पटना : पर्यटन विभाग एवं जिला प्रशासन नालंदा ने 17 मई से 15 जून तक आयोजित होने वाले मलमास मेला की तैयारियां पूरी कर ली है। विभाग के सचिव लोकेश कुमार सिंह ने शनिवार को विज्ञप्ति जारी कर बताया कि श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए राजगीर स्टेट गेस्ट हाउस के पास 2000 व्यक्तियों व राजगीर रेलवे स्टेशन परिसर, ब्रह्मकुंड के निकट और मेला थाना के पास 1000-1000 व्यक्तियों की आवासन क्षमता वाले जर्मन हैंगर पंडाल बनाए गए हैं। इन स्थलों पर चेंजिंग रूम, स्नानघर, पुरुष एवं महिला शौचालय, पेयजल, कंट्रोल रूम, सीसीटीवी कैमरा, हेल्थ कैंप व सस्ती रोटी काउंटर जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई है।
10 मिनी राजवाड़ी टेंट, विभिन्न स्थलों पर जर्मन यात्री शेड व वाटरप्रूफ पंडाल की भी व्यवस्था की गई है
इसके अतिरिक्त 10 मिनी राजवाड़ी टेंट, विभिन्न स्थलों पर जर्मन यात्री शेड और वाटरप्रूफ पंडाल की भी व्यवस्था की गई है। श्रद्धालुओं एवं आगंतुकों के वाहनों के लिए पीएचईडी कैम्पस, विश्वशांति स्तूप के निकट, किला मैदान, आरडीएच हाई स्कूल मैदान, पीटीजेएम कॉलेज, हॉकी मैदान, सोन भंडार, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, गौरक्षणी और मेयार बाईपास सहित अनेक पार्किंग स्थलों को चिन्हित किया गया है।
मेला क्षेत्र में सुरक्षा, चिकित्सा, अग्निशमन, प्रशासनिक सहायता तथा पर्यटक सूचना केंद्र में पर्यटक गाइड की उपलब्धता के साथ समुचित समन्वय स्थापित किया गया है
मेला क्षेत्र में सुरक्षा, चिकित्सा, अग्निशमन, प्रशासनिक सहायता तथा पर्यटक सूचना केंद्र में पर्यटक गाइड की उपलब्धता के साथ समुचित समन्वय स्थापित किया गया है। आपातकालीन सहायता के लिए 24×7 हेल्पलाइन 112 के साथ-साथ जिला पदाधिकारी, आरक्षी अधीक्षक, मेला नियंत्रण कक्ष, सिविल सर्जन, अग्निशमन पदाधिकारी, अनुमंडल प्रशासन, यातायात पुलिस, नगर परिषद्, थाना तथा पर्यटक सूचना केन्द्र के संपर्क नंबर भी जारी किए गए हैं।
मलमास मेला का शुभारंभ 17 मई को ध्वजारोहण, देवी-देवताओं के आवाहन एवं पूजन के साथ होगा – विशेष सचिव सह निदेशक उदयन मिश्रा
विभाग के विशेष सचिव सह निदेशक उदयन मिश्रा ने बताया कि मलमास मेला का शुभारंभ 17 मई को ध्वजारोहण, देवी-देवताओं के आवाहन एवं पूजन के साथ होगा। मेला अवधि के दौरान 21 मई को पंचमी स्नान, 27 मई को प्रथम शाही स्नान, 31 मई को द्वितीय शाही स्नान, 5 जून को पंचमी स्नान, 11 जून को तृतीय शाही स्नान तथा 15 जून को अमावस्या स्नान एवं विसर्जन का आयोजन निर्धारित है। उन्होंने श्रद्धालुओं, पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों से अपील किया है कि वे प्रशासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए मेले में सहभागिता करें व राजगीर की पावन, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक गरिमा को बनाए रखने में सहयोग दें।
मेला राजगीर की प्राचीन धार्मिक परंपरा, आस्था और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक है
यह मेला राजगीर की प्राचीन धार्मिक परंपरा, आस्था और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक है, जिसमें देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों का आगमन होता है। भारतीय पंचांग के अनुसार अधिमास, जिसे मलमास भी कहा जाता है, अत्यंत पवित्र माना जाता है। पौराणिक मान्यता है कि इस अवधि में देवी-देवताओं का राजगीर में निवास एवं विचरण होता है। इसी आस्था के कारण साधु-संत, तीर्थयात्री और श्रद्धालु पूरे मास राजगीर में प्रवास करते हैं व यहां अवस्थित 22 कुण्डों और 52 धाराओं में स्नान, पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेते हैं।
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