Bihar Mineral Resources: बिहार के खनिज संसाधनों के विकास और इनके आधुनिक तरीके से उपयोग को लेकर केंद्र और राज्य सरकार ने कवायद तेज कर दी है। केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने कहा है कि राज्य में उपलब्ध खनिज संपदा के वैज्ञानिक और आधुनिक तकनीक आधारित उपयोग के लिए केंद्र सरकार हरसंभव सहयोग देगी। सोमवार को पटना के होटल ताज में बिहार के खनिज संसाधनों के विकास को लेकर आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में खनिज अन्वेषण, ब्लॉकों के विकास, ई-नीलामी, उत्पादन और प्रेषण समेत कई मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक में खास तौर पर भूमिगत कोयला गैसीकरण जैसी आधुनिक तकनीक से खनिज संसाधनों के उपयोग की संभावनाओं पर जोर दिया गया।
भूमिगत कोयला गैसीकरण पर भी होगी कवायद

केंद्रीय मंत्री ने भागलपुर जिले में अन्वेषित कोयला ब्लॉक में भूमिगत कोयला गैसीकरण की संभावनाओं की समीक्षा करने की बात कही। संबंधित अधिकारियों के साथ इसकी संभावनाओं पर चर्चा कर आगे की कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। भूमिगत कोयला गैसीकरण को कोयले के उपयोग की आधुनिक तकनीक के तौर पर देखा जा रहा है। बैठक में बिहार के कोयला संसाधनों के बेहतर और तकनीक आधारित उपयोग की संभावनाओं पर विस्तार से विचार किया गया। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि बिहार की खनिज संपदा को विकसित करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार मिलकर काम करेंगी। खनिज संसाधनों की पहचान से लेकर उनके व्यावसायिक उपयोग तक की प्रक्रिया को गति देने पर जोर दिया गया।
निवेशकों को आकर्षित करने के लिए पटना में होगा रोड शो

बिहार के खनिज संसाधनों में संभावित निवेशकों और बोलीदाताओं की रुचि बढ़ाने के लिए पटना में रोड शो आयोजित करने की दिशा में भी पहल की जाएगी। इस रोड शो के माध्यम से निवेशकों को राज्य में उपलब्ध खनिज संसाधनों और उनकी तकनीकी संभावनाओं की जानकारी देने की योजना है। इसका उद्देश्य खनिज क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं को सामने लाना और संभावित बोलीदाताओं को आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराना है।
निजी एजेंसियों से भी खनिज अन्वेषण को गति देने की तैयारी

बैठक में बिहार में खनिज अन्वेषण की गतिविधियों को तेज करने पर भी चर्चा हुई। भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण यानी GSI के साथ-साथ अधिसूचित निजी अन्वेषण एजेंसियों की भागीदारी से विभिन्न खनिजों का व्यापक अन्वेषण करने पर जोर दिया गया। बैठक में कहा गया कि खनिज संसाधनों की पहचान से लेकर उनके व्यावसायिक इस्तेमाल तक की प्रक्रिया को तेज करने के लिए केंद्र और राज्य के संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। इससे राज्य में उपलब्ध खनिज संसाधनों की संभावनाओं को सामने लाने और आगे उनके विकास की प्रक्रिया को गति देने में मदद मिल सकती है।
कई खनिज ब्लॉकों की ई-नीलामी और उत्पादन की समीक्षा
बैठक के दौरान विभिन्न खनिज ब्लॉकों की ई-नीलामी की प्रगति की भी समीक्षा की गई। इनमें ग्लूकोनाइट, लाइमस्टोन, निकेल-क्रोमियम, PGE और पत्थर से जुड़े ब्लॉक शामिल रहे। रोहतास जिले के पिपराडीह-भुरवा ग्लूकोनाइट ब्लॉक, चुटिया-नौहट्टा ग्लूकोनाइट ब्लॉक और भोरा-कथरा लाइमस्टोन ब्लॉक की स्थिति पर चर्चा की गई। वहीं गया जिले में नीलाम किए गए गेंजाना निकेल-क्रोमियम एवं PGE ब्लॉक में उत्पादन और प्रेषण की स्थिति की भी समीक्षा हुई। केंद्रीय मंत्री ने संबंधित प्रक्रियाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने और खनिज ब्लॉकों से जल्द उत्पादन एवं प्रेषण शुरू करने पर जोर दिया।
औद्योगिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है खनिज संपदा
बैठक में बिहार के खान एवं भूतत्व मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने कहा कि राज्य की खनिज संपदा औद्योगिक और आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने खनिज संसाधनों के वैज्ञानिक, पारदर्शी और सतत उपयोग पर जोर दिया। सरकार की ओर से अन्वेषण से लेकर ई-नीलामी, उत्पादन और प्रेषण तक की पूरी प्रक्रिया को समयबद्ध बनाने की बात कही गई। केंद्र सरकार और संबंधित संस्थानों के सहयोग से बिहार के खनिज क्षेत्र में नई संभावनाओं को विकसित करने पर भी जोर दिया गया। बैठक में खान मंत्रालय, खान एवं भूतत्व विभाग, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण, राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण ट्रस्ट, एमईसीएल समेत अन्य संबंधित संस्थानों के अधिकारी मौजूद रहे।
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