Bihar Agriculture Statistics Training, पटना: बिहार में कृषि क्षेत्र से जुड़े आंकड़ों को अधिक विश्वसनीय, गुणवत्तापूर्ण और उपयोगी बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने पहल शुरू की है। योजना एवं विकास विभाग के अंतर्गत अर्थ एवं सांख्यिकी निदेशालय, बिहार, पटना की ओर से कृषि सांख्यिकी से जुड़े पदाधिकारियों, कर्मियों और अन्य संबंधित प्रतिभागियों के लिए दो दिवसीय राज्य स्तरीय वार्षिक आवृत्तीय प्रशिक्षण-सह-कार्यशाला आयोजित की जा रही है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य कृषि सांख्यिकी के संग्रहण, संधारण, सत्यापन और विश्लेषण से जुड़ी प्रक्रियाओं को मजबूत करना है, ताकि राज्य में कृषि क्षेत्र की वास्तविक स्थिति का आकलन बेहतर तरीके से किया जा सके। कार्यक्रम में योजना एवं विकास मंत्री भगवान सिंह कुशवाहा की गरिमामयी उपस्थिति रही। इस अवसर पर योजना एवं विकास विभाग के अवर सचिव श्याम बिहारी मीणा, अर्थ एवं सांख्यिकी निदेशालय के निदेशक डॉ. नुरूल हक शिवानी सहित विभाग के वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे।
कृषि सांख्यिकी से बेहतर योजना निर्माण पर जोर
बिहार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में कृषि की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में कृषि क्षेत्र से संबंधित सटीक और समयबद्ध आंकड़े सरकार की योजनाओं और नीतियों के निर्माण में अहम योगदान देते हैं। इन आंकड़ों के माध्यम से कृषि उत्पादन, फसल की स्थिति, ग्रामीण गतिविधियों और संसाधनों की जरूरतों का आकलन किया जा सकता है। प्रशिक्षण-सह-कार्यशाला में इसी विषय को ध्यान में रखते हुए कृषि सांख्यिकी से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर प्रतिभागियों को जानकारी दी जा रही है। साथ ही, आंकड़ों की गुणवत्ता में सुधार और सांख्यिकीय विश्लेषण की क्षमता विकसित करने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
दक्षिण और उत्तर बिहार के लिए दो चरणों में प्रशिक्षण
राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम को दक्षिण बिहार और उत्तर बिहार के प्रतिभागियों के लिए दो चरणों में आयोजित किया गया है। दक्षिण बिहार के प्रतिभागियों के लिए प्रशिक्षण 22 और 23 सितंबर 2026 को निर्धारित किया गया था। वहीं, उत्तर बिहार के प्रतिभागियों के लिए प्रशिक्षण 24 और 25 सितंबर 2026 को आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम में सभी प्रमंडलों के प्रमंडलीय उप निदेशक, सांख्यिकी, जिला सांख्यिकी पदाधिकारी, अन्य सांख्यिकी पदाधिकारी और संबंधित कर्मी हिस्सा ले रहे हैं। इस प्रशिक्षण के जरिए विभागीय स्तर पर कार्यरत मानव संसाधनों की तकनीकी दक्षता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।

आंकड़ों के संग्रहण और गुणवत्ता सुधार पर विशेष ध्यान
कार्यशाला के दौरान कृषि गतिविधियों से संबंधित आंकड़ों के संग्रहण, मैदानी सर्वेक्षण, आंकड़ों के सत्यापन और व्यवस्थित संधारण की प्रक्रियाओं पर चर्चा की जा रही है। इसके अलावा सांख्यिकीय विश्लेषण के माध्यम से कृषि क्षेत्र की स्थिति को समझने के तरीकों की जानकारी भी दी जा रही है। प्रशिक्षण में आधुनिक और डिजिटल माध्यमों के उपयोग पर भी जोर दिया जा रहा है। विभाग का उद्देश्य उपलब्ध सूचनाओं को व्यवस्थित तरीके से संकलित कर उनका प्रभावी विश्लेषण करना है, जिससे कृषि क्षेत्र से संबंधित योजनाओं के लिए तथ्यात्मक आधार तैयार किया जा सके।
डेटा आधारित नीति निर्माण को मिलेगा बढ़ावा
प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से कृषि सांख्यिकी के संग्रहण और विश्लेषण की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। विश्वसनीय आंकड़ों के आधार पर योजनाओं की प्राथमिकताएं तय करने, संसाधनों का बेहतर उपयोग करने और विकास कार्यक्रमों की निगरानी में सहायता मिल सकती है। कार्यक्रम में मंत्री भगवान सिंह कुशवाहा की उपस्थिति को विभागीय प्रतिबद्धता के संकेत के रूप में देखा गया। योजना एवं विकास विभाग की प्राथमिकताओं में डेटा आधारित योजना निर्माण, योजनाओं की निगरानी और विकास कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन को मजबूत करना शामिल है।

विश्वसनीय आंकड़ों से कृषि विकास को मिलेगी मजबूती
अर्थ एवं सांख्यिकी निदेशालय की ओर से आयोजित यह प्रशिक्षण कार्यक्रम कृषि सांख्यिकी से जुड़े पदाधिकारियों और कर्मियों की क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ राज्य में आंकड़ा संग्रहण की व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक पहल है। प्रशिक्षण से प्राप्त तकनीकी जानकारी को मैदानी स्तर पर लागू करने से कृषि संबंधी आंकड़ों की शुद्धता, विश्वसनीयता और समयबद्धता में सुधार की उम्मीद है। इससे बिहार में साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण और कृषि विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को सहयोग मिल सकता है।
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