Bihar Eco Tourism, पटना: मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में सोमवार को लोक सेवक आवास स्थित ‘संकल्प’ सभागार में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की समीक्षा बैठक हुई। बैठक में राज्य में ईको टूरिज्म, जलाशयों और डैम के आसपास पर्यटकीय सुविधाओं के विकास, पौधारोपण तथा पर्वतीय एवं वन क्षेत्रों में पर्यावरण अनुकूल पर्यटन को बढ़ावा देने पर विस्तार से चर्चा हुई। विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री आनंद किशोर ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से विभाग के कार्यों और ईको टूरिज्म की संभावनाओं की जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने ओढ़नी डैम, खड़गपुर डैम, ताराकोल डैम और जालकुंड डैम सहित अन्य जलाशयों के आसपास पर्यटकीय सुविधाओं के विकास में तेजी लाने का निर्देश दिया।
PPP मॉडल पर विकसित होंगे ईको टूरिज्म प्रोजेक्ट
बैठक में बांका के ओढ़नी डैम, मुंगेर के खड़गपुर डैम, नवादा के ताराकोल डैम और मुंगेर के जालकुंड डैम के आसपास ईको टूरिज्म सुविधाओं के विकास पर चर्चा हुई। खड़गपुर डैम के पास ईको टूरिज्म के लिए जरूरी अवसंरचना विकसित करने तथा पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए ‘ग्लास रूम’ के निर्माण की संभावनाओं पर भी विचार किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन स्थानों पर ईको टूरिज्म के विकास के लिए पर्याप्त सरकारी भूमि उपलब्ध नहीं है, वहां आवश्यकता के अनुसार भूमि का क्रय या अधिग्रहण किया जाए। इसके बाद पीपीपी यानी जन-निजी भागीदारी मॉडल पर ईको टूरिज्म की योजनाएं विकसित करने की दिशा में तेजी से काम किया जाए। उन्होंने ताराकोल डैम और जालकुंड डैम के आसपास ईको टूरिज्म के लिए जरूरी भूमि की उपलब्धता सुनिश्चित करने को भी कहा। साथ ही कसरैया धार, खगड़िया को ईको टूरिज्म स्थल के रूप में विकसित करने का निर्देश दिया।

पहाड़ी क्षेत्रों में रोप-वे और प्राकृतिक सामग्री का इस्तेमाल
मुख्यमंत्री ने राज्य के पहाड़ी और पर्वतीय क्षेत्रों में ईको टूरिज्म को विकसित करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे क्षेत्रों में पर्यावरण के अनुकूल और टिकाऊ सामग्री का ही इस्तेमाल किया जाए। पर्यटक सुविधाओं के विकास में बांस, लकड़ी और अन्य प्राकृतिक सामग्रियों के उपयोग पर जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन स्थानों पर पर्यटकीय दृष्टि से रोप-वे की जरूरत है, वहां रोप-वे निर्माण की दिशा में भी काम किया जाए। इससे प्राकृतिक क्षेत्रों में पर्यटन सुविधाओं को विकसित करने के साथ पर्यावरण संरक्षण पर भी ध्यान देने की बात कही गई।

पहाड़ी इलाकों में सोलराइजेशन और बड़े पैमाने पर पौधारोपण
मुख्यमंत्री ने राज्य के पहाड़ी क्षेत्रों में सोलराइजेशन का काम कराने का निर्देश दिया, ताकि ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा दिया जा सके। इसके अलावा राज्य के बड़े तालाबों और जलाशयों के चारों तरफ व्यापक स्तर पर पौधारोपण जल्द पूरा कराने को कहा गया। मुख्यमंत्री ने निर्धारित पौधारोपण लक्ष्य को शीघ्र पूरा करने और राज्य के हरित आवरण क्षेत्र को बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग को संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर कार्यों में तेजी लाने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के प्राकृतिक संसाधनों और पर्यावरण का संरक्षण करते हुए पर्यटन की संभावनाओं को विकसित किया जाना चाहिए। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने के साथ पर्यटकों को प्राकृतिक वातावरण में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी। बैठक में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉ. रामचन्द्र प्रसाद, मुख्य सचिव श्री प्रत्यय अमृत, अपर मुख्य सचिव श्री आनंद किशोर, मुख्यमंत्री के सचिव श्री लोकेश कुमार सिंह, प्रधान मुख्य वन संरक्षक श्री अरविंदर सिंह सहित अन्य वरीय अधिकारी मौजूद रहे।


















