चेक बाउंस मामले में अमीषा पटेल के खिलाफ झारखंड हाई कोर्ट में हुई सुनवायी

चेक बाउंस मामले में अमीषा पटेल खिलाफ झारखंड हाई कोर्ट में हुई सुनवायी

Ranchi-झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस एसके द्विवेदी की अदालत में अभिनेत्री अमीषा पटेल के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को निरस्त करने के मामले में सुनवाई हुई.

सुनवाई के दौरान अमीषा पटेल की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए समय देने का आग्रह किया गया.

इसके बाद अदालत ने मामले में अगली सुनवाई पांच मई को निर्धारित की है. इस दौरान अंतरिम राहत को बरकरार रखा गया है.

फिल्म निर्माता अजय कुमार सिंह से अमीषा की मुलाकात वर्ष 2017 में हरमू हाउसिंग कालोनी में एक कार्यक्रम के दौरान हुई थी. अमीषा पटेल ने उन्हें फिल्मों पैसा लगाने का आफर दिया.

इसके बाद उन्होंने फिल्म देसी मैजिक बनाने के नाम पर ढाई करोड़ रुपये अमीषा के खाते में ट्रांसफर कर दिया.

लवली वर्ल्ड इंटरटेनमेंट के प्रोपराइटर अजय कुमार सिंह ने फिल्म नहीं बनने के बाद अपने रुपये वापस मांगे.

इसके बाद अमीषा पटेल की ओर से उन्हें चेक दिया गया, जो बाउंस हो गया.

इसके बाद उनकी ओर से निचली अदालत में शिकायतवाद दर्ज कराया था जिसमें अदालत ने समन जारी किया था जिसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई है.

कार्मिक विभाग के सचिव वंदना पर सख्त हुआ हाईकोर्ट, आठ सप्ताह के अन्दर  कार्रवाई का आदेश 

झारखंड हाई कोर्ट ने कार्मिक विभाग के सचिव वंदना दादेल के द्वारा आदेश का अनुपालन नहीं करने पर नाराजगी जतायी है.

जस्टिस आनंद सेन की अदालत ने कहा कि इसके लिए पहले भी काफी समय दिया जा चुका है. अब समय नहीं दिया जा सकता. इस पर वंदना दादेल द्वारा कोर्ट को इसकी लम्बी प्रकिया से अवगत करवाया गया, इसके बाद कोर्ट ने आठ सप्ताह के अन्दर निर्देश का पालन करने का आदेश दिया.

बता दें कि पिछली सुनवाई के दौरान अदालत ने कार्मिक सचिव अदालत में सशरीर हाजिर होने का आदेश दिया था. इस आदेश के सामने आने के बाद आज सचिव कोर्ट के सामने पेश हुई. कोर्ट ने सचिव को आठ सप्ताह के अन्दर मामले  में कारवाई पूरी करने का आदेश दिया.

बता दें कि यह मामला मनव्वर आलम से जुड़ा हुआ है. मनव्वर आलम आरआरडीए में पदस्थापित थे. वर्ष 2017 में उन्हे सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था. मनव्वर आलम ने हाई कोर्ट में इस आदेश को चुनौती दी थी.

याचिका में कार्मिक विभाग के प्रधान सचिव, उप सचिव और उपायुक्त सह आरआरडीए के अध्यक्ष को प्रतिवादी बनाया गया था. याचिका में कहा गया था कि विभागीय रिपोर्ट के खिलाफ सक्षम फोरम में अपील दाखिल की थी, लेकिन उस पर कोई सुनवाई नहीं हुई.

रिपोर्ट- प्रोजेश

सहायक प्रोफेसर नियुक्ति मामले में झारखंड हाई कोर्ट में हुई सुनवाई

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