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Jharkhand ED Action: टेंडर Commission Scam में इंजीनियरों की संपत्ति होगी जब्त, मंत्री तक पहुंचता था हिस्सा

झारखंड के ग्रामीण कार्य विभाग टेंडर कमीशन घोटाले में ईडी बड़ी कार्रवाई की तैयारी में है। कई इंजीनियरों की संपत्ति जब्त होगी, जांच में मंत्री तक कमीशन पहुंचने का खुलासा।


Jharkhand ED Action रांची: झारखंड में ग्रामीण कार्य विभाग से जुड़े बहुचर्चित टेंडर कमीशन घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कार्रवाई तेज कर दी है। एजेंसी अब मामले में चार्जशीटेड इंजीनियरों की चल और अचल संपत्तियों को जब्त करने की तैयारी में है। जांच में सामने आया है कि टेंडर आवंटन के बदले ठेकेदारों से कमीशन वसूला जाता था और यह रकम विभागीय अधिकारियों से लेकर मंत्री स्तर तक पहुंचती थी।

ईडी की जांच के अनुसार ग्रामीण विकास विभाग और उससे जुड़ी इकाइयों में संगठित तरीके से कमीशनखोरी का नेटवर्क संचालित किया जा रहा था। एजेंसी ने अब तक इस मामले में 36 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है।

Jharkhand ED Action:इन इंजीनियरों की संपत्ति जब्त करने की तैयारी

ईडी जिन इंजीनियरों की संपत्ति जब्त करने की तैयारी कर रही है, उनमें सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता सिंगराई टुटी, राजीव लोचन, सुरेंद्र कुमार, प्रमोद कुमार, कार्यपालक अभियंता संतोष कुमार, अजय कुमार, अजय तिर्की, राज कुमार टोप्पो, अशोक कुमार गुप्ता, सिद्धांत कुमार और अनिल कुमार शामिल हैं।

इसके अलावा सहायक अभियंता राम पुकार राम, रमेश ओझा और पूर्व अधीक्षण तथा मुख्य अभियंता उमेश कुमार के नाम भी जांच के दायरे में हैं। ईडी का आरोप है कि इन अधिकारियों ने टेंडर आवंटन में कमीशन की राशि के वितरण में सक्रिय भूमिका निभाई।


Key Highlights

  • टेंडर कमीशन घोटाले में ईडी की बड़ी कार्रवाई

  • कई इंजीनियरों की संपत्ति जब्त करने की तैयारी

  • जांच में मंत्री स्तर तक कमीशन पहुंचने का खुलासा

  • 3048 करोड़ के टेंडर आवंटन की जांच

  • अब तक 44 करोड़ की संपत्ति और 38 करोड़ नकद जब्त


Jharkhand ED Action:जेई की गिरफ्तारी से खुला था घोटाले का नेटवर्क

यह मामला वर्ष 2019 में उस समय सामने आया था, जब एसीबी जमशेदपुर ने जूनियर इंजीनियर सुरेश प्रसाद वर्मा को 10 हजार रुपए रिश्वत लेते गिरफ्तार किया था। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ा और तत्कालीन मुख्य अभियंता वीरेंद्र राम के ठिकानों से 2.67 करोड़ रुपए नकद बरामद किए गए।

बाद में ईडी ने पीएमएलए के तहत ईसीआईआर दर्ज कर वीरेंद्र राम को गिरफ्तार किया। जांच आगे बढ़ने पर टेंडर आवंटन में बड़े कमीशन नेटवर्क का खुलासा हुआ।

मामले में पूर्व मंत्री आलमगीर आलम, उनके निजी सचिव संजीव कुमार लाल समेत कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। फिलहाल कई आरोपी जेल में बंद हैं।

Jharkhand ED Action:3 प्रतिशत कमीशन का था पूरा खेल

ईडी की चार्जशीट के अनुसार ठेकेदारों से कुल टेंडर मूल्य का 3 प्रतिशत कमीशन लिया जाता था। इसमें से करीब 1.35 प्रतिशत राशि तत्कालीन मंत्री आलमगीर आलम तक उनके निजी सचिव के माध्यम से पहुंचाई जाती थी।

वहीं 0.65 से 1 प्रतिशत तक हिस्सा विभागीय सचिव को दिया जाता था, जबकि बची हुई राशि मुख्य अभियंताओं और अन्य अधिकारियों में बांटी जाती थी। जांच एजेंसी का दावा है कि करीब 3048 करोड़ रुपए के टेंडर आवंटन में अपराध की आय से लगभग 90 करोड़ रुपए की अवैध संपत्ति अर्जित की गई।

ईडी अब तक इस मामले में 44 करोड़ रुपए की संपत्ति और 38 करोड़ रुपए नकद जब्त कर चुकी है। अब अगला चरण आरोपित इंजीनियरों की संपत्तियों की जब्ती का होगा।

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