Bank Strike 2026, रांची: देशभर में बैंक कर्मचारियों की पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव आलोक कुमार दूबे ने बैंक कर्मियों की मांगों का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि बैंकों में भी 5 वर्किंग डे की व्यवस्था लागू करने पर गंभीरता से विचार होना चाहिए। बैंक यूनियनों ने 28 से 30 सितंबर 2026 तक तीन दिवसीय देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है। केंद्र सरकार के अनुसार, पांच-दिवसीय बैंकिंग सप्ताह इस समय यूनियनों की प्रमुख मांग है।
डिजिटल बैंकिंग के दौर में 5 वर्किंग डे की मांग
आलोक कुमार दूबे ने कहा कि बैंकिंग व्यवस्था पिछले कुछ वर्षों में काफी बदल गई है। ATM, इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग और UPI जैसी डिजिटल सेवाओं के कारण ग्राहकों को कई बैंकिंग सुविधाएं चौबीसों घंटे उपलब्ध रहती हैं। उनका कहना है कि जब बैंकिंग सेवाओं का बड़ा हिस्सा डिजिटल माध्यम से संचालित हो रहा है, तो कर्मचारियों के कार्यदिवस और अवकाश की व्यवस्था की भी मौजूदा तकनीकी व्यवस्था के अनुरूप समीक्षा की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि द्वितीय और अंतिम शनिवार को बैंक बंद रहने की व्यवस्था पहले से लागू है। ऐसे में कर्मचारियों की लंबे समय से चली आ रही पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह की मांग पर भी सकारात्मक तरीके से विचार किया जाना चाहिए।
Bank Strike 2026: स्टाफ की कमी और भर्ती का मुद्दा उठाया
कांग्रेस नेता ने बैंकों में पर्याप्त संख्या में कर्मचारियों की नियुक्ति की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्टाफ की कमी का असर बैंक कर्मचारियों के काम के दबाव के साथ-साथ ग्राहकों को मिलने वाली सेवाओं पर भी पड़ता है। उन्होंने विशेष रूप से ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में बैंकिंग सेवाओं के लिए पर्याप्त मानव संसाधन को जरूरी बताया। उनके मुताबिक, बैंकिंग व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखने के लिए रिक्त पदों पर भर्ती की जरूरत है।
बैंक यूनियनों की मौजूदा मांगों में भी रिक्त पदों पर भर्ती और अन्य कर्मचारी हित से जुड़े मुद्दे शामिल रहे हैं। झारखंड में 11 सितंबर की पिछली राष्ट्रव्यापी हड़ताल के दौरान कर्मचारी संगठनों ने पांच-दिवसीय बैंकिंग सप्ताह के साथ भर्ती समेत कई मांगें उठाई थीं।
निजीकरण और बैंकिंग चार्ज पर भी उठाए सवाल
आलोक कुमार दूबे ने बैंकों के निजीकरण की प्रक्रिया का विरोध करने की मांग का भी समर्थन किया। उन्होंने कहा कि बैंक केवल व्यावसायिक संस्थान नहीं हैं, बल्कि आम लोगों की वित्तीय जरूरतों और देश की अर्थव्यवस्था से सीधे जुड़े हैं। उन्होंने ग्राहकों से लिए जाने वाले विभिन्न बैंकिंग शुल्क और चार्ज की भी समीक्षा किए जाने की मांग की। उनका कहना है कि छोटे खाताधारकों और आम ग्राहकों पर अतिरिक्त शुल्क का बोझ डालने से पहले उसके सामाजिक और आर्थिक प्रभाव को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
सरकार और बैंक प्रबंधन से बातचीत की अपील
आलोक कुमार दूबे ने कहा कि बैंकिंग क्षेत्र को मजबूत करने के लिए कर्मचारियों के हित और ग्राहकों को मिलने वाली सेवाओं—दोनों पर ध्यान देना जरूरी है। उन्होंने केंद्र सरकार और बैंक प्रबंधन से कर्मचारियों की मांगों पर बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की। मौजूदा आंदोलन के बीच केंद्र सरकार ने कहा है कि पांच-दिवसीय बैंकिंग सप्ताह को लेकर यूनियनों के साथ बातचीत हुई है।
सरकार ने यह भी बताया है कि PLI योजना को फिलहाल स्थगित रखने का फैसला किया गया है, जबकि पांच-दिवसीय कार्यसप्ताह की मांग पर वार्ता जारी है। 28 से 30 सितंबर की हड़ताल के कारण शाखा आधारित बैंकिंग सेवाएं प्रभावित होने की संभावना है। वित्त मंत्रालय ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को हड़ताल के दौरान जरूरी सेवाएं बनाए रखने और ATM में पर्याप्त नकदी उपलब्ध रखने के निर्देश दिए हैं।
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