Jharkhand High Court: शादीशुदा बेटी को अनुकंपा नियुक्ति से नहीं किया जा सकता वंचित, हाईकोर्ट ने CMPFO का आदेश रद्द किया

Jharkhand High Court, रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि केवल शादीशुदा होने के आधार पर किसी बेटी को अनुकंपा नियुक्ति के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने धनबाद निवासी किरण ए. पासवान की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोल माइंस प्रोविडेंट फंड ऑर्गनाइजेशन (CMPFO) की ओर से उनकी अनुकंपा नियुक्ति का दावा खारिज करने वाले आदेश को रद्द कर दिया। अदालत ने संबंधित विभाग को निर्धारित नियमों के तहत याचिकाकर्ता को आठ सप्ताह के भीतर अनुकंपा नियुक्ति देने का निर्देश दिया। फैसला 12 अगस्त 2026 को सुनाया गया।

सेवा के दौरान हुई थी पिता की मौत

याचिकाकर्ता किरण पासवान के पिता अर्जुन प्रसाद CMPFO के धनबाद क्षेत्र में सहायक के पद पर कार्यरत थे। 25 नवंबर 2013 को सेवा के दौरान उनकी मृत्यु हो गई थी। परिवार में उनकी पत्नी जयंती देवी, बेटी किरण और दो बेटे सत्य प्रकाश प्रसाद तथा रवि कुमार थे। पिता की मृत्यु के बाद किरण की ओर से अनुकंपा नियुक्ति के लिए दावा किया गया। विभाग ने यह कहते हुए उनका दावा खारिज कर दिया कि पिता की मृत्यु के समय वह शादीशुदा थीं, उनके पति की आमदनी थी और उनके दोनों भाई भी नौकरी में थे। हाईकोर्ट के आदेश के बाद मामले पर दोबारा विचार किया गया, लेकिन 12 फरवरी 2024 को विभाग ने फिर उनका दावा खारिज कर दिया। इसके बाद किरण ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

पति की कम आय से निर्भरता खत्म नहीं होती

सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता की मां ने 31 दिसंबर 2013 के हलफनामे में यह नहीं कहा था कि उनकी बेटी के पति के पास पर्याप्त रोजगार या आय थी। इसके विपरीत, दो जनवरी 2014 को अनुकंपा नियुक्ति के लिए दिए गए आवेदन में मां ने स्पष्ट किया था कि शादी के बाद भी उनकी बेटी अपने पिता पर पूरी तरह निर्भर थीं। आवेदन में यह भी बताया गया था कि पिता जीवित रहते बेटी और उसके बच्चों की देखभाल करते थे। अदालत ने इन्हीं तथ्यों को मामले में महत्वपूर्ण माना।

दोनों भाई नौकरी में थे, लेकिन अलग रह रहे थे

अदालत ने पाया कि जांच में किरण के दोनों भाइयों के नौकरी में होने की जानकारी सामने आई थी। हालांकि, दोनों अपने-अपने परिवारों के साथ अलग रह रहे थे और उन्होंने मां की देखभाल तथा आर्थिक जिम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया था। वहीं, किरण स्वयं किसी नौकरी में नहीं थीं और अपनी मां के साथ रह रही थीं। दोनों की आर्थिक स्थिति CMPFO से मिलने वाली सीमित पेंशन और किरण के पति की कम आय पर निर्भर थी।

शादीशुदा बेटी के लिए भी नियमों में प्रावधान

हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के 30 मई 2013 के निर्देश का भी उल्लेख किया। इसके तहत शादीशुदा बेटी को अनुकंपा नियुक्ति के लिए निर्धारित शर्तें पूरी करनी होती हैं। इनमें प्रमुख रूप से यह देखा जाना है कि सरकारी कर्मचारी की मृत्यु के समय बेटी उस पर पूरी तरह निर्भर थी या नहीं और क्या वह परिवार के अन्य आश्रित सदस्यों के भरण-पोषण की जिम्मेदारी उठा रही है।

वास्तविक निर्भरता महत्वपूर्ण, केवल वैवाहिक स्थिति नहीं

अदालत ने उपलब्ध तथ्यों के आधार पर कहा कि किरण अपने पिता पर निर्भर थीं। उनकी मां भी वृद्ध थीं और स्वास्थ्य संबंधी परिस्थितियों के कारण स्वयं रोजगार करने की स्थिति में नहीं थीं। ऐसे में केवल इस आधार पर कि किरण विवाहित थीं और उनके पति की कुछ आय थी, यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि वह अपने पिता पर निर्भर नहीं थीं। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि वैवाहिक स्थिति अपने आप में अनुकंपा नियुक्ति के दावे को खत्म नहीं कर सकती, यदि वास्तविक निर्भरता साबित होती है।

पेंशन को अनुकंपा नियुक्ति का विकल्प नहीं माना जा सकता

अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि अनुकंपा नियुक्ति योजना के कल्याणकारी उद्देश्य को केवल तकनीकी और प्रक्रियात्मक कठोरता के आधार पर कमजोर नहीं किया जाना चाहिए। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि परिवार को मिलने वाली पेंशन या सेवानिवृत्ति संबंधी लाभ अनुकंपा नियुक्ति का विकल्प नहीं हैं। इसके बाद हाईकोर्ट ने CMPFO के 12 फरवरी 2024 के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें किरण पासवान की अनुकंपा नियुक्ति का दावा खारिज किया गया था। अदालत ने संबंधित अधिकारी को आदेश की प्रति प्राप्त होने के आठ सप्ताह के भीतर निर्धारित नियमों के अनुसार नियुक्ति देने का निर्देश दिया।

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