झारखंड हाईकोर्ट ने कहा कि वैध टिकट लेकर यात्रा कर रहे यात्री की ट्रेन से गिरकर मौत होने पर रेलवे तकनीकी आधार पर मुआवजा नहीं रोक सकता। 8 लाख रुपये और 7% ब्याज देने का आदेश।
Jharkhand High Court रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने चलती ट्रेन से गिरकर यात्री की मौत के मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि यदि कोई व्यक्ति वैध टिकट लेकर यात्रा कर रहा था और यात्रा के दौरान चलती ट्रेन से गिरने से उसकी मौत हो जाती है, तो रेलवे केवल तकनीकी आधार पर उसके परिजनों को मुआवजा देने से इनकार नहीं कर सकता।
Jharkhand High Court: हाईकोर्ट ने रेलवे को 8 लाख रुपये मुआवजा देने का दिया निर्देश
मंगलवार को जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की अदालत ने मधुपुर निवासी अशोक महतो के परिजनों के पक्ष में फैसला सुनाया। अदालत ने रेलवे को निर्देश दिया कि मृतक के आश्रितों को 8 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए। इसके साथ ही 1 अगस्त 2017 से वास्तविक भुगतान की तिथि तक 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी अदा किया जाए।
अदालत ने यह पूरी राशि दो माह के भीतर भुगतान करने का आदेश दिया है।
Key Highlights:
झारखंड हाईकोर्ट ने ट्रेन हादसे में मुआवजे को लेकर अहम फैसला सुनाया।
वैध टिकटधारी यात्री की मौत पर रेलवे तकनीकी आधार पर मुआवजा नहीं रोक सकता।
मधुपुर निवासी अशोक महतो के परिजनों को 8 लाख रुपये देने का आदेश।
1 अगस्त 2017 से भुगतान तक 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी मिलेगा।
हाईकोर्ट ने रेलवे अधिनियम के मुआवजा प्रावधान को लाभकारी कानून बताया।
Jharkhand High Court: रेलवे अधिनियम का प्रावधान लाभकारी कानून
फैसले में हाईकोर्ट ने कहा कि रेलवे अधिनियम में मुआवजे से जुड़े प्रावधान एक लाभकारी कानून हैं। ऐसे मामलों में यदि यात्री वैध टिकट के साथ यात्रा कर रहा था और दुर्घटना का शिकार हुआ, तो केवल तकनीकी आपत्तियों के आधार पर मुआवजा देने से इनकार करना कानून की मंशा के अनुरूप नहीं माना जा सकता।
यह फैसला भविष्य में रेल दुर्घटना से जुड़े मुआवजा मामलों में भी महत्वपूर्ण मिसाल माना जा रहा है।
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