झारखंड में JSSC CGL परीक्षा विवाद को लेकर लगातार तीसरे दिन छात्र प्रतिनिधियों और मंत्री समूह के बीच मैराथन वार्ता हुई। छात्र CBI जांच और परीक्षा रद्द करने की मांग पर अड़े हैं।
JSSC CGL विवाद रांची: झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच सोमवार को लगातार तीसरे दिन छात्र प्रतिनिधियों और सरकार के मंत्री समूह के बीच मैराथन वार्ता हुई। बैठक में छात्रों की कई मांगों पर सरकार की ओर से सहमति जताई गई, लेकिन झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की सीजीएल परीक्षा को लेकर गतिरोध बरकरार है।
छात्र प्रतिनिधि सीजीएल परीक्षा को रद्द करने और पूरे मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआइ से कराने की मांग पर अड़े हुए हैं। वहीं सरकार सीजीएल परीक्षा में कथित गड़बड़ियों की जांच रिटायर जज की अध्यक्षता वाली कमेटी से कराने के पक्ष में है।
Key Highlights
लगातार तीसरे दिन छात्र प्रतिनिधियों और मंत्री समूह के बीच मैराथन वार्ता हुई।
सरकार ने छात्रों की अधिकतर मांगों पर सहमति जताई है।
छात्र सीजीएल परीक्षा रद्द करने की मांग पर अड़े हैं।
छात्र पूरे मामले की सीबीआइ जांच कराने की मांग कर रहे हैं।
टीडीपीएल के माध्यम से आयोजित सभी परीक्षाओं को रद्द करने की भी मांग उठी है।
JSSC CGL विवाद:CGL परीक्षा रद्द करने पर नहीं बनी सहमति
वार्ता के दौरान सरकार ने छात्रों की मांगों पर सकारात्मक रुख दिखाते हुए कई बिंदुओं पर सहमति जताई। हालांकि सीजीएल परीक्षा की जांच के तरीके और परीक्षा के भविष्य को लेकर दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी।
सरकार का प्रस्ताव है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में कमेटी गठित की जाए। दूसरी ओर छात्र प्रतिनिधियों का कहना है कि परीक्षा में गड़बड़ी के आरोपों की गंभीरता को देखते हुए केवल कमेटी से जांच पर्याप्त नहीं है। वे परीक्षा रद्द कर सीबीआइ से पूरे मामले की जांच कराने की मांग कर रहे हैं।
JSSC CGL विवाद:TDPL से जुड़ी सभी परीक्षाएं रद्द करने की मांग
छात्र प्रतिनिधियों ने परीक्षा एजेंसी टीडीपीएल के माध्यम से आयोजित सभी परीक्षाओं को रद्द करने की मांग भी सरकार के सामने रखी है। छात्रों का तर्क है कि यदि परीक्षा प्रक्रिया और एजेंसी की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठे हैं, तो एजेंसी के माध्यम से आयोजित अन्य परीक्षाओं की भी जांच जरूरी है।
लगातार तीसरे दिन हुई बातचीत के बावजूद इन प्रमुख मांगों पर अंतिम सहमति नहीं बन पाई है। ऐसे में छात्र आंदोलन को लेकर आगे की स्थिति सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच होने वाली अगली बातचीत पर निर्भर करेगी।
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