Bihar Saras Mela, पटना: बिहार सरस मेला अब अपने अंतिम दौर में पहुंच गया है, लेकिन मेले में खरीदारी का उत्साह कम होने के बजाय और बढ़ता दिख रहा है। रविवार को छुट्टी के दिन पटना के ज्ञान भवन परिसर में सुबह से ही लोगों की भीड़ जुटी रही। कोई हस्तशिल्प खरीदता नजर आया तो कोई देश के अलग-अलग राज्यों के पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद लेने पहुंचा। 20 सितंबर 2026 से शुरू हुआ बिहार सरस मेला 29 सितंबर तक चलेगा। मेले के सात दिनों में स्टॉल संचालकों की बिक्री का आंकड़ा ढाई करोड़ रुपये के पार पहुंच चुका है। वहीं अब तक तीन लाख से अधिक लोग मेले में पहुंच चुके हैं।
लोककलाओं से सजे कपड़ों की बढ़ी मांग
सरस मेले में बिहार समेत देश के अलग-अलग हिस्सों की लोककला और हस्तशिल्प से जुड़े उत्पाद लोगों को आकर्षित कर रहे हैं। बावनबूटी, सिक्की कला, सुजनी, काथा और भरवा कला से तैयार परिधानों की खास मांग देखने को मिल रही है। मेले में आने वाले लोग पारंपरिक कला से तैयार कपड़ों और दूसरे उत्पादों की खरीदारी कर रहे हैं। खास बात यह है कि इन उत्पादों के पीछे महिला उद्यमियों और स्वयं सहायता समूहों की मेहनत भी देखने को मिल रही है।
सारण की रीता देवी बनीं मेले की स्टार उद्यमी
सरस मेले में सारण जिले के दिघवारा प्रखंड की रीता देवी की कहानी लोगों का ध्यान खींच रही है। श्याम जीविका स्वयं सहायता समूह से जुड़ी रीता देवी ने मेले में अकेले एक लाख रुपये से अधिक की कुर्ती और सलवार सूट बेच दिए हैं। रीता देवी के लिए सिलाई सिर्फ एक हुनर नहीं रही, बल्कि यही हुनर अब उनके लिए रोजगार और दूसरी महिलाओं के लिए काम का जरिया बन गया है। उन्हें सिलाई मशीन मायके से मिली थी, जबकि कपड़े तैयार करने का हुनर उन्होंने अपनी मां से सीखा। बाद में उन्होंने इसी हुनर को स्वरोजगार से जोड़ा और अपनी छोटी परिधान इकाई शुरू की। आज उनकी इकाई में 18 जीविका दीदियों को रोजगार मिला हुआ है।
कपड़ों की कतरन से भी बनाती हैं आकर्षक उत्पाद
रीता देवी के काम की एक खास बात यह है कि वह कपड़ों की कतरन को भी बेकार नहीं जाने देतीं। इन्हीं से वह अलग-अलग तरह के उत्पाद तैयार करती हैं। उन्होंने सुजनी, काथा, गुदरी और भरवा कला को कुर्ती और सलवार सूट पर उकेरकर पारंपरिक कला को आधुनिक परिधानों के साथ जोड़ा है। सरस मेले में इसी तरह के लोककला आधारित परिधानों की मांग देखने को मिल रही है। जीविका के सहयोग से रीता देवी को सरस मेला जैसे बड़े मंच पर अपने उत्पाद बेचने का अवसर मिला है। मेले में हुई बिक्री उनके कारोबार के लिए नए बाजार की संभावनाएं भी खोल रही है।

135 स्टॉल और फूड एरिया में लगी लंबी कतारें
सरस मेले में कुल 135 स्टॉल लगाए गए हैं। हस्तशिल्प और परिधानों के साथ मेले का फूड एरिया भी लोगों के आकर्षण का बड़ा केंद्र बना हुआ है। यहां 17 फूड स्टॉलों पर देशी व्यंजनों का स्वाद लेने के लिए लोगों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं। सात दिनों में ढाई करोड़ रुपये से अधिक की बिक्री का आंकड़ा स्टॉल संचालकों की ओर से उपलब्ध कराई गई रिपोर्ट पर आधारित है। रविवार तक मेले में तीन लाख से अधिक लोगों के पहुंचने की जानकारी दी गई है।

महिला उद्यमियों को बाजार की समझ देने की कोशिश
सरस मेले में सिर्फ खरीद-बिक्री ही नहीं, बल्कि महिला उद्यमियों को बाजार की जरूरतों से जोड़ने की पहल भी की जा रही है। जीविका और अर्न्स्ट एंड यंग के सहयोग से क्रेता-विक्रेता संवाद कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इसमें बाजार विशेषज्ञ महिला उद्यमियों के उत्पादों की गुणवत्ता, पैकेजिंग और मार्केटिंग को लेकर सुझाव दे रहे हैं। विशेषज्ञों ने लोककला आधारित उत्पादों को ब्रांड के रूप में विकसित कर बड़े बाजार तक पहुंचाने के तरीकों पर भी चर्चा की। मेले में स्वच्छता, स्वास्थ्य एवं सहायता केंद्र, सुरक्षा, सीसीटीवी निगरानी और आगंतुकों के लिए बैठने एवं पेयजल जैसी व्यवस्थाएं भी की गई हैं। अब 29 सितंबर को मेले का समापन होना है, ऐसे में हस्तशिल्प और पारंपरिक उत्पादों के खरीदारों के लिए यह आखिरी मौका है।

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