झारखंड हाईकोर्ट ने सहायक आचार्य परीक्षा 2023 के Normalization Formula की तकनीकी जांच का निर्देश दिया है। BIT मेसरा विशेषज्ञ समिति बनाएगा।
Assistant Teacher Exam रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने प्रशिक्षित सहायक आचार्य संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा 2023 में लागू नॉर्मलाइजेशन फॉर्मूले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सोमवार को सुनवाई की। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने मामले में बीआईटी मेसरा को प्रतिवादी बनाते हुए विशेषज्ञ समिति गठित करने का निर्देश दिया है। समिति नॉर्मलाइजेशन फॉर्मूले की तकनीकी जांच कर अदालत को रिपोर्ट देगी और बताएगी कि फॉर्मूला उचित है या नहीं तथा परीक्षा परिणाम तैयार करने में इसका सही तरीके से इस्तेमाल हुआ या नहीं।
Assistant Teacher Exam:BIT Mesra बनाएगा विशेषज्ञ समिति, 29 अक्टूबर को अगली सुनवाई
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद बीआईटी मेसरा को मामले में प्रतिवादी बनाने का निर्देश दिया। बीआईटी मेसरा के अधिवक्ता ने नोटिस प्राप्त कर लिया है। अदालत ने माना कि नॉर्मलाइजेशन फॉर्मूले को लेकर उठे विवाद के तकनीकी समाधान के लिए विशेषज्ञ राय जरूरी है।
अब बीआईटी मेसरा एक विशेषज्ञ समिति गठित करेगा। समिति परीक्षा में अपनाए गए नॉर्मलाइजेशन फॉर्मूले और उसके इस्तेमाल की तकनीकी जांच करेगी तथा विस्तृत रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत करेगी। जेएसएससी को भी समिति को जरूरी तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई 29 अक्टूबर 2026 को होगी।
यह मामला गिरधर प्रसाद राउत समेत अन्य अभ्यर्थियों की ओर से दायर याचिकाओं से जुड़ा है। सहायक आचार्य संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा 2023 के तहत 26,001 पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया में जेएसएससी ने नॉर्मलाइजेशन लागू किया था।
Key Highlights
- झारखंड हाईकोर्ट ने नॉर्मलाइजेशन फॉर्मूले की तकनीकी जांच का आदेश दिया।
- बीआईटी मेसरा विशेषज्ञ समिति गठित कर फॉर्मूले की जांच करेगा।
- समिति को फॉर्मूले की शुद्धता और उसके इस्तेमाल की प्रक्रिया पर रिपोर्ट देनी है।
- अभ्यर्थियों ने नियुक्ति नियमावली में नॉर्मलाइजेशन का स्पष्ट प्रावधान नहीं होने का तर्क दिया है।
- मामले की अगली सुनवाई 29 अक्टूबर 2026 को होगी।
Assistant Teacher Exam:अभ्यर्थियों ने उठाए Normalization Formula पर सवाल
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरीय अधिवक्ता राजेंद्र कृष्ण, वरीय अधिवक्ता अजीत कुमार, अधिवक्ता अमृतांश वत्स, अधिवक्ता शेखर प्रसाद गुप्ता समेत अन्य अधिवक्ताओं ने पक्ष रखा। उनका कहना है कि परीक्षा में लागू नॉर्मलाइजेशन फॉर्मूले से अभ्यर्थियों के परिणाम प्रभावित हुए हैं।
अभ्यर्थियों की प्रमुख आपत्तियां हैं कि नियुक्ति नियमावली में नॉर्मलाइजेशन का स्पष्ट प्रावधान नहीं है। इसके बावजूद परीक्षा परिणाम तैयार करने में इस प्रक्रिया को लागू किया गया। याचिकाकर्ताओं ने अलग-अलग पालियों में प्रश्नपत्रों की कठिनाई के आधार पर अंक निर्धारित करने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं।
विवाद के मुख्य बिंदु
- अभ्यर्थियों ने नॉर्मलाइजेशन लागू किए जाने की वैधानिकता पर सवाल उठाया है।
- अलग-अलग पालियों के प्रश्नपत्रों की कठिनाई के आधार पर अंक समायोजन की प्रक्रिया पर आपत्ति है।
- याचिकाकर्ताओं ने नॉर्मलाइजेशन के आधार पर तैयार परिणाम की गणना प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं।
- जेएसएससी का पक्ष है कि परीक्षा के विज्ञापन में नॉर्मलाइजेशन की जानकारी दी गई थी।
- अब तकनीकी विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट के आधार पर अदालत मामले में आगे सुनवाई करेगी।
Assistant Teacher Exam:JSSC ने क्या कहा
जेएसएससी की ओर से अभ्यर्थियों की दलीलों का विरोध किया गया। आयोग का कहना है कि परीक्षा के विज्ञापन में नॉर्मलाइजेशन लागू किए जाने की जानकारी दी गई थी। सितंबर 2026 की पिछली सुनवाई में भी आयोग ने अदालत में इस संबंध में अपना जवाब दाखिल किया था।
जेएसएससी की ओर से अदालत में यह भी बताया गया कि सहायक आचार्य परीक्षा से जुड़े कुछ अन्य मुद्दे सुप्रीम कोर्ट में भी विचाराधीन हैं। आयोग ने इसी आधार पर एक ही मुद्दे की अलग-अलग अदालतों में सुनवाई को लेकर आपत्ति जताई।
Assistant Teacher Exam:एक मिनट में समझें, क्या है Normalization?
जब कोई परीक्षा अलग-अलग पालियों में आयोजित होती है तो प्रश्नपत्रों की कठिनाई का स्तर एक जैसा होना जरूरी नहीं है। यदि एक पाली का प्रश्नपत्र अपेक्षाकृत कठिन और दूसरी पाली का आसान हो, तो केवल वास्तविक अंकों के आधार पर मेरिट तैयार करने से अलग-अलग पालियों के अभ्यर्थियों के बीच अंक प्रभावित हो सकते हैं।
ऐसी स्थिति में अलग-अलग पालियों के अंकों को एक समान सांख्यिकीय पैमाने पर लाने के लिए नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया का इस्तेमाल किया जाता है। सहायक आचार्य परीक्षा के मामले में विवाद इस बात पर है कि जेएसएससी ने जिस फॉर्मूले को लागू किया, वह नियुक्ति नियमों के अनुरूप था या नहीं और उसके आधार पर परिणाम तैयार करने की प्रक्रिया सही थी या नहीं। इन तकनीकी सवालों की जांच अब बीआईटी मेसरा की विशेषज्ञ समिति करेगी।


















