Bihar Saras Mela: 3 करोड़ पार कारोबार और 2.75 लाख खरीदार, जानिए क्यों छाया बिहार सरस मेला

Bihar Saras Mela, पटना: गांधी मैदान स्थित ज्ञान भवन में चल रहे बिहार सरस मेले में खरीदारी को लेकर लोगों का उत्साह लगातार बढ़ रहा है। 20 सितंबर से शुरू हुए मेले में आठ दिनों के भीतर कारोबार का आंकड़ा 3 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है। अकेले 27 सितंबर यानी रविवार को करीब 64 लाख रुपये की खरीद-बिक्री हुई। मेले में उमड़ रही भीड़ और अलग-अलग उत्पादों की खरीदारी को देखते हुए इस 10 दिवसीय आयोजन में कुल कारोबार 5 करोड़ रुपये से अधिक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। अब तक करीब 2.75 लाख से अधिक लोग खरीदार के तौर पर मेले में पहुंच चुके हैं।

15 राज्यों की महिला उद्यमियों ने लगाए स्टॉल

ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने और स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिला उद्यमियों को बड़े बाजार से जोड़ने के उद्देश्य से पटना में वर्ष 2014 से सरस मेले का आयोजन किया जा रहा है। इस वर्ष मेले में बिहार के साथ देश के 15 राज्यों की स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिला उद्यमियों ने अपने उत्पादों के स्टॉल लगाए हैं। कुल 135 स्टॉल में अकेले बिहार की जीविका दीदियों के 72 स्टॉल शामिल हैं। मेले में अलग-अलग राज्यों की पारंपरिक कला, हस्तशिल्प और परिधानों को एक ही जगह देखने और खरीदने का मौका लोगों को मिल रहा है।

मधुबनी पेंटिंग से पैठणी तक, इन सामानों की बढ़ी मांग

सरस मेले में बिहार की मधुबनी पेंटिंग, सुजनी कला, सिक्की शिल्प, टेराकोटा और भागलपुरी सिल्क लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। वहीं राजस्थान की लाख की चूड़ियां, गुजरात का बंधेज, महाराष्ट्र की पैठणी, गोवा का हस्तशिल्प, पश्चिम बंगाल का जूट और असम का बांस शिल्प भी खरीदारों को पसंद आ रहा है। इसके अलावा खादी, सिल्क, कॉटन और कोसा से बनी साड़ियां, सलवार-सूट, नाइटी, फुलकारी और चिकनकारी जैसे परिधानों की भी बिक्री हो रही है। घरेलू सजावट से जुड़े उत्पाद भी लोगों को आकर्षित कर रहे हैं। कालीन, रग्स, आराम कुर्सी, लैम्प, झूमर, तोरण, कृत्रिम फूल और गमलों जैसे सामान के स्टॉल पर भी खरीदार पहुंच रहे हैं।

लिट्टी-चोखा से शहद तक, खाने के स्टॉल पर भी भीड़

सरस मेले में खरीदारी के साथ खान-पान भी लोगों के आकर्षण का बड़ा हिस्सा बना हुआ है। मधुग्राम महिला उत्पादक समूह लिमिटेड के स्टॉल पर शुद्ध और पौष्टिक मधु की बिक्री हो रही है। वहीं फूड कोर्ट में दीदी की रसोई के स्टॉल पर लिट्टी-चोखा समेत कई देसी व्यंजनों का लोग स्वाद ले रहे हैं। अचार, पापड़, चाट और आयुर्वेदिक पाचक जैसे पारंपरिक खाद्य उत्पादों की भी बिक्री हो रही है। इससे मेले में आने वाले लोगों को एक ही जगह खरीदारी के साथ अलग-अलग क्षेत्रों के स्वाद का अनुभव भी मिल रहा है।

 

रविवार को 75 हजार से ज्यादा लोग पहुंचे

मेले में अब तक करीब पौने तीन लाख लोग खरीदार के रूप में पहुंच चुके हैं। रविवार को पटना और आसपास के जिलों से 75 हजार से अधिक लोगों ने ज्ञान भवन पहुंचकर खरीदारी की। बढ़ती भीड़ और कारोबार के आंकड़ों ने महिला स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों के प्रति लोगों की रुचि को भी सामने रखा है। अलग-अलग राज्यों के पारंपरिक उत्पादों के साथ ग्रामीण महिलाओं द्वारा तैयार वस्तुओं को बाजार मिलने से उनकी उद्यमिता को बढ़ावा मिल रहा है। ग्रामीण विकास विभाग और सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि जीविका ने महिला सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण काम किया है। उनके अनुसार, सरस मेला केवल उत्पादों की बिक्री का माध्यम नहीं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के हुनर, स्वावलंबन और आत्मनिर्भरता को सामने लाने का मंच भी है। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं ने अवसर मिलने पर अपनी क्षमता साबित की है। मंत्री ने सतत जीविकोपार्जन योजना और मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना को गांवों के विकास और गरीबी उन्मूलन से जुड़ी महत्वपूर्ण पहल बताया। सरस मेले का आयोजन ग्रामीण महिलाओं के उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के साथ उनके कारोबार और उद्यमिता को व्यापक पहचान देने के उद्देश्य से किया जा रहा है। मेले में बढ़ती खरीदारों की संख्या और कारोबार इस आयोजन के प्रति लोगों की बढ़ती रुचि को दर्शा रही है।

यह भी पढ़ें: Bihar Education PTM: जब मुख्यमंत्री बने अभिभावक, PTM से बदला स्कूल और परिवार के संवाद का नजरिया

Bihar Mineral Resources: बिहार की जमीन के नीचे क्या है? खनिज...

Bihar Mineral Resources: बिहार के खनिज संसाधनों के विकास और इनके आधुनिक तरीके से उपयोग को लेकर केंद्र और राज्य सरकार ने कवायद तेज...

Ranchi T20 Ticket Price: 9 अक्टूबर को Ranchi में India-West Indies...

Ranchi T20 Ticket Price, रांची: क्रिकेट प्रेमियों के लिए रांची में एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का रोमांच लौटने वाला है। 9 अक्टूबर को...

Bihar Tribal Development: शिक्षा से रोजगार तक बदलेगी तस्वीर? बिहार के...

Bihar Tribal Development: बिहार के जनजातीय क्षेत्रों में विकास योजनाओं को स्थानीय जरूरतों से जोड़ने की पहल तेज हो गई है। इसके तहत राज्य...