Advertisment

आमना खातून: फूस के छप्पर से 20 लाख के लहठी बिजनेस का सफर

फूस के छप्पर से 20 लाख के बिजनेस तक: बिहार की आमना खातून की कामयाबी की वो कहानी, जो हर महिला को हौसला देगी

कहते हैं कि अगर मन में कुछ कर गुजरने की चाह हो, तो रास्ते अपने आप बन जाते हैं। इस बात को सच कर दिखाया है बिहार के शिवहर जिले की रहने वाली आमना खातून ने। एक वक्त था जब सामाजिक पाबंदियों और तंगहाली की वजह से आमना अपने हुनर को दबाकर जीने पर मजबूर थीं। लेकिन आज वो किसी पहचान की मोहताज नहीं हैं। फूस के छप्पर से शुरू हुआ उनका सफर आज सालाना 20 लाख रुपये के टर्नओवर तक पहुँच चुका है। आमना दीदी ने न सिर्फ अपनी किस्मत बदली, बल्कि आज वो दो दर्जन से ज्यादा महिलाओं को रोजगार देकर उन्हें भी आत्मनिर्भर बना रही हैं।

तंगहाली में था आमना खातून का परिवार

शादी से पहले आमना को पारंपरिक चूड़ी यानी लहठी बनाने का बहुत शौक था और वो इसमें माहिर भी थीं। लेकिन शादी के बाद चार बच्चों की परवरिश और घर के खर्चों ने उन्हें संघर्षों के जाल में उलझा दिया। उनके पति लुधियाना में सिलाई का काम करते थे। बाहर से जो पैसा आता था, उससे इतने बड़े परिवार का गुजारा बमुश्किल हो पाता था। जिंदगी बस जैसे-तैसे कट रही थी।

साल 2017: आमना खातून का सब कुछ बदल गया

आमना की जिंदगी में असली बदलाव साल 2017 में आया, जब वो ‘आला हजरत जीविका स्वयं सहायता समूह‘ और ‘बागमती ग्राम संगठन’ से जुड़ीं। यहाँ आकर उन्हें न सिर्फ हौसला मिला, बल्कि अपने दबे हुए हुनर को दोबारा जिंदा करने की प्रेरणा भी मिली। पति ने भी इस काम में उनका पूरा साथ दिया।

साल 2020 में आमना ने समूह से 40,000 रुपये का पहला लोन (ऋण) लिया। करीब 8 साल के लंबे गैप के बाद, उन्होंने सीतामढ़ी से कच्चा माल खरीदा और घर पर ही दोबारा लहठी बनाना शुरू किया। उनके हाथों की कारीगरी में ऐसा जादू था कि स्थानीय दुकानदारों ने उनकी बनाई लहठियों को हाथों-हाथ लिया। पहली ही बार में आमना को 7,000 रुपये का शुद्ध मुनाफा हुआ। इस पहली कमाई ने उनके हौसलों को उड़ान दे दी।

सरस मेलों ने चमकाई आमना खातून की किस्मत

पहली सफलता के बाद आमना ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। वो समय पर अपना लोन चुकाती गईं और बिजनेस को बड़ा करती गईं। जब उन्होंने ‘सरस मेलों’ में अपनी लहठियों के स्टॉल लगाए, तो लोग उनकी कला के दीवाने हो गए। सिर्फ मेलों से ही उन्हें 70,000 रुपये की सीधी बचत हुई।

आज स्थिति यह है कि आमना का यह घरेलू काम 15 से 20 लाख रुपये सालाना टर्नओवर वाले एक बड़े बिजनेस में बदल चुका है। इससे उन्हें हर साल 5 से 6 लाख रुपये का मुनाफा हो रहा है। शिवहर और सीतामढ़ी की 25-30 बड़ी दुकानों के अलावा उनकी खूबसूरत लहठियाँ पटना, दिल्ली, गुरुग्राम, वाराणसी, हरियाणा, यूपी और देवघर के बड़े-बड़े मेलों की रौनक बढ़ा रही हैं।

आमना खातून ने दूसरों को भी दिया रोजगार

जीविका अधिकारियों के मुताबिक, आमना ने सिर्फ अपने परिवार के दिन नहीं बदले, बल्कि गाँव के 13 लोगों को परमानेंट रोजगार भी दिया है, जिनमें जीविका से जुड़ी 10 महिलाएं शामिल हैं। आमना अब तक समूह से लिया गया 9.75 लाख रुपये का पूरा लोन चुका चुकी हैं।

अब उनके सपने और बड़े हो चुके हैं। वो 20 से 25 लाख रुपये के नए इन्वेस्टमेंट के साथ अपनी लहठियों को देश की सीमाओं से बाहर, यानी इंटरनेशनल मार्केट तक ले जाने की तैयारी कर रही हैं। फूस के छप्पर से शुरू हुई आमना दीदी की यह कहानी आज बिहार की लाखों महिलाओं के लिए एक मिसाल बन चुकी है।

बिहार में कांवरिया यात्रा: सम्राट सरकार के इंतजामों ने जीता श्रद्धालुओं...

'बोल बम' के जयकारों के बीच बिहार में कांवरिया यात्रा: सम्राट सरकार के इंतजामों ने जीता बाहरी श्रद्धालुओं का दिल सावन का पवित्र महीना शुरू...

Bihar Government: राज्य स्तरीय सहयोग कार्यक्रम में 181 फरियादियों की सुनवाई,...

पटना में राज्य स्तरीय सहयोग कार्यक्रम में 181 आवेदकों की समस्याओं का निष्पादन किया गया। CM सम्राट चौधरी ने अधिकारियों को समयबद्ध समाधान के...

Bihar Government: प्रेम की धुन से प्रतिरोध की आवाज तक, ‘मौसिकी’...

डॉ. अमित रंजन के काव्य संग्रह ‘मौसिकी : अहसासों का आसमान’ में प्रेम, पीड़ा, स्त्री अस्मिता, सामाजिक सरोकार और प्रतिरोध की संवेदना दिखाई देती...