Bihar SIR: विपक्ष के आरोपों पर CM सम्राट चौधरी का पलटवार, बोले- पात्र मतदाताओं का नाम नहीं काटा गया

Bihar SIR, पटना: बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR (Special Intensive Revision) को लेकर चल रही राजनीतिक बहस के बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने विपक्ष के आरोपों को तथ्यहीन और बेबुनियाद बताया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में SIR की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार और पारदर्शी तरीके से पूरी की गई। 27 सितंबर को मुख्यमंत्री सचिवालय स्थित ‘संवाद’ कक्ष में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में सम्राट चौधरी ने SIR से जुड़े विभिन्न राजनीतिक दलों के सवालों पर सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची के सत्यापन के दौरान पात्र मतदाताओं के नाम नहीं काटे गए और जिन लोगों को अपनी पात्रता या नाम से संबंधित आपत्ति थी, उनके लिए दावा और आपत्ति दर्ज कराने की पूरी प्रक्रिया उपलब्ध रही।

SIR में मृत और स्थानांतरित मतदाताओं का हुआ सत्यापन

मुख्यमंत्री के अनुसार बिहार में SIR की प्रक्रिया 24 जून 2025 से 25 जुलाई 2025 तक चली थी। इस दौरान मतदाता सूची में शामिल नामों का सत्यापन किया गया। उन्होंने बताया कि सत्यापन के दौरान मृत व्यक्तियों, स्थायी रूप से दूसरे स्थान पर जा चुके लोगों और एक से अधिक जगहों पर दर्ज मतदाताओं से संबंधित प्रविष्टियों की जांच की गई। जिन मतदाताओं की पात्रता को लेकर कोई समस्या थी, उनके लिए दावा और आपत्ति दर्ज कराने की व्यवस्था रखी गई। सम्राट चौधरी ने कहा कि निर्वाचन आयोग ने वर्ष 2003 की मतदाता सूची को ऑनलाइन उपलब्ध कराया था, ताकि वर्तमान SIR के दौरान पात्र मतदाता अपने पुराने विवरण का सत्यापन कर सकें।

आधार कार्ड को लेकर भी CM ने रखी स्थिति

मुख्यमंत्री ने कहा कि SIR के दौरान निर्धारित दस्तावेजों के आधार पर मतदाता विवरण का सत्यापन किया गया। उन्होंने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के बाद आधार कार्ड को पहचान से संबंधित दस्तावेज के रूप में स्वीकार किया गया। हालांकि, मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि आधार पहचान स्थापित करने के लिए स्वीकार्य है, लेकिन यह नागरिकता का प्रमाण नहीं है। SIR को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी और राजद नेता तेजस्वी प्रसाद यादव की ओर से उठाए गए सवालों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि निर्वाचन आयोग संबंधित मामलों पर अपनी स्थिति स्पष्ट कर चुका है। उन्होंने कहा कि यदि किसी पात्र व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में नहीं है या कोई वास्तविक शिकायत है, तो उसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत सामने लाया जाना चाहिए।

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विपक्ष से बोले CM- तथ्य और प्रमाण के साथ रखें बात

सम्राट चौधरी ने कहा कि विपक्षी दलों को लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है, लेकिन उन्हें आरोपों के साथ तथ्य और प्रमाण भी रखने चाहिए। उन्होंने कहा कि चुनाव संबंधी शिकायतों के लिए निर्वाचन आयोग के साथ न्यायिक व्यवस्था भी उपलब्ध है। मुख्यमंत्री ने निर्वाचन आयोग और न्यायपालिका को लोकतांत्रिक व्यवस्था की महत्वपूर्ण संस्थाएं बताते हुए कहा कि SIR की प्रक्रिया बिहार के सभी क्षेत्रों में निर्धारित नियमों के तहत पूरी की गई। उन्होंने यह भी कहा कि मतदाता सूची एक गतिशील सूची है। समय-समय पर नए पात्र मतदाताओं के नाम जोड़े जाते हैं, जबकि मृत्यु, स्थानांतरण और अन्य कारणों से जरूरी संशोधन भी किए जाते हैं।

विकास के मुद्दे पर भी विपक्ष को घेरा

मुख्यमंत्री ने SIR के मुद्दे के साथ केंद्र और राज्य सरकार की विकास योजनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में विकास की गति तेज होने की बात कही और आवास निर्माण समेत विभिन्न योजनाओं के माध्यम से गरीब एवं वंचित परिवारों को लाभ मिलने का दावा किया। मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाते हुए राजनीतिक दलों से कहा कि वे जनहित के मुद्दों को लेकर जनता के बीच जाएं और अपनी बात तथ्यपरक तरीके से रखें। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता मालिक है और जनता अपने मताधिकार के माध्यम से अपने प्रतिनिधियों का चयन करती है। मुख्यमंत्री के बयान के मुताबिक मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े सवालों को तथ्य, प्रमाण और निर्धारित संस्थागत प्रक्रिया के माध्यम से उठाया जाना चाहिए।

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