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Hemant Soren Land Scam Case: 8.86 एकड़ जमीन घोटाले में हेमंत सोरेन को झटका, डिस्चार्ज याचिका खारिज

 बड़गाई की 8.86 एकड़ जमीन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को बड़ा झटका लगा है। पीएमएलए कोर्ट ने उनकी डिस्चार्ज याचिका खारिज कर दी।


Hemant Soren Land Scam Case रांची: बड़गाई स्थित 8.86 एकड़ जमीन घोटाले से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को अदालत से बड़ा झटका लगा है। पीएमएलए के विशेष न्यायाधीश योगेश कुमार की अदालत ने सोमवार को उनकी ओर से दायर डिस्चार्ज (मुक्ति) याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि मामले में उपलब्ध दस्तावेज और साक्ष्य प्रथम दृष्टया आरोपों पर विचार करने के लिए पर्याप्त हैं।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने 3 जून को फैसला सुरक्षित रख लिया था। इसके बाद 8 जून को आदेश सुनाते हुए याचिका खारिज कर दी गई।

Hemant Soren Land Scam Case:ईडी की जांच में सामने आया भूमि सिंडिकेट का आरोप

यह मामला प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दर्ज ईसीआईआर संख्या 06/2023 से जुड़ा हुआ है। जांच एजेंसी का आरोप है कि रांची के बरियातू रोड स्थित बड़गाई मौजा की 8.86 एकड़ जमीन पर अवैध कब्जा करने और उससे संबंधित दस्तावेजों में हेराफेरी के लिए एक संगठित भूमि सिंडिकेट सक्रिय था।

जांच के दौरान राजस्व उपनिरीक्षक भानु प्रताप प्रसाद के कब्जे से 17 मूल रजिस्टर तथा बड़ी संख्या में भूमि संबंधी दस्तावेज बरामद किए गए थे। ईडी का दावा है कि इन दस्तावेजों के आधार पर जमीन से जुड़े लेनदेन और कब्जे की प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं के संकेत मिले हैं।


Key Highlights

  • 8.86 एकड़ जमीन घोटाला मामले में हेमंत सोरेन की डिस्चार्ज याचिका खारिज।

  • पीएमएलए विशेष अदालत ने प्रथम दृष्टया पर्याप्त साक्ष्य होने की बात कही।

  • ईडी ने भूमि कब्जा और दस्तावेजों में हेराफेरी का आरोप लगाया है।

  • अदालत ने भूमि पर नियंत्रण और लाभकारी उपयोग से जुड़े परिस्थितिजन्य साक्ष्यों का उल्लेख किया।

  • मामले में अगला चरण आरोप तय करने की प्रक्रिया का होगा।


Hemant Soren Land Scam Case:अदालत ने प्रथम दृष्टया साक्ष्यों को माना पर्याप्त

अपने आदेश में अदालत ने स्पष्ट किया कि डिस्चार्ज याचिका पर सुनवाई के दौरान विस्तृत साक्ष्य परीक्षण नहीं किया जाता। इस स्तर पर केवल यह देखा जाता है कि आरोपी के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला बनता है या नहीं।

अदालत ने कहा कि यदि आरोपों के समर्थन में पर्याप्त सामग्री उपलब्ध हो तो आरोप तय करने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। ईडी द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों, गवाहों के बयानों और अन्य रिकॉर्ड के आधार पर प्रथम दृष्टया यह संकेत मिलता है कि संबंधित जमीन पर हेमंत सोरेन के कब्जे, नियंत्रण और लाभकारी उपयोग से जुड़े परिस्थितिजन्य साक्ष्य मौजूद हैं।

Hemant Soren Land Scam Case:बाउंड्रीवॉल निर्माण और गवाहों के बयान का उल्लेख

अदालत ने अपने आदेश में जमीन की जांच-परख, सत्यापन के निर्देश, भूमि के चारों ओर बाउंड्रीवॉल निर्माण तथा कथित तौर पर सीएमओ से जुड़ी फाइल की बरामदगी जैसे तथ्यों का उल्लेख किया है।

इसके अलावा अदालत ने गवाह संतोष मुंडा के बयान का भी जिक्र किया। आदेश के अनुसार, संतोष मुंडा लंबे समय तक उक्त भूमि पर केयरटेकर के रूप में कार्यरत रहा और उसने अपने बयान में कहा कि उसने कई अवसरों पर हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी को वहां आते-जाते देखा था।

अदालत के इस आदेश के बाद अब मामले में आरोप तय करने की दिशा में आगे की कानूनी प्रक्रिया तेज होने की संभावना है। वहीं, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के लिए यह फैसला कानूनी मोर्चे पर एक महत्वपूर्ण झटका माना जा रहा है।

 

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