चतरा में फिर मंडराया ‘लाल खौफ’, श्याम भोक्ता के घर माओवादियों ने चपकाया धमकी भरा पोस्टर

लाल खौफ – चतरा जिले के कुंदा थाना क्षेत्र का गेंदरा गांव एक बार फिर सुर्खियों में है। बीते साल 28 दिसंबर की आधी रात को हुए खूनी संघर्ष के जख्म अभी भरे भी नहीं थे कि माओवादी संगठन के नाम पर चिपकाए गए एक धमकी भरे पोस्टर ने पूरे इलाके में दहशत पैदा कर दी है। यह पोस्टर एनआईए के पूर्व आरोपी श्याम भोक्ता के घर पर चिपकाया गया है, जिसमें उसे और उसके परिवार को गाँव छोड़कर भागने की चेतावनी दी गई है। नक्सलियों ने इस बार न केवल श्याम भोक्ता को निशाने पर लिया है, बल्कि पुलिस और उन ग्रामीणों को भी चुनौती दी है जिन्होंने पूर्व की घटना में जवाबी कार्रवाई की थी।

‘गाँव छोड़कर भाग जाओ वरना गोली खाने के लिए तैयार रहो’

कुंदा के गेंदरा गांव में बुधवार की आधी रात माओवादी संगठन के ‘दक्षिणी जोनल कमेटी’ के नाम से एक पर्चा जारी किया गया। पोस्टर में साफ तौर पर लिखा है SPO श्याम भोक्ता, गाँव छोड़कर भाग जाओ वरना गोली खाने के लिए तैयार रहो। नक्सलियों ने श्याम भोक्ता को पुलिस का दलाल करार देते हुए धमकी दी है कि वह 28 दिसंबर की रात तो बच गया, लेकिन अगली बार उसे मौका नहीं दिया जाएगा। इस पोस्टरबाजी ने चतरा पुलिस की कार्यशैली और इलाके में सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

लाल खौफ – मुठभेड़ में बच गई थी श्याम भोक्ता की जान

आपको बता दें कि 28-29 दिसंबर की रात इसी गेंदरा गाँव में वर्चस्व और जमीन विवाद को लेकर भीषण मुठभेड़ हुई थी। तब लावालौंग निवासी देवेंद्र गंझू और चुरामन गंझू अपने गुर्गों के साथ श्याम भोक्ता की हत्या करने पहुँचे थे। लेकिन ग्रामीणों की एकजुटता और जवाबी फायरिंग में मास्टरमाइंड देवेंद्र और चुरामन मौके पर ही मारे गए थे। उस हमले में श्याम भोक्ता के साले गोपाल गंझू के सिर में गोली लगी थी, जबकि श्याम भोक्ता खुद भी गंभीर रूप से जख्मी हुआ था। अब माओवादियों ने अपने पोस्टर में इन दोनों मृतकों को ‘शहीद’ बताते हुए उन्हें ‘लाल सलाम’ किया है।

इस मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि चतरा पुलिस ने पूर्व में इस घटना को केवल जमीन विवाद और डकैती की साजिश करार दिया था। पुलिस ने एक आरोपी मोहन कुमार को गिरफ्तार कर जेल भी भेजा था। लेकिन अब नक्सलियों की एंट्री ने इस मामले को एक नया और खतरनाक मोड़ दे दिया है। श्याम भोक्ता की पत्नी का आरोप है कि पुलिस ने केवल एक व्यक्ति को जेल भेजकर खानापूर्ति की और बाकी हमलावरों को खुला छोड़ दिया, जिसके कारण आज उनका परिवार फिर से मौत के साये में है।

 

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