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कोडरमा का मसनोडीह बना ‘आमों का गांव’, देश-विदेश तक पहुंच रही स्वाद की मिठास

Koderma News: झारखंड के कोडरमा जिले के डोमचांच ब्लॉक में स्थित मसनोडीह गांव इन दिनों आमों की खुशबू और मिठास से महक रहा है। छह दशकों से अधिक समय से यह गांव स्वादिष्ट और उच्च गुणवत्ता वाले आमों का उत्पादन कर रहा है। अपने अनूठे स्वाद और प्राकृतिक रूप से पके आमों के कारण मसनोडीह की पहचान अब केवल झारखंड तक ही सीमित नहीं है, बल्कि देश और विदेश के कई अन्य राज्यों में भी फैल चुकी है।

3 हजार से अधिक आम के पेड़, एक दर्जन से ज्यादा किस्में

मसनोडीह गांव में लगभग 10 बड़े आम के बाग हैं, जिनमें 3,000 से अधिक आम के पेड़ हैं। इन दिनों, पेड़ फलों से लदे हुए हैं, और “गच्छपकु आम”, यानी प्राकृतिक रूप से पके आमों की बाजार में बहुत मांग है।

यहां उगाई जाने वाली मुख्य किस्मों में मालदा, जरदालू, गुलाब खास, बॉम्बेया, हिमसागर, किशन भोग, बेलखास, मानिका, सेपिया, फजली और सुकूल शामिल हैं, जो अपने अचार के लिए प्रसिद्ध है। इन आमों का स्वाद और सुगंध इन्हें बाजार में एक अलग पहचान दिलाती है।

बिना केमिकल के तैयार होते हैं आम

मसनोडीह के आमों की सबसे खास बात यह है कि इन्हें पकाने के लिए किसी भी रसायन का इस्तेमाल नहीं किया जाता। ये आम पेड़ों पर प्राकृतिक रूप से पकते हैं, जिससे इनका स्वाद, सुगंध और पोषण मूल्य बरकरार रहता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी इस बात से सहमत हैं कि प्राकृतिक रूप से पके फल स्वास्थ्य के लिए अधिक लाभदायक होते हैं। यही कारण है कि दूर-दूर से लोग यहाँ आम खरीदने आते हैं, जबकि कई ग्राहक फोन पर भी आम का ऑर्डर देते हैं।

जमींदार परिवार की पहल से शुरू हुई थी आम की खेती

मासनोडीह में आम का उत्पादन लगभग 60 साल पहले शुरू हुआ था। ऐसा कहा जाता है कि गांव के तत्कालीन जमींदार, स्वर्गीय धर्मनारायण सिंह ने पश्चिम बंगाल की एक प्रसिद्ध नर्सरी से आम के पौधे मंगवाकर यहां लगाए थे।

समय के साथ-साथ बागान बढ़ते गए और आज उसी परिवार की चौथी पीढ़ी इस विरासत को आगे बढ़ा रही है। आम की खेती न केवल परिवार को आर्थिक लाभ प्रदान करती है बल्कि गांव के कई लोगों को रोजगार भी देती है।

आर्थिक समृद्धि का बन रहा माध्यम

मसनोडीह के आम अब स्थानीय किसानों और बाग मालिकों के लिए आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत बन गए हैं। हर साल, आम के मौसम में, बड़ी संख्या में व्यापारी और खरीदार यहाँ आते हैं। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है और गाँव को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल रही है।

मासनोडीह का यह आम का बाग न केवल स्वाद का केंद्र है, बल्कि झारखंड की कृषि विरासत और ग्रामीण समृद्धि का प्रतीक भी बन गया है।

रिपोर्ट: कुमार अमित, कोडरमा

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