बिहार शिक्षा विभाग में HRMS पोर्टल पर छेड़छाड़ कर 34 करोड़ रुपये की अधिक निकासी का मामला सामने आया है।
Google पर 22Scope चुनेंBihar Education Department Salary Irregularity, पटना: बिहार के शिक्षा विभाग में वेतन भुगतान से जुड़ी बड़ी वित्तीय अनियमितता सामने आई है। HRMS पोर्टल पर कथित छेड़छाड़ कर वेतन, मकान किराया भत्ता (HRA) और एरियर के मद में निर्धारित राशि से अधिक भुगतान निकालने का मामला सामने आया है। विभाग की 4 नवंबर 2026 की समेकित रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के सभी 38 जिलों में कुल 6,895 मामलों में 34 करोड़ 11 लाख 56 हजार 604 रुपये की अधिक निकासी हुई है। इस मामले में शिक्षा विभाग ने सभी जिलों के जिला शिक्षा पदाधिकारियों (DEO) से जवाब मांगा है। शिक्षा विभाग के निदेशक विजय कुमार पांडेय ने 5 नवंबर को सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को पत्र जारी कर सात दिनों के भीतर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है। अधिकारियों को अपने जवाब के साथ संबंधित दस्तावेज और साक्ष्य भी प्रस्तुत करने होंगे। विभाग ने इस मामले को गंभीर वित्तीय अनियमितता और प्रशासनिक निगरानी में चूक से जुड़ा बताया है।
HRMS पोर्टल में छेड़छाड़ कर अधिक राशि निकालने का आरोप
विभागीय पत्र में आरोप लगाया गया है कि HRMS पोर्टल पर मेकर, चेकर और अप्रूवर की मिलीभगत से छेड़छाड़ और कूट रचना कर अधिक राशि की निकासी की गई। यह अनियमितता कर्मचारियों के वेतन, मकान किराया भत्ता और एरियर के भुगतान में सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, 38 जिलों में 6,895 मामलों के जरिए कुल 34,11,56,604 रुपये की अधिक निकासी हुई है। विभाग ने इस प्रक्रिया को वित्तीय नियमों का उल्लंघन माना है। पत्र में बिहार कोषागार संहिता, 2011 के नियम 155, 157 और 159 के साथ वित्त विभाग तथा सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से पहले जारी निर्देशों का भी उल्लेख किया गया है।
मेकर, चेकर और अप्रूवर की जिम्मेदारी पर उठे सवाल
शिक्षा विभाग ने पत्र में स्पष्ट किया है कि कर्मचारियों के वेतन और भत्तों की देयता की जांच करना तथा नियमानुसार भुगतान सुनिश्चित करना संबंधित निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी (DDO) और अप्रूवर की जिम्मेदारी है। वहीं, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) को भी पूरी व्यवस्था की निगरानी करनी होती है। विभाग ने सवाल उठाया है कि जिला स्तर पर मेकर, चेकर और अप्रूवर के माध्यम से कथित तौर पर अधिक राशि की निकासी होती रही, लेकिन इसकी समय रहते पहचान क्यों नहीं की गई। अधिकारियों की निगरानी और प्रशासनिक नियंत्रण की व्यवस्था के बावजूद इतनी बड़ी वित्तीय गड़बड़ी कैसे हुई, इस पर भी स्पष्टीकरण मांगा गया है।
सात दिनों में दस्तावेजों के साथ देना होगा जवाब
शिक्षा विभाग ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को पत्र प्राप्त होने के सात दिनों के भीतर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। केवल जवाब देना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि संबंधित साक्ष्य और दस्तावेज भी जमा करने होंगे। पत्र में चेतावनी दी गई है कि निर्धारित समय सीमा में जवाब नहीं मिलने पर यह माना जाएगा कि संबंधित अधिकारी को इस मामले में कुछ नहीं कहना है। ऐसी स्थिति में विभाग उपलब्ध साक्ष्यों और रिकॉर्ड के आधार पर एकतरफा निर्णय ले सकता है। इससे अधिकारियों पर जल्द जवाब देने का दबाव बढ़ गया है।
सरकारी सेवक नियमावली के तहत कार्रवाई की चेतावनी
विभाग ने जिला शिक्षा पदाधिकारियों से यह भी पूछा है कि वित्तीय अनियमितता और प्रशासनिक लापरवाही के लिए उनके खिलाफ बिहार सरकारी सेवक नियमावली, 2005 के प्रावधानों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों नहीं शुरू की जाए। अब जिला शिक्षा पदाधिकारियों के जवाब और प्रस्तुत दस्तावेजों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। विभागीय स्तर पर यह जांचने की जरूरत है कि अधिक निकासी किन परिस्थितियों में हुई, संबंधित अधिकारियों की क्या भूमिका रही और वित्तीय नियंत्रण की व्यवस्था में कहां चूक हुई। फिलहाल सभी 38 जिलों के अधिकारियों से जवाब मांगा गया है।
Bihar Education Department Salary में कितनी अधिक निकासी पाई गई?
बिहार के सभी 38 जिलों में 6,895 मामलों में कुल 34 करोड़ 11 लाख 56 हजार 604 रुपये की अधिक निकासी हुई है। यह वेतन, मकान किराया भत्ता (HRA) और एरियर के भुगतान में पाई गई।
HRMS पोर्टल पर छेड़छाड़ कैसे की गई?
विभाग के अनुसार, मेकर, चेकर और अप्रूवर की मिलीभगत से HRMS पोर्टल पर कूट रचना कर निर्धारित राशि से अधिक भुगतान निकाला गया। यह वित्तीय नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है।
जिला शिक्षा पदाधिकारियों को कितने समय में जवाब देना है?
पत्र प्राप्त होने के सात दिनों के भीतर सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को संबंधित दस्तावेज और साक्ष्य के साथ स्पष्टीकरण देना होगा।
निर्धारित समय में जवाब नहीं देने पर क्या होगा?
यदि समय सीमा में जवाब नहीं मिला तो विभाग उपलब्ध साक्ष्य और रिकॉर्ड के आधार पर एकतरफा निर्णय ले सकता है। अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है।
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