Ranchi School Tobacco Case: राजधानी रांची के जगन्नाथपुर स्थित राजकीयकृत उच्च विद्यालय में आयोजित दंत एवं मुख स्वास्थ्य जांच शिविर के दौरान बच्चों में तंबाकू सेवन से जुड़ी चिंताजनक स्थिति सामने आई। शिविर में करीब 200 छात्र-छात्राओं की जांच की गई। इस दौरान 10 से अधिक बच्चों के गाल और मसूड़ों के अंदर सफेद धब्बे पाए गए। चिकित्सकों के अनुसार, इन बच्चों में तंबाकू सेवन से जुड़े ल्यूकोप्लाकिया जैसे कैंसर-पूर्व बदलाव के संकेत मिले हैं। संबंधित बच्चों को आगे की विस्तृत जांच और चिकित्सकीय परामर्श के लिए रिम्स डेंटल इंस्टीट्यूट बुलाया गया है।
Ranchi School Tobacco Case – रिम्स की टीम ने की बच्चों की जांच
स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन रिम्स के दंत चिकित्सा संस्थान और इंडियन एकेडमी ऑफ ओरल मेडिसिन एंड रेडियोलॉजी के सहयोग से किया गया। रिम्स डेंटल कॉलेज के ओरल मेडिसिन एंड रेडियोलॉजी विभाग की एडिशनल प्रोफेसर डॉ. शांताला के नेतृत्व में चार इंटर्न डॉक्टरों की टीम ने विद्यार्थियों की जांच की। जांच टीम में अनामिका कुमारी, आंचल कच्छप, अक्षिता कुमारी और सेजल खंडेलवाल शामिल थीं। चिकित्सकों ने बच्चों के दांतों, मसूड़ों और मुंह की अंदरूनी सतह की जांच की। इसी दौरान कुछ विद्यार्थियों में असामान्य सफेद धब्बे पाए गए।
सफेद धब्बों को नजरअंदाज न करने की सलाह
डॉ. शांताला ने बताया कि कुछ बच्चों के गाल और मसूड़ों में सफेद रंग के धब्बे मिले हैं। पूछताछ के दौरान इन बच्चों में तंबाकू सेवन की जानकारी भी सामने आई। ऐसे धब्बों को चिकित्सकीय रूप से ल्यूकोप्लाकिया कहा जा सकता है। उन्होंने बताया कि ल्यूकोप्लाकिया कई मामलों में कैंसर से पहले होने वाले बदलाव का संकेत हो सकता है। हालांकि, प्रारंभिक स्तर पर पहचान होने से उपचार और स्थिति को नियंत्रित करने की संभावनाएँ बेहतर रहती हैं।
संबंधित बच्चों को आगे की जांच के लिए रिम्स डेंटल इंस्टीट्यूट बुलाया गया है। चिकित्सकों ने स्पष्ट किया कि तंबाकू का सेवन तुरंत बंद करना और समय पर चिकित्सकीय सलाह लेना बेहद जरूरी है। शुरुआती चरण में सावधानी बरतने से आगे होने वाले नुकसान को कम करने में मदद मिल सकती है।
बच्चों को तंबाकू के दुष्प्रभावों की दी गई जानकारी
शिविर के बाद विद्यार्थियों के लिए जागरूकता सत्र भी आयोजित किया गया। इसमें बीड़ी, सिगरेट, गुटखा, खैनी और अन्य तंबाकू उत्पादों से होने वाले नुकसान के बारे में जानकारी दी गई। डॉक्टरों ने बताया कि तंबाकू मुंह की अंदरूनी सतह, मसूड़ों और दांतों पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है। लंबे समय तक सेवन करने से मुख संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। विद्यार्थियों को नशे से दूर रहने, संतुलित आहार लेने और नियमित रूप से दांतों एवं मुंह की सफाई करने की सलाह दी गई।
चार-पांच वर्षों से तंबाकू सेवन की जानकारी
जांच के दौरान कुछ बच्चों ने बिना संकोच तंबाकू सेवन करने की बात स्वीकार की। चिकित्सकों के अनुसार, कुछ विद्यार्थी पिछले चार-पांच वर्षों से तंबाकू का सेवन कर रहे हैं। स्कूल प्रबंधन की ओर से बच्चों की जांच कराने का आग्रह किया गया था। बताया गया कि कुछ बच्चों में गलत खानपान और मुंह से दुर्गंध आने जैसी शिकायतें भी सामने आई थीं। इसके बाद स्वास्थ्य जांच कराई गई, जिसमें मुंह के अंदर सफेद धब्बों की पहचान हुई।
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया गंभीर चेतावनी
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने बच्चों में इस तरह के कैंसर-पूर्व बदलाव मिलने को चिंताजनक बताया। उन्होंने कहा कि बच्चों में प्रारंभिक जांच के दौरान मिले संकेतों का इलाज संभव है। उन्होंने स्कूलों और कॉलेजों में विशेषज्ञ टीमों के माध्यम से कैंसर स्क्रीनिंग कैंप आयोजित करने तथा तंबाकू और अन्य नशीले पदार्थों के नुकसान के प्रति जागरूकता बढ़ाने की बात कही। उन्होंने यह भी कहा कि कैंसर से पीड़ित पाए जाने वाले लोगों के इलाज के लिए सरकार की ओर से आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जाएगा।
परिवार और समाज के लिए भी चेतावनी
विशेषज्ञों का कहना है कि स्कूल जाने की उम्र में बच्चों का तंबाकू सेवन करना केवल व्यक्तिगत आदत का मामला नहीं है। इसके पीछे घर का माहौल, आसपास के लोगों की आदतें, तंबाकू उत्पादों की आसान उपलब्धता और जागरूकता की कमी जैसे कारण भी हो सकते हैं। डॉक्टरों ने अभिभावकों और शिक्षकों से बच्चों के व्यवहार तथा स्वास्थ्य संबंधी बदलावों पर ध्यान देने की अपील की। मुंह में सफेद या लाल धब्बे, घाव, जलन अथवा अन्य असामान्य लक्षण दो सप्ताह से अधिक समय तक बने रहें, तो दंत चिकित्सक से जांच कराने की सलाह दी गई है।


















