झारखंड में महागठबंधन में खींचतान तेज, कांग्रेस ने खनन माफिया और प्रशासन पर लगाए आरोप, राज्यसभा चुनाव पर भी असर की आशंका।
Jharkhand Politics रांची: झारखंड की सियासत में महागठबंधन के भीतर मतभेद अब खुलकर सामने आने लगे हैं। कांग्रेस ने अपनी ही गठबंधन सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए खनन माफिया, जिला प्रशासन और पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रदेश प्रभारी के. राजू के बयान ने राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है और गठबंधन की स्थिरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
Jharkhand Politics:खनन माफिया और प्रशासन पर कांग्रेस का हमला
कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी के. राजू ने आरोप लगाया कि राज्य में खनन माफिया बेहद मजबूत हो चुका है और सरकार उस दबाव में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि जिलों के उपायुक्त (डीसी) इस लॉबी के प्रभाव में काम कर रहे हैं और खनन कंपनियों के साथ मिलीभगत कर रहे हैं।
राजू के अनुसार, भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 के तहत भूस्वामियों को पर्याप्त मुआवजा नहीं मिल रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि पार्टी के एक नेता का घर बिना उचित मुआवजे के ध्वस्त कर दिया गया।
उन्होंने शिक्षा विभाग और खान विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए, साथ ही पुलिस की निष्क्रियता को लेकर नाराजगी जताई। कांग्रेस ने संकेत दिया है कि वह खनन कंपनियों और जिला प्रशासन के खिलाफ राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन करेगी।
Jharkhand Politics:बयानबाजी के पीछे की राजनीति और बढ़ता तनाव
महागठबंधन में यह खटपट नई नहीं है। इसकी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान ही हो गई थी, जब झामुमो को सीट नहीं मिलने पर कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया गया। इसके बाद असम चुनाव में झामुमो ने कांग्रेस की सलाह को नजरअंदाज करते हुए अपने उम्मीदवार उतारे।
हाल ही में झामुमो के महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य द्वारा कांग्रेस को ‘विषैला सांप’ कहे जाने के बाद तनाव और बढ़ गया। अब कांग्रेस का ताजा हमला इसी विवाद को और गहरा करता दिख रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस अब पुलिस और प्रशासन के मुद्दे को आधार बनाकर सरकार को घेरने की रणनीति पर काम कर रही है।
Jharkhand Politics:राज्यसभा चुनाव और सरकार की स्थिरता पर असर
इस खींचतान का असर आगामी राज्यसभा चुनाव पर पड़ सकता है। फिलहाल महागठबंधन दोनों सीटें जीतने की स्थिति में दिख रहा है, लेकिन दरार बढ़ने पर समीकरण बदल सकते हैं।
एक सीट जीतने के लिए 28 वोट की जरूरत होती है। झामुमो के पास 34 विधायक हैं, जबकि पूरे गठबंधन के पास 56 सीटें हैं। कांग्रेस के पास 16 विधायक हैं। ऐसे में झामुमो एक सीट आसानी से जीत सकता है, लेकिन दूसरी सीट पर मुकाबला कड़ा हो सकता है।
Key Highlights
कांग्रेस ने अपनी ही सरकार पर खनन माफिया से मिलीभगत का आरोप लगाया
जिला प्रशासन और पुलिस की भूमिका पर उठाए सवाल
राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन का ऐलान
झामुमो-कांग्रेस के बीच पुराने विवाद फिर उभरे
राज्यसभा चुनाव पर असर पड़ने की आशंका
Jharkhand Politics:सरकार पर खतरा कितना?
झारखंड विधानसभा में कुल 81 सीटें हैं और बहुमत के लिए 41 सीटों की जरूरत होती है। महागठबंधन के पास अभी 56 सीटें हैं। अगर कांग्रेस अलग भी हो जाती है, तो भी सरकार के पास 39 सीटें रहेंगी और बहुमत के लिए केवल दो विधायकों की जरूरत होगी।
ऐसे में सरकार पर तात्कालिक संकट की संभावना कम मानी जा रही है।
Jharkhand Politics:झामुमो की प्रतिक्रिया
कांग्रेस के आरोपों पर झामुमो ने संयमित प्रतिक्रिया दी है। पार्टी के केंद्रीय प्रवक्ता मनोज पांडेय ने कहा कि गठबंधन सहयोगी एक-दूसरे के दुश्मन नहीं हैं और जनादेश का सम्मान करते हुए सरकार चलाई जा रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि चुनावी माहौल में बयानबाजी होती है, लेकिन तल्खी इतनी नहीं बढ़नी चाहिए कि बाद में पछतावा हो। झामुमो ने गठबंधन धर्म निभाने की बात दोहराते हुए सहयोगियों से भी यही अपेक्षा जताई।
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