JPSC की पूर्व सदस्य अनिमा हांसदा ने TDPL चयन और 11वीं व 13वीं सिविल सेवा रिजल्ट पर सवाल उठाये। उन्होंने गड़बड़ियों की जानकारी देने का दावा किया।
JPSC Scam रांची:रांची में झारखंड लोक सेवा आयोग यानी JPSC से जुड़ी कथित गड़बड़ियों को लेकर आयोग की पूर्व सदस्य डॉ. अनिमा हांसदा ने कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि आयोग में हो रही गड़बड़ियों और प्रक्रियागत त्रुटियों की जानकारी उचित फोरम तक पहुंचाने की कोशिश की गयी, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गयी। उन्होंने TDPL एजेंसी के चयन में अपनी किसी भी भूमिका से इनकार करते हुए कहा कि वह एजेंसी के किसी निदेशक या अभय तिवारी को नहीं जानती हैं।
JPSC Scam:TDPL चयन में भूमिका से अनिमा हांसदा का इनकार
अनिमा हांसदा ने कहा कि TDPL एजेंसी का चयन किस प्रक्रिया के तहत किया गया, इसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने अभय तिवारी को जानने या उनसे कभी मिलने अथवा बातचीत करने से भी इनकार किया।
TDPL के निदेशकों की ओर से JPSC कार्यालय में प्रेजेंटेशन दिये जाने के आरोप पर उन्होंने कहा कि यह दावा पूरी तरह गलत है। उनके अनुसार रामवीर सिंह और सत्यपाल बोकारे ने आयोग कार्यालय में प्रेजेंटेशन दिया था, लेकिन वह उस दौरान मौजूद नहीं थीं। उन्होंने यह भी कहा कि एजेंसी के चयन से संबंधित प्रतिवेदन पर उनके हस्ताक्षर नहीं हैं और उन्होंने TDPL का प्रेजेंटेशन भी नहीं देखा था।
अनिमा हांसदा ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने TDPL एजेंसी को लेकर सवाल उठाये, तो तत्कालीन अध्यक्ष एल खियांग्ते ने उनके खिलाफ टिप्पणी की। उन्होंने इसका विरोध किया। उनके मुताबिक, इसके बाद उन्हें राज्यपाल से शिकायत कर सदस्य पद से हटवाने की धमकी दी गयी।
JPSC Scam:11वीं और 13वीं सिविल सेवा रिजल्ट पर भी उठाये सवाल
पूर्व JPSC सदस्य ने 11वीं और 13वीं सिविल सेवा मुख्य परीक्षा के रिजल्ट को लेकर भी गंभीर सवाल उठाये हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने दोनों परीक्षाओं के मेन्स रिजल्ट पर हस्ताक्षर नहीं किये थे, क्योंकि उन्हें इसमें कई त्रुटियां नजर आयी थीं। उन्होंने इसकी जानकारी उच्च शिक्षा मंत्री को देने की बात कही।
अनिमा हांसदा के अनुसार, तत्कालीन अध्यक्ष ने उन्हें 11वीं और 13वीं सिविल सेवा मुख्य परीक्षा के रिजल्ट की स्क्रूटनी करने को कहा था, लेकिन उन्होंने इससे इनकार कर दिया। इसके बाद उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया, जिसका उन्होंने जवाब दिया।
उन्होंने यह भी दावा किया कि 17 जून 2026 को उन्होंने इस पूरे मामले की जानकारी उच्च शिक्षा मंत्री को फोन पर देने की कोशिश की थी, लेकिन उनकी बात टाल दी गयी। इसके बाद 22 जुलाई 2026 की सुबह 7.12 बजे उच्च शिक्षा मंत्री की ओर से सभी सदस्यों को इस्तीफा देने की सूचना दी गयी। अनिमा हांसदा ने कहा कि इसके बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया।
Key Highlights
JPSC की पूर्व सदस्य अनिमा हांसदा ने TDPL चयन में अपनी भूमिका से इनकार किया।
उन्होंने कहा कि TDPL के प्रेजेंटेशन के दौरान वह आयोग कार्यालय में मौजूद नहीं थीं।
11वीं और 13वीं सिविल सेवा मेन्स रिजल्ट पर हस्ताक्षर नहीं करने की बात कही।
मुख्य परीक्षा की कॉपियों की ऑनलाइन जांच और विशेषज्ञ पैनल की प्रक्रिया पर सवाल उठाये।
कथित कोचिंग सिंडिकेट से संबंध और पैसे लेकर अभ्यर्थियों को पास कराने के आरोपों को बेबुनियाद बताया।
JPSC Scam:कॉपी जांच के विशेषज्ञ पैनल की प्रक्रिया पर सवाल
अनिमा हांसदा ने सिविल सेवा मुख्य परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन और बाद की स्क्रूटनी प्रक्रिया पर भी सवाल उठाये थे। उन्होंने तत्कालीन JPSC अध्यक्ष एल खियांग्ते को 20 मई 2025 को पत्र लिखकर अपनी आपत्तियां दर्ज करायी थीं।
पत्र में उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा 2023 यानी 11वीं सिविल सेवा की प्रारंभिक परीक्षा से जुड़ी कथित अनियमितताओं का भी उल्लेख किया था। इनमें कुछ केंद्रों पर प्रश्नों की पुनरावृत्ति, खुले पैकेट में प्रश्नपत्र पहुंचने, प्रश्नपत्र और उत्तर पुस्तिका के क्रमांक में अंतर तथा कदाचार की शिकायतों का जिक्र किया गया था।
उन्होंने मुख्य परीक्षा की कॉपियों की ऑनलाइन जांच प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाये। उनके अनुसार सदस्यों की सहमति के बिना ऑनलाइन मूल्यांकन की प्रक्रिया शुरू की गयी। करीब 100 कंप्यूटरों का सेटअप लगाया गया और बिना पर्याप्त तैयारी के 60 से अधिक विशेषज्ञों को बुलाया गया। विशेषज्ञों ने 30 जून 2024 से मूल्यांकन शुरू कर दिया था।
अनिमा हांसदा ने दावा किया कि अवकाश के दिन बैठक बुलाकर कंप्यूटर के माध्यम से कॉपियों की जांच के लिए प्रति कॉपी 160 रुपये भुगतान की सहमति ली गयी थी। उन्होंने विशेषज्ञों के पैनल के गठन को भी नियम विरुद्ध बताया।
JPSC Scam:कोचिंग सिंडिकेट से जुड़े आरोपों को बताया बेबुनियाद
TDPL मामले में कथित कोचिंग सिंडिकेट से नाम जोड़े जाने पर अनिमा हांसदा ने इसे पूरी तरह गलत और बेबुनियाद बताया। उन्होंने कहा कि वह अभय तिवारी और पतंजलि कोचिंग के संचालक रवि कुमार को नहीं जानती हैं। उनका कहना है कि इन लोगों से उनका कभी कोई वास्ता नहीं रहा और उन्होंने पैसे लेकर किसी अभ्यर्थी को पास नहीं कराया।
वहीं, 11वीं और 13वीं सिविल सेवा मुख्य परीक्षा के दौरान उनके आरोपों और दावों पर तत्कालीन JPSC अध्यक्ष नीलिमा केरकेट्टा ने कहा कि उनके कार्यकाल में सभी प्रक्रियाएं नियम के अनुसार हुई थीं और हर बात रिकॉर्ड में दर्ज है।
Highlights



















