झारखंड सरकार 68 लाख राशन कार्डधारियों का जातिगत डेटा बेस तैयार करेगी। इसके लिए विशेष डीलर ऐप बनाया गया है, जिससे लाभुकों की जाति संबंधी जानकारी अपडेट की जाएगी।
Jharkhand Ration Card Update रांची: झारखंड सरकार ने राज्य के सभी राशन कार्डधारियों का जातिगत डेटा बेस तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग ने एक विशेष डीलर सुविधा ऐप विकसित किया है। इस ऐप के माध्यम से जन वितरण प्रणाली (पीडीएस) के डीलर लाभुकों की जाति संबंधी जानकारी अपडेट करेंगे।
सरकार का उद्देश्य विभिन्न सामाजिक वर्गों के लाभुकों का सटीक आंकड़ा तैयार करना है, ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ लक्षित समूहों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा सके।
Jharkhand Ration Card Update:डीलर ऐप के जरिए अपडेट होगा डेटा
विभागीय अधिकारियों के अनुसार राशन कार्डधारियों की जातिगत जानकारी दर्ज और अपडेट करने के लिए विशेष मोबाइल एप तैयार किया गया है। हाल ही में आयोजित समीक्षा बैठक में विभागीय सचिव राजेश कुमार शर्मा ने अधिकारियों को इस प्रक्रिया को तेज गति से पूरा करने के निर्देश दिए हैं।
वर्तमान में राज्य में लगभग 68 लाख राशन कार्डधारी परिवार हैं, जिनकी जानकारी चरणबद्ध तरीके से अपडेट की जाएगी।
Key Highlights
झारखंड में राशन कार्डधारियों का जातिगत डेटा बेस तैयार होगा।
68 लाख लाभुक परिवारों की जानकारी अपडेट की जाएगी।
डीलरों के लिए विशेष सुविधा ऐप विकसित किया गया।
13 साल बाद जातिवार आंकड़ों का होगा अद्यतन।
फर्जी और अयोग्य लाभुकों की पहचान में मिलेगी मदद।
Jharkhand Ration Card Update:13 साल बाद तैयार होगा नया जातिवार आंकड़ा
विभाग के मुताबिक झारखंड में आखिरी बार वर्ष 2012-13 में जातिवार आंकड़े तैयार किए गए थे। लगभग 13 वर्ष बीत जाने के कारण यह डेटा अब पुराना हो चुका है। बदलती सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए सरकार नए और अधिक सटीक आंकड़े तैयार करना चाहती है।
इस पहल से राज्य में विभिन्न जाति वर्गों के लाभुकों की वास्तविक संख्या का पता चल सकेगा, जिससे कल्याणकारी योजनाओं की बेहतर योजना बनाई जा सकेगी।
Jharkhand Ration Card Update:ई-केवाईसी और पोर्टेबिलिटी अभियान भी जारी
सरकार राशन कार्ड पोर्टेबिलिटी और ई-केवाईसी अभियान को भी साथ-साथ चला रही है। लाभुक अपने नजदीकी पीडीएस डीलर के पास जाकर ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।
अधिकारियों का मानना है कि डेटा अपडेट होने के बाद फर्जी या अयोग्य राशन कार्डधारियों की पहचान करना आसान होगा। इससे पात्र लाभुकों तक सरकारी सहायता अधिक पारदर्शी और प्रभावी तरीके से पहुंचाई जा सकेगी।
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