Climate Change Bihar: बिहार में हर साल वज्रपात से 250-300 मौतें! राज्यपाल ने बताया बचाव का सबसे जरूरी तरीका

Climate Change Bihar, पटना: जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों के बीच प्राकृतिक आपदाओं से होने वाली जनहानि को कम करने के लिए वैज्ञानिक तकनीक, सटीक पूर्व चेतावनी और जन-जागरूकता को मजबूत करना जरूरी है। बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन ने कहा कि मौसम संबंधी चेतावनी तभी प्रभावी साबित होगी, जब वह समय रहते समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और लोग उसके आधार पर सुरक्षित व्यवहार अपनाएं। राज्यपाल बुधवार को पटना के दशरथ मांझी श्रम एवं नियोजन संस्थान में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग की ओर से आयोजित दो दिवसीय ‘नेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन क्लाइमेट चेंज क्रॉसरोड्स’ के उद्घाटन समारोह में बोल रहे थे। सम्मेलन 30 सितंबर और 1 अक्टूबर को आयोजित किया जा रहा है।

बिहार में बाढ़ और वज्रपात बड़ी चुनौती

राज्यपाल ने कहा कि बिहार की भौगोलिक स्थिति उसे बाढ़, वज्रपात और दूसरी प्राकृतिक आपदाओं के प्रति संवेदनशील बनाती है। नेपाल से आने वाली नदियों और गंगा के मैदानी क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों के कारण राज्य को अलग तरह की आपदा चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि भौगोलिक परिस्थितियों को बदला नहीं जा सकता, लेकिन वैज्ञानिक अनुसंधान, आधुनिक तकनीक, मजबूत पूर्व चेतावनी प्रणाली और जन-जागरूकता के जरिए आपदाओं के प्रभाव को कम किया जा सकता है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सदस्य के रूप में अपने अनुभव का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि मौसम पूर्वानुमान और चेतावनी तंत्र में हुई वैज्ञानिक प्रगति ने आपदा प्रबंधन को नई दिशा दी है।

ग्लेशियर फेलियर की निगरानी पर जोर

राज्यपाल ने हिमालयी क्षेत्रों में बढ़ती आपदाओं को लेकर ग्लेशियर फेलियर को भविष्य की बड़ी चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि हिमालयी आपदाओं की निगरानी के लिए पारंपरिक मौसम पूर्वानुमान के साथ उपग्रह आधारित तकनीक, अत्याधुनिक सेंसर और दूरसंवेदी तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने लद्दाख, हिमाचल प्रदेश से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक ग्लेशियरों की निगरानी और प्रभावी पूर्व चेतावनी प्रणाली विकसित करने पर जोर दिया। इसके लिए मौसम विभाग, राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र और अन्य वैज्ञानिक संस्थानों के बीच समन्वय जरूरी बताया गया।

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वज्रपात की चेतावनी अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना जरूरी

राज्यपाल ने बिहार सहित पूर्वी भारत के कई राज्यों में वज्रपात को गंभीर चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि मौसम विभाग अब बिजली गिरने की घटना को लेकर काफी पहले चेतावनी उपलब्ध करा रहा है, लेकिन इस सूचना को समय पर अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना अभी भी बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण इलाकों में किसान हमेशा मोबाइल फोन अपने साथ नहीं रखते। ऐसे में केवल मोबाइल संदेशों पर निर्भर रहने के बजाय स्थानीय प्रशासन, सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणाली, लाउडस्पीकर और माइक्रोफोन के जरिए भी तत्काल चेतावनी प्रसारित करने की व्यवस्था मजबूत करनी चाहिए। इसके साथ ही लोगों को मौसम संबंधी चेतावनियों को गंभीरता से लेने और उसके अनुरूप सुरक्षित व्यवहार अपनाने के लिए लगातार जागरूक करने की जरूरत है।

Climate Change Bihar

मौसम पूर्वानुमान की सटीकता बढ़ाने पर काम

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्र ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण कम समय में अत्यधिक बारिश जैसी चरम मौसमी घटनाओं में बढ़ोतरी हो रही है। उन्होंने बताया कि ‘मौसम मिशन’ के तहत वर्ष 2030 तक मौसम पूर्वानुमान की सटीकता में 10 से 15 प्रतिशत सुधार का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही देश में मौसम रडार और स्वचालित मौसम केंद्रों का विस्तार किया जा रहा है। डॉ. महापात्र ने बिहार में वज्रपात से हर वर्ष करीब 250 से 300 लोगों की मौत का उल्लेख करते हुए पूर्व चेतावनी तंत्र को और मजबूत करने की आवश्यकता बताई।

जलवायु संकट से निपटने में युवाओं की भी भागीदारी

केंद्रीय विश्वविद्यालय दक्षिण बिहार, बोधगया के कुलपति डॉ. कामेश्वर नाथ सिंह ने जलवायु संकट से निपटने के लिए वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, नीति-निर्माताओं और समाज के सभी वर्गों के सामूहिक प्रयास पर जोर दिया। उन्होंने मिट्टी, आर्द्रभूमि और जैव विविधता के संरक्षण के साथ पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली अपनाने की जरूरत बताई। सम्मेलन में विशेषज्ञों ने कृषि, जैव विविधता, चरम मौसमी घटनाओं, मानव-पशु स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विषयों पर समाधानपरक शोध और नीतियों की जरूरत पर चर्चा की। सम्मेलन में युवा वैज्ञानिकों और विद्यार्थियों की भागीदारी को भी महत्व दिया गया। डीपीएस की कक्षा 12 की छात्राओं न्यासा और शांभवी तथा छात्र पार्थ ने जलवायु अनुसंधान पर अपनी प्रस्तुति राज्यपाल और विशेषज्ञों के सामने दी। इस दौरान सम्मेलन की शोध-सार पुस्तिका का अनावरण भी राज्यपाल और अन्य अतिथियों ने किया। कार्यक्रम में प्रोफेसर एवं आईएमएस पटना चैप्टर के अध्यक्ष प्रधान पार्थ सारथी, मौसम विज्ञान केंद्र पटना के प्रमुख वैज्ञानिक आशीष कुमार समेत देशभर से आए वैज्ञानिक, शोधकर्ता और विशेषज्ञ मौजूद रहे।

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