Advertisment

Dr BP Kesari 10th Death Anniversary: नागपुरी भाषा के पुरोधा डॉ. बीपी केशरी की 10वीं पुण्यतिथि, जानें झारखंड के लिए उनका योगदान

Dr BP Kesari 10th Death Anniversary, रांची: झारखंड आंदोलन के बौद्धिक योद्धा, इतिहासकार, साहित्यकार, शिक्षाविद् और नागपुरी भाषा के प्रमुख अध्येता डॉ. बिशेश्वर प्रसाद केशरी की आज 14 अगस्त को 10वीं पुण्यतिथि है। वर्ष 2016 में इसी दिन उनका निधन हुआ था। पुण्यतिथि के अवसर पर झारखंड के सामाजिक, सांस्कृतिक, साहित्यिक और शैक्षणिक क्षेत्र में उन्हें श्रद्धापूर्वक याद किया जा रहा है। रांची के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग, पिठोरिया स्थित नागपुरी संस्थान और प्रेम मंजरी उच्च विद्यालय सहित विभिन्न स्थानों पर उनके योगदान का स्मरण किया जा रहा है। डॉ. केशरी ने अपना पूरा जीवन झारखंड की भाषा, संस्कृति, इतिहास और अस्मिता को समझने तथा संरक्षित करने के लिए समर्पित किया।

झारखंड आंदोलन को दिया वैचारिक आधार

डॉ. बीपी केशरी की भूमिका अलग झारखंड राज्य के आंदोलन में महत्वपूर्ण रही। उन्होंने डॉ. रामदयाल मुंडा और अन्य आंदोलनकारियों के साथ मिलकर आंदोलन को बौद्धिक और वैचारिक आधार देने का काम किया। वर्ष 1989 में वे डॉ. रामदयाल मुंडा और विनोद बिहारी महतो के साथ झारखंड कोऑर्डिनेशन कमेटी के समन्वयक रहे। इस दौरान अलग राज्य की मांग को व्यापक वैचारिक आधार देने और आंदोलन के विभिन्न पक्षों को जोड़ने में उनकी भूमिका रही। 19 नवंबर 1987 को उनके नेतृत्व में पिठोरिया चौक पर अलग झारखंड राज्य की मांग को लेकर नाकेबंदी भी की गयी थी। इससे पिठोरिया झारखंड आंदोलन की महत्वपूर्ण धरती के रूप में सामने आया।

नागपुरी भाषा और साहित्य के संरक्षण में अहम भूमिका

डॉ. केशरी केवल आंदोलनकारी ही नहीं, बल्कि नागपुरी भाषा और साहित्य के गंभीर अध्येता एवं शोधकर्ता भी थे। उन्होंने वर्ष 1951 से नागपुरी गीतों को संग्रहित करना शुरू किया और लंबे समय तक इस काम को जारी रखा। उनकी प्रमुख कृतियों में ‘नागपुरी भाषा और साहित्य’, ‘छोटानागपुर का इतिहास’, ‘झारखंड आंदोलन की वास्तविकता’, ‘झारखंडी भाषाओं की समस्याएं और संभावनाएं’, ‘नागपुरी कवि और उनका काव्य’ तथा ‘नागपुरी लोकगीत वृहद् संग्रह’ शामिल हैं। उन्होंने नागपुरी साहित्य की लगभग चार सौ वर्षों की काव्य परंपरा को संकलित और प्रकाशित कराने का प्रयास किया। उनके इस काम से मौखिक और लिखित नागपुरी साहित्य को संरक्षित करने में महत्वपूर्ण मदद मिली।

जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं को मिला अकादमिक आधार

डॉ. बीपी केशरी ने डॉ. रामदयाल मुंडा के साथ मिलकर रांची विश्वविद्यालय में जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। इस विभाग ने झारखंड की स्थानीय भाषाओं के अध्ययन और शोध को संस्थागत आधार देने में भूमिका निभायी। डॉ. केशरी का मानना था कि किसी समाज की पहचान उसकी भाषा और संस्कृति से जुड़ी होती है। इसी सोच के साथ उन्होंने झारखंड की भाषाओं को अकादमिक पहचान और सम्मान दिलाने के लिए लगातार काम किया।

पिठोरिया में स्थापित किया नागपुरी संस्थान

डॉ. केशरी और उनकी पत्नी शांति केशरी ने 17 फरवरी 2002 को पिठोरिया में नागपुरी संस्थान की स्थापना की। यह संस्थान नागपुरी भाषा, साहित्य और संस्कृति के अध्ययन एवं संरक्षण के उनके प्रयासों का महत्वपूर्ण केंद्र बना। पिठोरिया से उन्होंने नागपुरी भाषा और झारखंडी संस्कृति को व्यापक स्तर पर पहचान दिलाने का प्रयास किया। यही कारण है कि पिठोरिया और नागपुरी साहित्य के संदर्भ में आज भी उनका नाम प्रमुखता से लिया जाता है।

इतिहास और झारखंडी अस्मिता को शब्दों में किया दर्ज

डॉ. केशरी ने झारखंड के इतिहास और सामाजिक संरचना पर भी व्यापक लेखन किया। उनकी पुस्तक ‘छोटानागपुर का इतिहास’ झारखंड के इतिहास को समझने वाली प्रमुख कृतियों में शामिल है। उनका मानना था कि किसी समाज के लिए अपनी धरती और इतिहास को जानना बेहद जरूरी है। उनके लेखन में झारखंड की सामाजिक संरचना, भाषाई विविधता, सांस्कृतिक परंपराओं और आंदोलन की पृष्ठभूमि से जुड़े विषयों को स्थान मिला।

सादगी और विचारों की प्रतिबद्धता बनी पहचान

डॉ. बीपी केशरी का जीवन सादगी और वैचारिक प्रतिबद्धता के लिए भी याद किया जाता है। साहित्य, शोध और झारखंडी समाज से जुड़े सवाल उनके जीवन के केंद्र में रहे। वर्ष 2016 में निधन के बाद उनका अंतिम संस्कार पिठोरिया स्थित किसान घाट में राजकीय सम्मान के साथ किया गया था। उन्हें झारखंड रत्न, भारतेंदु हरिश्चंद्र सम्मान, झारखंड गौरव सम्मान और राजभाषा सम्मान सहित विभिन्न सम्मानों से सम्मानित किया गया था। आज उनकी 10वीं पुण्यतिथि पर उन्हें याद करना झारखंड आंदोलन के एक महत्वपूर्ण बौद्धिक व्यक्तित्व को श्रद्धांजलि देने के साथ-साथ भाषा, संस्कृति, इतिहास और झारखंडी अस्मिता के लिए उनके योगदान को स्मरण करना भी है। उनकी पुस्तकें, शोध, नागपुरी गीतों का संग्रह और संस्थागत कार्य आने वाली पीढ़ियों के लिए उनकी महत्वपूर्ण विरासत हैं।

यह भी पढ़ें: JPSC-JSSC Scam: अभय तिवारी की संपत्ति को लेकर बड़ा दावा, आलीशान मकान से देवघर के अस्पताल तक जांच

Ranchi Traffic Plan 15 August: रांची में 15 अगस्त को बदला...

Ranchi Traffic Plan 15 August, Ranchi: स्वतंत्रता दिवस के मौके पर मोरहाबादी मैदान में आयोजित होने वाले मुख्य समारोह को लेकर राजधानी की यातायात...

JPSC-JSSC Scam: अभय तिवारी की संपत्ति को लेकर बड़ा दावा, आलीशान...

JPSC-JSSC Scam, रांची: JPSC और JSSC की विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच के बीच अभय तिवारी से जुड़ी संपत्तियों को लेकर...

Jharkhand Digital Health Mission: अब अस्पताल की रिपोर्ट के लिए नहीं...

Jharkhand Digital Health Mission: झारखंड में स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल बनाने की प्रक्रिया तेज कर दी गयी है। मुख्यमंत्री डिजिटल हेल्थ मिशन और आर्टिफिशियल...