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Jharkhand Liquor Supply Crisis: 200 करोड़ से अधिक बकाया भुगतान पर शराब कंपनियों की चेतावनी, आपूर्ति प्रभावित होने का खतरा

 झारखंड में शराब, बीयर और वाइन कंपनियों का 200 करोड़ रुपये से अधिक भुगतान लंबित है। उद्योग संगठनों ने सरकार से जल्द भुगतान की मांग करते हुए आपूर्ति प्रभावित होने की चेतावनी दी है।


Jharkhand Liquor Supply Crisis रांची: झारखंड में शराब, बीयर और वाइन की आपूर्ति करने वाली कंपनियों का 200 करोड़ रुपये से अधिक भुगतान लंबित होने को लेकर उद्योग जगत में चिंता बढ़ गई है। एल्कोहलिक बेवरेज क्षेत्र के तीन प्रमुख संगठनों ने राज्य सरकार से बकाया राशि का तत्काल भुगतान करने की मांग की है। संगठनों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो राज्य में शराब की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।

Jharkhand Liquor Supply Crisis:तीन उद्योग संगठनों ने उठाया मुद्दा

कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन अल्कोहलिक बेवरेज कंपनीज, इंटरनेशनल स्पिरिट्स एंड वाइंस एसोसिएशन ऑफ इंडिया तथा ब्रुअर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (बीएआई) ने संयुक्त रूप से सरकार के समक्ष यह मामला उठाया है। संगठनों का कहना है कि लंबित भुगतान से उद्योग की वित्तीय स्थिति पर दबाव बढ़ रहा है।


Key Highlights

  • शराब उद्योग की कंपनियों का 200 करोड़ रुपये से अधिक भुगतान बकाया।

  • तीन प्रमुख उद्योग संगठनों ने राज्य सरकार से हस्तक्षेप की मांग की।

  • पुरानी आरटीएम व्यवस्था के तहत की गई आपूर्ति का भुगतान लंबित।

  • फरवरी 2026 में केवल 35 प्रतिशत राशि का आंशिक भुगतान हुआ।

  • भुगतान में देरी से शराब आपूर्ति और उत्पादन प्रभावित होने की आशंका।


Jharkhand Liquor Supply Crisis:पुरानी आरटीएम व्यवस्था से जुड़ा है बकाया

उद्योग संगठनों के अनुसार यह बकाया राशि 31 अगस्त 2025 तक लागू पुरानी रूट-टू-मार्केट (आरटीएम) व्यवस्था के तहत की गई आपूर्ति से संबंधित है। हालांकि राज्य सरकार ने 1 सितंबर 2025 से नई आरटीएम व्यवस्था लागू कर दी है, लेकिन पुरानी व्यवस्था के तहत किए गए भुगतान अब तक पूरी तरह नहीं किए गए हैं।

फरवरी 2026 में झारखंड स्टेट बेवरेजेज कॉरपोरेशन लिमिटेड द्वारा लगभग 35 प्रतिशत राशि का आंशिक भुगतान किया गया था, लेकिन 200 करोड़ रुपये से अधिक की राशि अभी भी बकाया बताई जा रही है।

Jharkhand Liquor Supply Crisis:कंपनियों की कार्यशील पूंजी पर बढ़ा दबाव

संगठनों का कहना है कि भुगतान में लगातार हो रही देरी के कारण कंपनियों की कार्यशील पूंजी प्रभावित हो रही है। नकदी संकट से निपटने के लिए कंपनियों को अल्पकालिक ऋण लेना पड़ रहा है, जिससे वित्तीय लागत बढ़ रही है।

उद्योग प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द भुगतान नहीं किया गया तो उत्पादन, वितरण और आपूर्ति श्रृंखला पर असर पड़ सकता है। इसका प्रभाव राज्य में शराब, बीयर और वाइन की उपलब्धता पर भी देखने को मिल सकता है।

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