्ग से 2.41 रुपए और सड़क मार्ग से 3.62 रुपए प्रति टन किलोमीटर होती है। इससे न केवल परिवहन लागत कम होगी, बल्कि सड़कों पर ट्रैफिक भी 30-40 फीसदी तक घटेगा।
प्रमुख नदियों के रास्ते माल ढुलाई
उन्होंने जानकारी दी कि राज्य में जल परिवहन का हब बनाने की दिशा में तेजी से काम हो रहा है। गंगा, गंडक, कोसी और सोन जैसी प्रमुख नदियों के माध्यम से बालू, सीमेंट, स्टोन चिप्स आदि भारी सामग्रियों की ढुलाई बढ़ेगी। जलमार्ग इस तरह के भारी सामानों व बिजली संयंत्रों की ढुलाई का सबसे सस्ता विकल्प है। इस योजना से अंतर्देशीय व्यापार को बल मिलेगा और नए रोजगार सृजित होंगे। इससे पुलों पर भीड़ कम होगी, सड़कें क्षतिग्रस्त नहीं होंगी और प्रदूषण भी घटेगा। इन नदियों के किनारे संभावित स्थानों पर उद्योग भी स्थापित होगा, जहां इनलैंड वाटर ट्रांसपोर्ट (IWT) टर्मिनल बनाए जाएंगे। इससे राज्य से सीधा निर्यात-आयात संभव हो सकेगा। ये टर्मिनल नेपाल से जुड़ने की क्षमता भी रखते हैं, जिससे क्षेत्रीय व्यापार को बड़ा बढ़ावा मिलेगा।

सोनपुर में मल्टीमॉडल टर्मिनल
उन्होंने बताया कि सोनपुर के कालुघाट पर विकसित मल्टीमॉडल टर्मिनल प्रतिवर्ष 77 हजार कंटेनर लोड-अनलोड की क्षमता रखता है। यहां दो मालवाहक जहाज एक साथ ठहर सकते हैं। कंटेनर सुरक्षित रखने, वजन मापने और जल-रेल-सड़क को जोड़ने की सुविधाएं उपलब्ध हैं। इससे माल ढुलाई का समय और लागत दोनों कम हो जाती है। साथ ही, कालुघाट में लॉजिस्टिक पार्क की बुनियादी संरचना निर्माणाधीन है, जिससे सुरक्षित स्टोरेज की सुविधा भी जल्द शुरू होगी।
पटना में वाटर मेट्रो बन रहा हकीकत
परिवहन मंत्री ने कहा कि पटना में शहरी वाटर मेट्रो अब हकीकत बन रही है। दो हाइब्रिड इलेक्ट्रिक कैटामरन जहाज आ रहे हैं, जो बैटरी और हाइब्रिड मोड में चलेंगे। ये शून्य उत्सर्जन वाले, शांत और एसी से लैस होंगे। इससे व्यापारिक और पर्यटकीय गतिविधियां बढ़ेंगी। पटना के दिघा घाट और कंगन घाट पर क्रूज टर्मिनल विकसित हो रहे हैं। पटना में जहाज मरम्मत की सुविधा भी स्थापित की जा रही है। त्वरित खुलने वाले पोंटून तंत्र (QPOM) चार स्थानों पर लगाए जा रहे हैं, जो डॉकिंग को सुपरफास्ट बनाएंगे। इसके साथ ही मनिहारी में रो-रो और रो-पैक्स टर्मिनल विकसित हो रहे हैं। बैठक में परिवहन मंत्री ने आगे कहा कि वर्तमान में 21 सामुदायिक जेटी मौजूद हैं, जिन्हें 17 अतिरिक्त स्थानों पर बढ़ाने की योजना है। इससे स्थानीय लोगों को सीधा लाभ मिलेगा और व्यापार के लिए हाट भी बनाए जाएंगे।
औद्योगीकरण की दिशा में बढ़ते कदम
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सागरमाला योजना के तहत अंतर्देशीय जलमार्गों को बढ़ावा दे रही है। पत्तन, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय, अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWI) और राष्ट्रीय अंतर्देशीय नौवहन संस्थान (निनि) के साथ मिलकर बिहार में पोर्ट लैंड विकसित किए जाएंगे। इसके तहत टर्मिनल निर्माण, कनेक्टिविटी, औद्योगीकरण और स्किल डेवलपमेंट पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
बिहार में बनेगा मैरीटाइम बोर्ड
बिहार में अंतर्देशीय जल परिवहन विभाग को पुनर्गठित कर बिहार मैरीटाइम बोर्ड बनाने की योजना है। आरओ-आरओ टर्मिनल, क्रूज टर्मिनल, वाटर मेट्रो, लॉजिस्टिक हब, औद्योगिक क्लस्टर और मैरीटाइम जोन का विकास पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर होगा।
3 जिलों में बनेंगे नौवहन प्रशिक्षण संस्थान
स्किल डेवलपमेंट के लिए अंतर्देशीय जहाज नौवहन प्रशिक्षण संस्थान निनि के मार्गदर्शन में बक्सर, भागलपुर और दरभंगा में खोले जाएंगे। इससे आईडब्ल्यूटी क्षेत्र में कुशल मानव संसाधन तैयार होगा और स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।

IWDC बैठक में परिवहन मंत्री द्वारा रखे गए प्रमुख बिंदु
कोसी और सोन नदी पर विकास
अंतर्देशीय जहाजों के सुचारू नेविगेशन के लिए पानी की इष्टतम गहराई सुनिश्चित करने हेतु कोसी और सोन नदी में ड्रेजिंग कार्य आवश्यक है। कार्गो आवाजाही के लिए फ्रेट कॉरिडोर/रूट बनाने और राष्ट्रीय राजमार्गों से जोड़ने तक नेविगेशनल क्लीयरेंस के लिए ड्रेजिंग की जरूरत है।
जलवाहक योजना में संशोधन
जलवाहक योजना में संशोधन आवश्यक है, क्योंकि बक्सर, पटना, हाजीपुर, सोनपुर (कालुघाट), मोकामा, भागलपुर, साहेबगंज जैसे प्रमुख शहरों के बीच दूरी सामान्यत 100 किमी है। इसलिए, जलवाहक योजना की दूरी को 300 किमी से घटाकर 100 किमी करने की मांग। इस योजना के तहत निर्माण सामग्री जैसे रेत और स्टोन चिप्स का परिवहन अब जलमार्ग से किया जा रहा है।
सामुदायिक जेटी
गंगा नदी के अलावा बिहार के अन्य छह राष्ट्रीय जलमार्गों पर सामुदायिक जेटी दी जाएं, ताकि अंतर्देशीय जहाजों/नावों से कार्गो आवाजाही बढ़े।
इलेक्ट्रिक फेरी टर्मिनल
गंगा नदी पर अधिक इलेक्ट्रिक फेरी टर्मिनलों का निर्माण कर कार्गो आवाजाही और यात्री परिवहन को बढ़ावा दिया जाए।
क्रूज टर्मिनल
कार्गो और यात्री दोनों के परिवहन में सक्षम रो-पैक्स जहाजों के सुचारू नेविगेशन के लिए पटना के दिघा घाट और कंगन घाट पर प्रस्तावित क्रूज टर्मिनलों के निर्माण में तेजी लाई जाए।
कैटामरन जहाज
पटना शहर में अर्बन वॉटर मेट्रो के सुचारू संचालन के लिए विभिन्न मार्गों पर फेरों की संख्या बढ़ाने के लिए प्रस्तावित दो जहाजों के अलावा कम से कम चार अतिरिक्त इलेक्ट्रिक हाइब्रिड कैटामरन जहाज तैनात किए जाएं।
मनिहारी में रो-रो और रो-पैक्स टर्मिनल
कटिहार जिले के मनिहारी में रो-रो और रो-पैक्स टर्मिनल का निर्माण आवश्यक है, क्योंकि यह चावल, जूट और मक्का जैसी फसलों का कृषि केंद्र है तथा झारखंड, पश्चिम बंगाल से निकटता के कारण रणनीतिक महत्व रखता है।

अतिरिक्त QPOM
आरा में तैनात एक क्यूपीओएम के अलावा दिघा, दानापुर और फतुहा में तीन अतिरिक्त क्यूपीओएम प्रदान किए जाएं, जिससे अंतर्देशीय जल परिवहन को बढ़ावा मिलेगा।
अतिरिक्त इंटर मॉडल टर्मिनल और मल्टी मॉडल टर्मिनल
अंतर्देशीय जल परिवहन और क्रूज पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए बक्सर और सिमरिया (बेगूसराय) में अतिरिक्त आईएमटी/एमएमटी और लॉजिस्टिक हब के निर्माण के लिए अध्ययन शुरू करने की मांग रखी।
बॉक्स में
बिहार में कुल राष्ट्रीय जलमार्ग – 07
कुल लंबाई – 1187 किमी
राष्ट्रीय जलमार्ग-1 – गंगा
राष्ट्रीय जलमार्ग-37 – गंडक
राष्ट्रीय जलमार्ग-58 – कोसी
जलमार्ग से माल ढुलाई लागत – 1.30 प्रति टन/किमी
रेल मार्ग लागत – 2.41 प्रति टन/किमी
सड़क मार्ग लागत – 3.62 प्रति टन/किमी
पूर्ण परियोजनाएं – 827 करोड़
निर्माणाधीन परियोजनाएं – 512 करोड़
प्रस्तावित नई परियोजनाएं – 1821 करोड़
पटना वाटर मेट्रो प्रस्ताव – 1200 करोड़
राज्य में घाटों की संख्या – 1550
संचालित नौकाएं – लगभग 7000
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