झारखंड हाईकोर्ट ने अपर बाजार के जालान रोड में दुकानों को खाली कराने और तोड़ने से जुड़ा रांची नगर निगम का आदेश रद्द कर दिया। कोर्ट ने नियमानुसार कार्रवाई का निर्देश दिया।
Ranchi High Court रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने अपर बाजार के जालान रोड स्थित चार दुकानों को खाली कराने और तोड़ने से संबंधित रांची नगर निगम के आदेश को रद्द कर दिया है। जस्टिस आनंद सेन की अदालत ने शुक्रवार को मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि यदि नगर निगम को कोई कार्रवाई करनी है, तो उसे नियमानुसार प्रक्रिया का पालन करते हुए आगे बढ़ना होगा।
Ranchi High Court:हाईकोर्ट ने निगम की कार्रवाई पर उठाये सवाल
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि नगर निगम की ओर से जिस व्यक्ति के नाम नोटिस जारी किया गया था, उसकी पहले ही मृत्यु हो चुकी है। इसके अलावा निगम को यह जानकारी थी कि संबंधित स्थल पर कुल आठ दुकानें संचालित हो रही हैं, लेकिन सभी दुकानदारों को नोटिस नहीं दिया गया था।
अदालत ने इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए नगर निगम की ओर से जारी कार्रवाई के आदेश को रद्द कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि निगम को आगे कोई कार्रवाई करनी है, तो उसे निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होगा।
Key Highlights
झारखंड हाईकोर्ट ने जालान रोड की चार दुकानों से जुड़ा नगर निगम का आदेश रद्द किया।
नगर निगम ने दुकानदारों को दुकान खाली करने और तोड़ने का आदेश दिया था।
जिस व्यक्ति के नाम नोटिस जारी हुआ था, उसकी पहले ही मृत्यु हो चुकी थी।
स्थल पर आठ दुकानें होने के बावजूद सभी दुकानदारों को नोटिस नहीं दिया गया था।
कोर्ट ने कहा कि कार्रवाई के लिए नगर निगम को नियमानुसार प्रक्रिया का पालन करना होगा।
Ranchi High Court:जालान रोड में आठ दुकानें संचालित होने का दावा
प्रार्थियों की ओर से अधिवक्ता शिल्पी गाड़ोदिया ने अदालत के समक्ष पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि जालान रोड स्थित खाली जमीन रांची नगर निगम ने दो व्यक्तियों को आवंटित की थी। बाद में नगर निगम की अनुमति से उसी स्थल पर आठ लोगों ने दुकानें बनायी थीं।
अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि इसके बावजूद नगर निगम की ओर से जमीन खाली कराने का नोटिस जारी किया गया और दुकानों को तोड़ने की कार्रवाई शुरू करने की बात कही गयी थी।
Ranchi High Court:सभी दुकानदारों को नोटिस नहीं देने पर आदेश रद्द
सुनवाई के दौरान अदालत ने इस बात को महत्वपूर्ण माना कि निगम को स्थल पर आठ दुकानों के संचालन की जानकारी थी, लेकिन कार्रवाई के लिए सभी दुकानदारों को नोटिस नहीं दिया गया। जिस व्यक्ति के नाम नोटिस जारी हुआ था, उसकी मृत्यु भी हो चुकी थी।
इन परिस्थितियों में हाईकोर्ट ने नगर निगम के आदेश को रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि भविष्य में किसी भी कार्रवाई के लिए संबंधित पक्षों को नियमानुसार प्रक्रिया के तहत नोटिस और सुनवाई का अवसर देना होगा।
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