Bihar Gandak River Flood Relief: नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में हो रही मूसलाधार बारिश के कारण बिहार की गंडक नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। तटबंधों पर बढ़ते दबाव और कई स्थानों पर हुए कटाव से राज्य के छह जिलों में बाढ़ की स्थिति अत्यंत गंभीर हो गई है। इस विकट परिस्थिति को देखते हुए जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 7, सर्कुलर रोड स्थित अपने आवासीय कार्यालय में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की और पीड़ितों तक अविलंब सहायता पहुंचाने के निर्देश दिए।
नेपाल में भारी बारिश से गंडक उफान पर, 6 जिलों के 250 गांव प्रभावित
नेपाल की तराई वाले इलाकों में लगातार हो रही बारिश से गंडक बैराज से भारी मात्रा में पानी छोड़ा गया है, जिससे निचले इलाकों में जलस्तर अप्रत्याशित रूप से बढ़ गया है।
प्रभावित क्षेत्र: गंडक नदी में आई इस बाढ़ और तटबंध टूटने के कारण सारण, पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सीवान और मुजफ्फरपुर के कई हिस्से जलमग्न हो चुके हैं।
जनजीवन अस्त-व्यस्त: लगभग 250 गांव बाढ़ के पानी से घिर चुके हैं और 3 लाख से अधिक आबादी इससे प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हुई है।
कई प्रमुख संपर्क मार्ग कट जाने से आवागमन ठप हो गया है और ग्रामीण ऊंचे स्थानों पर शरण लेने को विवश हैं।
‘राज्य के खजाने पर पहला हक आपदा पीड़ितों का’—नीतीश कुमार का कड़ा संदेश
बैठक के दौरान नीतीश कुमार ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्राकृतिक आपदा के समय पीड़ितों की सुरक्षा और पुनर्वास सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने अपनी पुरानी नीति को दोहराते हुए कहा:
“हमें यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि राज्य के खजाने पर पहला अधिकार आपदा पीड़ितों का होता है। एनडीए सरकार ने इस सोच के आधार पर जनसेवा का जो मानक तैयार किया है, हमें हमेशा उससे भी बेहतर करने का प्रयास करना चाहिए।”
उन्होंने निर्देश दिया कि संकट की इस घड़ी में लोगों को भोजन, शुद्ध पेयजल, दवाइयां और तिरपाल जैसी बुनियादी सुविधाएं बिना किसी देरी के उपलब्ध कराई जाएं।
उच्चस्तरीय बैठक में राहत कार्यों की समीक्षा
इस महत्वपूर्ण बैठक में आपदा प्रबंधन मंत्री रत्नेश सदा के साथ-साथ जदयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा, जदयू विधायक दल के नेता एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री श्रवण कुमार, विधान परिषद् में सत्तारूढ़ दल के उपनेता श्री ललन सर्राफ और मुख्य सचेतक श्री संजय गांधी उपस्थित रहे।
आपदा प्रबंधन मंत्री रत्नेश सदा ने पूर्व मुख्यमंत्री को अब तक चलाए गए राहत एवं बचाव कार्यों का विस्तृत ब्योरा दिया:
एनडीआरएफ (NDRF) और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमों को संवेदनशील तटबंधों और गांवों में तैनात किया गया है।
फंसे हुए लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए सरकारी एवं निजी नावों का संचालन युद्धस्तर पर किया जा रहा है।
राहत शिविरों में सामुदायिक रसोई (कम्युनिटी किचन) के संचालन की तैयारी पूरी कर ली गई है।

राहत वितरण और प्रशासनिक मुस्तैदी पर जोर
नीतीश कुमार ने राहत कार्यों की प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि प्रशासन को 24 घंटे अलर्ट मोड पर रहना होगा। चूंकि राज्य की अन्य नदियां भी उफान पर हैं, इसलिए जल संसाधन विभाग को तटबंधों की सतत निगरानी और पेट्रोलिंग सुनिश्चित करनी होगी। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी कि राहत वितरण में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

















