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Jharkhand VAT Update: पेट्रोल-डीजल और शराब के खुदरा विक्रेताओं को बड़ी राहत, रिटर्न दाखिल करने से मिली छूट

झारखंड सरकार ने वैट नियमावली 2006 में संशोधन कर पेट्रोल-डीजल और शराब के खुदरा विक्रेताओं को मासिक व त्रैमासिक रिटर्न दाखिल करने की अनिवार्यता से छूट दे दी है।


Jharkhand VAT Update रांची: झारखंड सरकार ने पेट्रोल-डीजल तथा शराब के खुदरा विक्रेताओं को बड़ी राहत देते हुए झारखंड मूल्य वर्धित कर (वैट) नियमावली 2006 में महत्वपूर्ण संशोधन किया है। इस बदलाव के तहत अब पात्र खुदरा विक्रेताओं को त्रैमासिक और मासिक रिटर्न दाखिल करने की अनिवार्यता से छूट मिल गई है।

वाणिज्य कर विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार झारखंड वैट नियम 14 के उप-नियम (1) और (3) में संशोधन किया गया है। यह संशोधन राज्यपाल की स्वीकृति के बाद लागू किया गया है।

Jharkhand VAT Update:किन कारोबारियों को मिलेगा लाभ

नई व्यवस्था के तहत ऐसे पेट्रोल पंप और रिटेल आउटलेट संचालक, जो किसी भी राज्य के निवासी नहीं हैं और राज्य के भीतर डीजल तथा एथेनॉल मिश्रित डीजल की खुदरा बिक्री करते हैं, उन्हें अब फॉर्म जेवीएटी-200 (त्रैमासिक रिटर्न) और जेवीएटी-213 जमा नहीं करना होगा।

इसी प्रकार झारखंड राज्य बेवरेज कॉरपोरेशन लिमिटेड अथवा राज्य की पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनियों से विदेशी या देशी शराब खरीदकर बेचने वाले खुदरा विक्रेताओं को भी इस संशोधन का लाभ मिलेगा।


Key Highlights

  • झारखंड वैट नियमावली 2006 में किया गया संशोधन।

  • पेट्रोल-डीजल और शराब के खुदरा विक्रेताओं को रिटर्न दाखिल करने से राहत।

  • अधिसूचना 1 जून 2026 से प्रभावी।

  • होटल, रेस्तरां और बार को भी अनुपालन में छूट।

  • कारोबार संचालन और कर प्रक्रिया होगी आसान।


Jharkhand VAT Update:1 जून 2026 से लागू हुआ संशोधन

सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार यह संशोधन 1 जून 2026 से प्रभावी माना जाएगा। इससे राज्यभर में संचालित पेट्रोल पंपों और शराब दुकानों के लिए कर अनुपालन प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सरल हो जाएगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि इससे छोटे और मध्यम स्तर के खुदरा कारोबारियों पर प्रशासनिक बोझ कम होगा तथा उन्हें कागजी प्रक्रियाओं में कम समय लगाना पड़ेगा।

Jharkhand VAT Update:होटल, रेस्तरां और बार को भी राहत

वाणिज्य कर विभाग ने होटल, रेस्तरां, बार और क्लब संचालकों को भी राहत प्रदान की है। इन संस्थानों को पहले की तरह निर्धारित कर संबंधी विवरण और रिटर्न दाखिल करने की बाध्यता से आंशिक छूट दी गई है।

विभाग का कहना है कि इस फैसले से करदाताओं के अनुपालन संबंधी बोझ में कमी आएगी और व्यापार संचालन की प्रक्रिया अधिक सुगम बनेगी। साथ ही विभागीय संसाधनों का बेहतर उपयोग भी सुनिश्चित किया जा सकेगा।

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