छपरा : नए यूजीसी कानून संशोधन को लेकर सरकार पर सियासी और सामाजिक दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी कड़ी में सारण निकाय से एमएलसी इंजीनियर सच्चिदानंद राय ने महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस कानून पर तत्काल पुनर्विचार की मांग की है। एमएलसी ने साफ शब्दों में कहा है कि सरकार का यह कदम उच्च शिक्षण संस्थानों के माहौल को प्रभावित कर सकता है।
शिक्षण संस्थान किसी जाति, वर्ग या राजनीतिक पहचान के नहीं होते, बल्कि वे ज्ञान, समानता और राष्ट्र निर्माण के केंद्र होते हैं – MLC सच्चिदानंद राय
अपने पत्र में एमएलसी सच्चिदानंद राय ने कहा है कि शिक्षण संस्थान किसी जाति, वर्ग या राजनीतिक पहचान के नहीं होते, बल्कि वे ज्ञान, समानता और राष्ट्र निर्माण के केंद्र होते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि नए यूजीसी कानून के कुछ प्रावधान शिक्षा व्यवस्था में जातिगत विभाजन को बढ़ावा दे सकते हैं, जिससे विश्वविद्यालयों में भाईचारा, सहयोग और शैक्षणिक वातावरण पर नकारात्मक असर पड़ेगा।
MLC ने सरकार को आगाह करते हुए कहा- यदि शिक्षा व्यवस्था में भेदभाव की स्थिति बनी तो इसका खामियाजा सीधे छात्रों और देश के भविष्य को भुगतना पड़ेगा
एमएलसी ने सरकार को आगाह करते हुए कहा है कि यदि शिक्षा व्यवस्था में भेदभाव की स्थिति बनी तो इसका खामियाजा सीधे छात्रों और देश के भविष्य को भुगतना पड़ेगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि बिना व्यापक विमर्श के ऐसे कानून लागू करना सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करता है। सच्चिदानंद राय ने प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा है कि जब तक यूजीसी कानून पर पुनर्विचार नहीं किया जाता तबतक असंतोष और विरोध की आवाज और तेज होती रहेगी। इस पत्र के बाद सरकार पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर दबाव और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
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